मुज़फ़्फ़रनगर। शहर की नुमाइश कैंप कॉलोनी में गुरुवार अपराह्न करीब 4 बजे अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर पालिका की टीम की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। चार महीने पहले शिकायत, उसके बाद जांच और नगर मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद पुलिस फोर्स के साथ टीम मौके पर पहुंची। गली संकरी होने के कारण बुलडोजर नहीं पहुंचा तो हथौड़े से कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन सिर्फ छत के ऊपर बनी एक दीवार तोड़कर टीम वापस लौट गई और सड़क पर मौजूद कथित पक्का अतिक्रमण जस का तस छोड़ दिया गया।

मामला नुमाइश कैंप कॉलोनी निवासी प्रमोद कुमार की करीब चार महीने पुरानी शिकायत से जुड़ा है। प्रमोद कुमार ने DM को ज्ञापन देकर आरोप लगाया था कि एसडीएम सदर के रसोइया चंदन सिंह ने बंद गली के रास्ते पर मंदिर की आड़ में पक्का निर्माण कर अतिक्रमण कर लिया है। शिकायत के बाद DM उमेश मिश्रा ने नगर मजिस्ट्रेट को मामले की जांच के निर्देश दिए थे।

नगर मजिस्ट्रेट ने जांच के बाद नगर पालिका को अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए। इसके बाद गुरुवार को नगर पालिका की टीम पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंची। संकरी गली होने के कारण बुलडोजर मौके तक नहीं ले जाया जा सका। टीम ने हथौड़े से निर्माण तोड़ने की कार्रवाई शुरू की और छत के ऊपर बनी एक दीवार को तोड़ा।
यहीं से कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए। शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार का कहना है कि जिस कथित पक्के अतिक्रमण को लेकर शिकायत की गई थी, उसका नीचे सड़क पर मौजूद हिस्सा नहीं हटाया गया। उनका आरोप है कि ऊपर की एक दीवार तोड़ने के बाद टीम वापस लौट गई।
मामले में शिकायतकर्ता ने कार्रवाई के दौरान फोन कॉल को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि चंदन सिंह लगातार अधिकारियों से फोन पर बातचीत करते रहे। शिकायतकर्ता का दावा है कि टीम के पास एक फोन आने के बाद कार्रवाई रोक दी गई और अधिकारी मौके से वापस लौट गए। हालांकि, फोन किसका था और कार्रवाई रोकने में उसकी कोई भूमिका थी या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी पवन कुमार से जब कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया तो उनका कहना था कि मंदिर की वजह से अतिक्रमण नहीं तोड़ा गया। वहीं शिकायतकर्ता का कहना है कि मंदिर और जिस कथित अवैध निर्माण की शिकायत की गई है, वे अलग-अलग हैं और दोनों के बीच बाकायदा एक दीवार मौजूद है।

