लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानों के तीखे तीर चलने शुरू हो गए हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया कार्रवाई और अयोध्या के राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर बेहद करारा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक लगातार कई पोस्ट करते हुए सपा प्रमुख ने न सिर्फ ईडी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी दावा किया कि अयोध्या के प्रकरण से दुनिया भर में भारत की आर्थिक और धार्मिक साख को गहरा धक्का लगा है, जिससे विदेशी निवेशक भी अब देश से अपने हाथ पीछे खींच रहे हैं।
छापा मारना चाहिए कर्नाटक-महाराष्ट्र में, यूपी में दिखावा कर रही सरकार: सपा प्रमुख
दरअसल, बुधवार को ईडी की टीमों ने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव व उनके करीबियों के लखनऊ और झांसी स्थित तमाम ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इसी कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की मंशा पर तंज कसा। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि जांच एजेंसियों को असल में छापा तो कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मारना चाहिए, जहां की हकीकत सबको पता है, लेकिन वे जानबूझकर उत्तर प्रदेश में विपक्ष को परेशान करने के लिए आ धमकते हैं। सपा प्रमुख ने तल्ख लहजे में कहा कि जहां वास्तव में ‘सीसी’ का बड़ा माल छिपा है, वहां केंद्रीय एजेंसियां जाने की जहमत नहीं उठातीं, बल्कि विपक्ष के खिलाफ सिर्फ एक दिखावटी औपचारिकता निभाने का काम किया जा रहा है।
‘भगवान का दानपात्र नहीं छोड़ा, हमारा निवेश क्या छोड़ेंगे’– वैश्विक निवेशकों के पीछे हटने का दावा
सपा अध्यक्ष ने अपने हमले को और धार देते हुए अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और चंदा चोरी मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान से आई इस नकारात्मक खबर ने पूरी दुनिया में फैले सनातन समाज को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है और वे आज खुद को बेहद शर्मसार व आक्रोशित महसूस कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि विश्व के कोने-कोने में रहने वाले सनातनी इस बात से बेहद आहत हैं कि जो चंदा या चढ़ावा उन्होंने अपनी अटूट आस्था के साथ खुद आकर या विदेशों से भेजा था, उसमें इस तरह की कथित हेराफेरी सामने आई है। उन्होंने आगे आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि इस घटना से देश की कूटनीतिक और आर्थिक साख गिरी है। अब विदेशी निवेशक भी उत्तर प्रदेश और भारत में निवेश करने से कतरा रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि जो सरकार अपने भगवान के दानपात्र की सुरक्षा नहीं कर सकी, वह उनके व्यापारिक निवेश को भला कैसे सुरक्षित रखेगी।
चौतरफा दबाव के बीच राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक, चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर
इस पूरे सियासी घमासान के बीच अयोध्या के राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर अंदरूनी हलचल भी काफी तेज हो गई है। चौतरफा दबाव और विपक्ष के हमलों के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए ट्रस्ट के कद्दावर महामंत्री चंपत राय और अहम सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया। इस बड़े फैसले के बाद अयोध्या की धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े लोगों के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कृष्ण मोहन बने अंतरिम महामंत्री, बाईस जुलाई को होने वाली अगली बैठक पर टिकीं निगाहें
ट्रस्ट की इस बैठक के बाद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने मीडिया को आधिकारिक रूप से फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संगठन के सुचारू संचालन और नए नियमित महामंत्री की स्थायी नियुक्ति होने तक कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री के रूप में संगठन की पूरी कमान सौंप दी गई है। इसके साथ ही मंदिर प्रबंधन के प्रमुख और संवेदनशील पदों पर योग्य अधिकारियों की पारदर्शी नियुक्ति के लिए एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन भी कर दिया गया है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं और आगामी प्रशासनिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए ट्रस्ट की अगली महत्वपूर्ण बैठक आगामी बाईस जुलाई को बुलाई गई है, जिस पर अब देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।



