Home » उत्तर प्रदेश » सिर्फ कड़ा कानून काफी नहीं, युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस ले सरकार : अखिलेश यादव

सिर्फ कड़ा कानून काफी नहीं, युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस ले सरकार : अखिलेश यादव

Facebook
Twitter
WhatsApp

नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में केंद्र सरकार ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ पेश करने जा रही है। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए मौजूदा कानून को और अधिक सख्त बनाना है। हालांकि, समाजवादी पार्टी (सपा) ने प्रस्तावित संशोधन विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल कानून को कठोर बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पार्टी ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।

‘युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं’ : अखिलेश यादव

सपा अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने सरकार पर छात्रों और युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर आंदोलन कर रहे छात्रों और युवाओं पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि सरकार को उनकी लोकतांत्रिक आवाज और जागरूकता का सम्मान करना चाहिए।

अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार जनता की चेतना को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन यही जागरूकता अब सरकार के लिए चुनौती बन गई है। उन्होंने मांग की कि आंदोलन में शामिल युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी दल आपस में चर्चा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष संयुक्त रूप से अपनी भूमिका तय करेगा।

‘सिर्फ सजा बढ़ाने से नहीं रुकेंगे अपराध’ : रामगोपाल यादव

सपा सांसद रामगोपाल यादव ने प्रस्तावित संशोधन विधेयक की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कठोर दंड का प्रावधान करने से अपराध समाप्त नहीं हो जाते।

ALSO READ THIS :  मुजफ्फरनगरः पत्रकारों से कथित अभद्रता के आरोप में SSI के खिलाफ मोर्चा, निलंबन की मांग को लेकर धरने पर बैठे पत्रकार

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हत्या जैसे गंभीर अपराधों के लिए भी कानून में आजीवन कारावास और मृत्युदंड जैसी कठोर सजाएं हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐसे अपराध पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। इसी प्रकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को भी केवल सख्त कानून बनाकर नहीं रोका जा सकता।

रामगोपाल यादव ने कहा कि अधिकांश पेपर लीक उन स्थानों से होते हैं जहां प्रश्नपत्र तैयार या मुद्रित किए जाते हैं, अथवा उन प्रभावशाली कोचिंग संस्थानों के माध्यम से, जिनकी संबंधित तंत्र तक पहुंच होती है। कई मामलों में अंदरूनी मिलीभगत के कारण प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर पहुंच जाते हैं। इसलिए परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही को मजबूत करना अधिक जरूरी है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद इस प्रकार की गड़बड़ियां बढ़ी हैं। उनके अनुसार, डिजिटल सिस्टम में हैकिंग और डेटा लीक की आशंका अधिक रहती है, इसलिए तकनीकी सुरक्षा मजबूत किए बिना केवल नया कानून लाना पर्याप्त नहीं होगा।

‘पहले कदम उठाए जाते तो कई युवाओं की जान बच सकती थी’ : अवधेश प्रसाद

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी प्रस्तावित संशोधन विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार को इस दिशा में पहले ही प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे। उनका कहना था कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई की जाती तो पेपर लीक से परेशान होकर आत्महत्या करने वाले कई युवाओं की जान बचाई जा सकती थी।

उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन, कथित लाठीचार्ज और विपक्षी नेताओं की हिरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सरकार समय पर छात्रों की मांगों पर ध्यान देती, तो ऐसी परिस्थितियां पैदा नहीं होतीं।

ALSO READ THIS :  मेरठ में लव मैरिज के बाद विवाद: "पति करता है शक और मारपीट, मुझे चाहिए तलाक",महिला ने पुलिस से की शिकायत

सपा नेताओं ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए केवल कानून सख्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासनिक सुधार, तकनीकी सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है।

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें