मुज़फ्फ़रनगर पुलिस की जांच पर उठाए सवाल, नार्को टेस्ट से लेकर केंद्रीय एजेंसी की जांच तक की मांग; कार्रवाई न होने पर मदरसे के ऐतिहासिक घेराव की चेतावनी
मुजफ्फरनगर। फुलत स्थित दारुल उलूम रहीमिया मदरसे को लेकर शुरू हुआ कथित धर्मांतरण विवाद अब और अधिक गर्मा गया है। मामले में पहले गंभीर आरोप लगाने वाले योग साधना आश्रम (बघरा) के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज ने शनिवार शाम नया बयान जारी कर कई सनसनीखेज दावे किए। उन्होंने कहा कि मुज़फ्फ़रनगर पुलिस द्वारा गठित जांच टीम इस पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं कर सकती और इसकी जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए।

स्वामी यशवीर महाराज ने दावा किया कि मदरसे के संचालक मौलाना हिफजुर्रहमान अंसारी और उनके पुत्र मौलाना जुबेर अंसारी का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है। उनका आरोप है कि पिछले करीब 20 वर्षों से बड़े स्तर पर धर्मांतरण का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है और इसमें हजारों हिंदुओं का धर्मांतरण कराया गया है।
उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की। उनका कहना है कि यह मामला इतना बड़ा है कि इसकी निष्पक्ष जांच जिला स्तर की टीम के बस की बात नहीं है।

‘500 से 600 करोड़ की संपत्ति की हो जांच’
स्वामी यशवीर महाराज ने दावा किया कि आरोपितों के पास 500 से 600 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि दोनों आरोपितों का नार्को टेस्ट कराया जाए ताकि कथित धर्मांतरण नेटवर्क और फंडिंग के स्रोतों का खुलासा हो सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह भी जांच का विषय है कि इतनी बड़ी संपत्ति और कथित फंडिंग आखिर किन स्रोतों से प्राप्त हुई।
पुराने मामलों का भी किया जिक्र
अपने बयान में स्वामी यशवीर महाराज ने दावा किया कि जिन लोगों के धर्मांतरण को पुराना बताया जा रहा है, वह तथ्य सही नहीं हैं। उन्होंने जुगनू शर्मा नामक व्यक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि उसका धर्मांतरण 32 वर्ष पहले नहीं बल्कि करीब 15 से 20 वर्ष पहले हुआ था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मदरसे से जुड़े एक ड्राइवर का भी धर्मांतरण कराया गया था और उसके परिवार के लोग आज भी मदरसे के आसपास रह रहे हैं।

‘गिरफ्तारी नहीं हुई तो होगा ऐतिहासिक घेराव’
स्वामी यशवीर महाराज ने चेतावनी दी कि यदि आरोपितों की गिरफ्तारी, संपत्तियों की जांच और कथित धर्मांतरण नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो हिंदू समाज के साथ मिलकर मदरसे का ऐतिहासिक घेराव किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। साथ ही उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कथित धर्मांतरण नेटवर्क को किसी भी कीमत पर नहीं चलने दिया जाएगा।
आपको बता दें कि स्वामी यशवीर महाराज के आरोपों के बाद मुज़फ्फ़रनगर पुलिस पहले ही मदरसे में प्रारंभिक जांच कर चुकी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसपी देहात के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामले के सभी आरोपों की जांच की जा रही है और उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



