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‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद वायुसेना का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन, जोधपुर में गरजेंगे दुनिया के घातक फाइटर जेट

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना वर्ष 2026 में अपने सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय वायु सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2.0’ की मेजबानी करने जा रही है। राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर आयोजित होने वाला यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है, जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दुनिया के कई मित्र देशों ने भारतीय वायुसेना के साथ संयुक्त अभ्यास में गहरी रुचि दिखाई है। इस अभ्यास में कई देशों के आधुनिक लड़ाकू विमान एक साथ युद्धाभ्यास करेंगे और सामरिक समन्वय, हवाई युद्ध कौशल तथा आधुनिक सैन्य तकनीकों का प्रदर्शन करेंगे।

भारतीय वायुसेना के लिए आने वाले दो महीने बेहद व्यस्त रहने वाले हैं। इस दौरान वह ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और जापान के साथ अलग-अलग संयुक्त अभ्यासों में हिस्सा लेने के बाद जोधपुर में सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय अभ्यास का आयोजन करेगी।

ऑस्ट्रेलिया में ‘पिच ब्लैक’ से शुरुआत

भारतीय वायुसेना के चार राफेल लड़ाकू विमान, दो सी-17 ग्लोबमास्टर परिवहन विमान और 100 से अधिक वायुसेना कर्मी इस समय ऑस्ट्रेलिया में आयोजित बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास ‘पिच ब्लैक’ में भाग ले रहे हैं। यह अभ्यास 20 जुलाई से शुरू होकर 7 अगस्त तक चलेगा, जिसमें 19 देशों की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही हैं।

इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच सामरिक समन्वय बढ़ाना, आधुनिक युद्ध तकनीकों का आदान-प्रदान करना और संयुक्त अभियानों की क्षमता को मजबूत करना है।

मलेशिया के साथ होगा ‘उदारा शक्ति’ अभ्यास

ऑस्ट्रेलिया में अभ्यास समाप्त होने के बाद भारतीय वायुसेना का दल अगस्त के पहले सप्ताह में रॉयल मलेशियन एयर फोर्स के साथ संयुक्त अभ्यास ‘उदारा शक्ति’ में हिस्सा लेगा।

करीब एक सप्ताह तक चलने वाले इस अभ्यास में भारतीय राफेल और मलेशिया के सुखोई लड़ाकू विमान संयुक्त उड़ान भरेंगे। दोनों देशों की वायुसेनाएं अपने ऑपरेशनल अनुभव साझा करेंगी और आधुनिक हवाई युद्ध की रणनीतियों पर अभ्यास करेंगी।

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जापान के साथ ‘वीर गार्जियन’ का दूसरा संस्करण

भारतीय वायुसेना और जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के बीच संयुक्त अभ्यास ‘वीर गार्जियन’ का आयोजन 12 से 23 सितंबर तक राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर किया जाएगा।

इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमान और जापान के एफ-2 फाइटर जेट भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच इस अभ्यास का पहला संस्करण वर्ष 2023 में जापान के हयाकुरी एयरबेस पर आयोजित किया गया था।

भारत और जापान ने इस संयुक्त अभ्यास की शुरुआत का निर्णय वर्ष 2022 में टोक्यो में आयोजित ‘टू प्लस टू’ संवाद के दौरान लिया था।

26 सितंबर से शुरू होगा ‘तरंग शक्ति 2026’

‘वीर गार्जियन’ के समापन के तुरंत बाद 26 सितंबर से राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर ‘तरंग शक्ति 2026’ की शुरुआत होगी। यह लगभग दो सप्ताह तक चलने वाला भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास होगा।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार भारत ने कई मित्र देशों को इस अभ्यास में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। अब तक आधा दर्जन से अधिक देशों ने अपने लड़ाकू विमानों के साथ शामिल होने की सहमति दे दी है, जबकि कई अन्य देश पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में भाग लेंगे।

पाकिस्तान सीमा के निकट आयोजित होने वाला यह अभ्यास सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2024 में हुई थी ‘तरंग शक्ति’ की शुरुआत

भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2024 में पहली बार ‘तरंग शक्ति’ अभ्यास का आयोजन किया था। इसका पहला चरण तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस और दूसरा चरण राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर आयोजित किया गया था।

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सुलूर चरण में फ्रांस के राफेल, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन के यूरोफाइटर टाइफून लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया था। वहीं भारतीय वायुसेना ने राफेल, सुखोई, मिराज-2000, जैगुआर, तेजस, मिग-29 और प्रचंड जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म की क्षमता का प्रदर्शन किया था।

दुनिया के आधुनिक लड़ाकू विमानों ने दिखाई थी ताकत

जोधपुर में आयोजित दूसरे चरण में ऑस्ट्रेलिया का ईए-18जी ग्रोलर, ग्रीस और संयुक्त अरब अमीरात के एफ-16 तथा अमेरिका के ए-10 और एफ-16 लड़ाकू विमान शामिल हुए थे।

इसके अलावा एयर-टू-एयर रीफ्यूलर, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AEW&C) और विशेष अभियान विमानों ने भी अभ्यास में भाग लिया था। विशेष रूप से अमेरिका के ए-10 और ऑस्ट्रेलिया के ईए-18जी ग्रोलर विमान आकर्षण का केंद्र रहे थे।

तेजस ने भी बढ़ाया था भारत का गौरव

‘तरंग शक्ति 2024’ की एक ऐतिहासिक उपलब्धि यह रही कि पहली बार भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना—तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों ने एक साथ स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी। उस समय वायुसेना के उप प्रमुख रहे और वर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने इस विशेष फॉर्मेशन का नेतृत्व किया था।

इसके अलावा फ्रांस और जर्मनी के वायुसेना प्रमुखों ने भी तेजस में उड़ान भरकर भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता की सराहना की थी, जबकि स्पेन के वायुसेना प्रमुख ने एसयू-30 एमकेआई में उड़ान भरकर अभ्यास में हिस्सा लिया था।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बढ़ा भारत की वायु शक्ति पर भरोसा

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारतीय वायुसेना की सटीक हमले करने की क्षमता, आधुनिक तकनीक और पेशेवर दक्षता ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। यही वजह है कि कई मित्र देश भारतीय वायुसेना के साथ संयुक्त अभ्यास कर उसके अनुभवों और रणनीतियों को समझने में रुचि दिखा रहे हैं।

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ऐसे में ‘तरंग शक्ति 2026’ केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वायु शक्ति, वैश्विक रक्षा सहयोग और रणनीतिक नेतृत्व का भी महत्वपूर्ण प्रदर्शन माना जा रहा है।

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