लखनऊ। समान काम के लिए समान वेतन और स्थायी नौकरी की मांग को लेकर एएनएम महिला कर्मचारियों ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें महज 10 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। अपनी मांगों पर सुनवाई नहीं होने से नाराज कर्मचारियों ने मंत्री के आवास का घेराव कर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की।
एएनएम कर्मचारियों के मुताबिक, वे पिछले 22 दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमित कर्मचारियों की तरह ही काम करती हैं, इसलिए उन्हें भी समान वेतन और स्थायी नियुक्ति का लाभ मिलना चाहिए।
इको गार्डन में सुनवाई नहीं होने पर मंत्री के आवास पहुंचीं कर्मचारी
प्रदर्शनकारी एएनएम कर्मचारी आरती वर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इको गार्डन में लगातार प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद उन्हें मजबूर होकर उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर पहुंचना पड़ा।
आरती वर्मा ने कहा कि उनकी मुख्य मांगें समान काम के लिए समान वेतन और स्थायी नौकरी हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन करते हुए 22 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्याओं को सुनने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई है। इसी कारण कर्मचारियों को घेराव का रास्ता अपनाना पड़ा।
10 हजार रुपये मासिक वेतन पर परिवार चलाना मुश्किल
आरती वर्मा ने कहा कि एएनएम कर्मचारियों को हर महीने केवल 10 हजार रुपये वेतन मिलता है। बढ़ती महंगाई के बीच इतनी कम राशि में घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने मांग की कि संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को भी नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन दिया जाए।
उनका कहना है कि काम की जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद वेतन में अंतर उचित नहीं है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर विचार कर वेतन संबंधी समस्या का समाधान करेगी और उन्हें स्थायी नौकरी का अवसर मिलेगा।
आरती वर्मा ने यह भी बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों से एएनएम कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल होने पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि कई महिला कर्मचारी 15 से 20 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रही हैं, लेकिन इतने लंबे समय बाद भी वे संविदा पर ही काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद कर्मचारियों को स्थायी क्यों नहीं किया गया।
‘स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं एएनएम, फिर भी नहीं हो रही सुनवाई’
प्रदर्शन में शामिल एएनएम कर्मचारी मंजिला गौतम ने कहा कि कर्मचारियों को अपनी मांगों के लिए लगातार आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री तक उनकी समस्याएं नहीं पहुंच पा रही हैं और पिछले 22 दिनों से चल रहे प्रदर्शन के दौरान कोई मंत्री उनसे मिलने नहीं पहुंचा।
मंजिला गौतम ने कहा कि एएनएम कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ माना जाता है, लेकिन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य विभाग के मंत्री ही कर्मचारियों की बात नहीं सुन रहे हैं, तो उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद किससे करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की मांग समान काम के लिए समान वेतन और नियमितीकरण की है। उनका कहना है कि मंत्री के आवास का घेराव इसलिए किया गया, ताकि उनकी आवाज जिम्मेदार लोगों तक पहुंचे और लंबे समय से लंबित मांगों पर सुनवाई हो सके।
स्थायी नियुक्ति की मांग पर अड़ीं कर्मचारी
एएनएम कर्मचारी रंजना राय ने भी समान काम के लिए समान वेतन और स्थायी नियुक्ति की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवाएं दे रही हैं, लेकिन कम वेतन और संविदा व्यवस्था के कारण उन्हें आर्थिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और नियमितीकरण की प्रक्रिया को लेकर ठोस कदम उठाने की अपील की। फिलहाल, प्रदर्शनकारी एएनएम कर्मचारियों की प्रमुख मांगें समान वेतन, स्थायी नौकरी और 22 दिनों से जारी आंदोलन पर सुनवाई हैं।

