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गुरु केवल शिक्षा नहीं, जीवन को दिशा भी देते हैं, गुरुजनों के आदर्शों को जीवन में उतारें – योगी आदित्यनाथ

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा भी प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी लोगों से अपने गुरुजनों का सम्मान करने और उनके बताए आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा करने से व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता है और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण की मजबूत नींव रखी जाती है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय मनीषा और सनातन संस्कृति में गुरु को साक्षात परम ब्रह्म का स्वरूप माना गया है। उन्होंने कहा कि विक्रम संवत 2083 की आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का श्रेष्ठ अवसर है।

गुरु पूर्णिमा सभी परंपराओं में आध्यात्मिक चेतना का पर्व

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन परंपरा में यह पर्व महर्षि वेदव्यास की स्मृति में व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। बौद्ध परंपरा में यह भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश और धर्मचक्र प्रवर्तन का स्मृति दिवस है, जबकि जैन परंपरा में इसका संबंध गौतम स्वामी की ज्ञान-दीक्षा से है। उन्होंने कहा कि सिख परंपरा में भी गुरु-वाणी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा गुरु-शिष्य परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का सार्वकालिक उत्सव है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने गुरु वशिष्ठ से ज्ञान और संस्कार प्राप्त कर आदर्श जीवन की मर्यादाओं को आत्मसात किया, जबकि भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने कठोपनिषद का उल्लेख करते हुए कहा कि नचिकेता ने क्षणिक सुख और वैभव के बजाय सत्य, आत्मज्ञान और श्रेय के मार्ग को चुना, जो गुरु की शिक्षा का सर्वोच्च उदाहरण है।

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शिक्षकों के सम्मान और कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जहां गुरु का सम्मान होता है, वही समाज उन्नति करता है। इसी भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने पिछले नौ वर्षों में शिक्षक सम्मान, उनके सशक्तीकरण और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, समयबद्ध सेवा सुविधाएं, आधुनिक डिजिटल संसाधन और क्षमता संवर्धन के माध्यम से शिक्षकों के लिए बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराया है, ताकि वे ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभा सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लगभग 60 लाख शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और उनके आश्रित परिजन लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अलावा उच्च शिक्षा विभाग के राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों और स्ववित्तपोषित संस्थानों के 7.50 लाख से अधिक शिक्षक और उनके आश्रितों को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही 2.50 लाख से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके परिवारों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। साथ ही शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा बीमा कवर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के अंत में कहा कि गुरु स्वयं ज्ञान का प्रकाश हैं, जो शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य, संस्कार और उज्ज्वल जीवन की ओर अग्रसर करते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने गुरुजनों का सदैव सम्मान करने और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि यही विकसित व्यक्ति, विकसित समाज और विकसित उत्तर प्रदेश की सबसे मजबूत आधारशिला है।

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