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पुरकाजी खादर में जलभराव से हाहाकार, 3 महीने से स्कूल बेहाल: नाव के सहारे चल रही जिंदगी, पहाड़ों की बारिश के बाद कई गांवों में करीब 2 किमी रास्ते पानी में डूबे

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मुज़फ़्फ़रनगर। पुरकाजी के खादर क्षेत्र में पहाड़ों पर हुई बारिश के बाद जलभराव ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजकल्लापुर, रामनगर और पंचाली समेत कई गांवों में करीब दो किलोमीटर तक रास्ते पानी में डूबे हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को रोजमर्रा के काम के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। लंबे समय से पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।

जलभराव का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे मीडिया से बातचीत करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि स्कूलों के आसपास पानी और कीचड़ जमा होने से करीब तीन महीने से पढ़ाई प्रभावित है। स्कूलों में पहुंचना मुश्किल होने के कारण बच्चों की शिक्षा पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से बनी इस स्थिति का स्थायी समाधान नहीं होने से बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है।

इधर, खेतों में पानी भरने से किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। खादर क्षेत्र के कई खेत पूरी तरह जलमग्न हैं। धान समेत कई फसलें लंबे समय तक पानी में डूबी रहने से खराब हो गई हैं। किसानों का कहना है कि महीनों से खेतों में पानी भरा होने के कारण उनकी मेहनत और लागत दोनों बर्बाद हो गई हैं।

फसल नुकसान से परेशान किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि खराब हुई फसलों का सर्वे कराकर किसानों को ₹15 हजार प्रति बीघा तक मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें हुए आर्थिक नुकसान की कुछ भरपाई हो सके।

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ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव की समस्या नई नहीं है। कई गांवों को जोड़ने वाले छोटे पुल के निर्माण की मांग भी लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से आवागमन की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है और बारिश के दौरान गांवों के बीच संपर्क बेहतर हो सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से तत्काल जलभराव की समस्या दूर करने, प्रभावित रास्तों और गांवों के आवागमन की व्यवस्था सुधारने तथा लंबे समय से चली आ रही पुल निर्माण की मांग पूरी करने की अपील की है। साथ ही किसानों की बर्बाद फसलों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

फिलहाल खादर क्षेत्र में पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जिंदगी, बच्चों की पढ़ाई और खेती—तीनों से जुड़ी मुश्किलें बनी हुई हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के साथ फसल नुकसान की भरपाई के लिए भी प्रभावी कदम उठाएगा।

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