Home » विविध इंडिया » अमित शाह ने किया ‘जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी’ का उद्घाटन,बोले- “देश की प्रगति फैक्ट्रियों से नहीं, लाइब्रेरी में बैठे युवाओं से तय होती है”

अमित शाह ने किया ‘जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी’ का उद्घाटन,बोले- “देश की प्रगति फैक्ट्रियों से नहीं, लाइब्रेरी में बैठे युवाओं से तय होती है”

Facebook
Twitter
WhatsApp

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तकालयों को भारत की संस्कृति, ज्ञान और आधुनिक शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताते हुए युवाओं से अधिक से अधिक अध्ययन करने का आह्वान किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को पढ़े बिना भारत की आत्मा, संस्कृति और संघर्ष को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता।

उद्घाटन समारोह के बाद अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा कि पुस्तकालय आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारत की संस्कृति और ज्ञान को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं।

समारोह को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है क्योंकि महान स्वतंत्रता सेनानी, चिंतक और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर सार्वजनिक पुस्तकालय की शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण का आधार ज्ञान और विवेक है तथा पुस्तकालय इस ज्ञान को समाज तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

अमित शाह ने कहा कि किसी देश की प्रगति का आकलन केवल उसकी आर्थिक स्थिति, उद्योगों या बाजारों की भीड़ से नहीं, बल्कि इस बात से भी किया जाना चाहिए कि उसके पुस्तकालयों में कितने युवा अध्ययन करने आते हैं। उन्होंने युवाओं से पुस्तकों को अपना सबसे अच्छा मित्र बनाने की अपील की।

अपने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर का उदाहरण देते हुए गृह मंत्री ने बताया कि वहां प्रत्येक गांव में पुस्तकालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें हजारों पुस्तकें उपलब्ध हैं। इन पुस्तकालयों को एक बड़े केंद्रीय पुस्तकालय से जोड़ा गया है और मोबाइल लाइब्रेरी वैन के माध्यम से गांवों तक मांग के अनुसार पुस्तकें पहुंचाई जाती हैं। साथ ही प्रत्येक पुस्तकालय को स्थानीय स्कूलों से भी जोड़ा गया है ताकि बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित हो सके।

ALSO READ THIS :  दिल्ली में पत्नी की कैंची से गोदकर हत्या, 48 घंटे में मुरादाबाद से गिरफ्तार हुआ आरोपी पति

उन्होंने कहा कि महान व्यक्तित्वों और विद्वानों ने अपने जीवन के अनुभव और विचार पुस्तकों में सुरक्षित रखे हैं। यदि युवा इन पुस्तकों का अध्ययन कर अपने जीवन में उतारें तो उनके व्यक्तित्व, सोच और जीवन की दिशा में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

अमित शाह ने बताया कि जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय में अत्याधुनिक ई-लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जहां एक करोड़ से अधिक डिजिटल पुस्तकों तक ऑनलाइन पहुंच संभव होगी। पूरे परिसर में निशुल्क वाई-फाई, आधुनिक मॉनिटर और डिजिटल अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे विद्यार्थी अपने नोट्स तैयार करने और अध्ययन सामग्री डाउनलोड करने में सक्षम होंगे।

उन्होंने बताया कि पुस्तकालय की दो मंजिलों में 32 हजार से अधिक पुस्तकों का संग्रह है। शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए विशेष अध्ययन कक्ष तथा आधुनिक रीडिंग एरिया भी विकसित किया गया है, ताकि शांत वातावरण में अध्ययन और शोध कार्य किया जा सके।

अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को भारत की संस्कृति, स्वाभिमान, संघर्ष और राष्ट्रीय चेतना को समझना है तो उसे दिनकर के साहित्य का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे महान साहित्यकारों तक पहुंच का सबसे प्रभावी माध्यम पुस्तकालय ही हैं।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौर में जब लोकतांत्रिक संस्थाएं संकट में थीं, तब जयप्रकाश नारायण ने देश को नई दिशा दी। उन्होंने इंदिरा गांधी सरकार के आपातकाल का विरोध किया, बिहार और गुजरात के छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया तथा ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान कर लोकतंत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ALSO READ THIS :  चेन्नई में समुद्री तेल रिसाव से निपटने के लिए वैश्विक विशेषज्ञों का जमावड़ा

उन्होंने यह भी कहा कि जयप्रकाश नारायण ने सर्वोदय की विचारधारा को गांव-गांव तक पहुंचाया और चंबल क्षेत्र में 250 से अधिक बागियों का आत्मसमर्पण कराकर कई जिलों को डकैती की समस्या से मुक्त कराने में अहम योगदान दिया। उनके जीवन और विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

[wonderplugin_slider id=1]

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें