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राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर संतों की बड़ी मांग: परमहंस आचार्य ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, सीएम योगी को ‘आजीवन सर्वोच्च सदस्य’ बनाने की वकालत

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अयोध्या। राम नगरी अयोध्या के प्रसिद्ध सिद्धपीठ तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की व्यवस्था और भविष्य की नियुक्तियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेहद महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से बेहद भावुक और रणनीतिक अपील की है। परमहंस आचार्य ने मांग उठाई है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ को राम मंदिर ट्रस्ट का ‘आजीवन सर्वोच्च सदस्य’ नियुक्त किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर की गरिमा और सुरक्षा को अक्षुण्ण रखने के लिए ट्रस्टी नियुक्तियों में शत-प्रतिशत पारदर्शिता बरतने का भी आग्रह किया है।

सनातन की आस्था का केंद्र है ट्रस्ट, नियुक्ति प्रक्रिया में न हो कोई विवाद

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र की जानकारी साझा करते हुए जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केवल एक प्रशासनिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह देश और दुनिया के कोने-कोने में रहने वाले करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की अटूट आस्था और विश्वास का मुख्य केंद्र है। ऐसे में ट्रस्ट के भीतर होने वाली किसी भी नई नियुक्ति या फेरबदल से पहले सभी धार्मिक और व्यावहारिक पहलुओं पर बहुत ही गंभीरता से विचार किया जाना बेहद जरूरी है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नई नियुक्तियों की प्रक्रिया इतनी पारदर्शी और त्रुटिहीन होनी चाहिए कि भविष्य में राम मंदिर के नाम पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक विवाद उत्पन्न न हो और न ही मंदिर की दिव्य छवि को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचे। संतों और अनुभवी चेहरों की वकालत करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत, चंपत राय, अयोध्या के प्रख्यात संत देवेंद्र प्रसादाचार्य और वैदेही वल्लभ शरण जैसे सनातन धर्म के संरक्षकों को ट्रस्ट में उचित और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।

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इंडिया गठबंधन पर साधा निशाना, बोले— ‘ट्रस्ट को प्रभावित करने की हो रही राजनीतिक साजिश’

अपने पत्र में परमहंस आचार्य ने देश के राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए विपक्षी गठबंधन (इंडिया ब्लॉक) पर एक बड़ा और गंभीर आरोप मढ़ा है। उन्होंने आशंका जताते हुए दावा किया कि कुछ विरोधी राजनीतिक ताकतें और दल परोक्ष रूप से राम मंदिर ट्रस्ट के फैसलों को प्रभावित करने और अपने समर्थकों या चहेतों को चोर दरवाजे से ट्रस्ट में शामिल कराने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि अतीत में भी कई ऐसी सुनियोजित घटनाएं और बयानबाजी देखने को मिली हैं, जिनके जरिए राम मंदिर आंदोलन और संपूर्ण सनातन परंपरा की वैश्विक छवि को धूमिल करने की कोशिशें की गई थीं।

इसी संभावित खतरे और राजनीतिक घुसपैठ को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे तौर पर अनुरोध किया है कि ट्रस्ट की सदस्यता का गौरव केवल और केवल उन्हीं व्यक्तियों को दिया जाए जो पूरी तरह से योग्य, निष्कलंक, विश्वसनीय और सनातन धर्म के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित व धर्मपरायण हों।

“राम मंदिर केवल अयोध्या या भारत की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, यह पूरी दुनिया के सनातन समाज के स्वाभिमान का प्रतीक है। इसलिए इसकी गरिमा, मर्यादा और आध्यात्मिक पवित्रता को हर हाल में सुरक्षित रखना हम सभी का परम कर्तव्य है। यदि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस ट्रस्ट में ‘आजीवन सर्वोच्च सदस्य’ के रूप में स्थान दिया जाता है, तो इससे न केवल मंदिर के आंतरिक प्रबंधन को प्रशासनिक मजबूती मिलेगी, बल्कि संपूर्ण परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी अभेद्य बनी रहेगी।”

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