अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को होने वाली अहम बैठक को लेकर अयोध्या में चर्चाएं तेज हैं। मणिराम दास छावनी में दोपहर दो बजे ट्रस्ट की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। इसके साथ ही ट्रस्टी स्तर के अन्य पदों और मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हो सकती है।
बैठक को लेकर अयोध्या के संत समाज में भी उत्सुकता दिखाई दे रही है। महंत सीताराम दास, संत अनिरुद्ध दास, देवेशाचार्य, जगतगुरु परमहंस आचार्य समेत कई संतों ने बैठक और संभावित CEO की नियुक्ति को लेकर अपनी राय रखी है। वहीं पूर्व बाबरी मस्जिद पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी मंदिर और अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
दोपहर दो बजे शुरू होगी बैठक, सभी ट्रस्टी रहेंगे मौजूद
ट्रस्ट के सदस्य दिनेश दास ने बताया कि बुधवार दोपहर दो बजे छोटी छावनी में महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में बैठक होगी। उन्होंने कहा कि सभी ट्रस्टी बैठक में शामिल होंगे और ट्रस्ट की ओर से जो भी फैसला लिया जाएगा, उसे सभी स्वीकार करेंगे।
उन्होंने बताया कि बैठक कई चरणों में चल सकती है और सभी सदस्यों की मौजूदगी रहेगी। दिनेश दास ने कहा कि भगवान राम के आशीर्वाद से जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।
CEO की नियुक्ति को लेकर अयोध्या में बढ़ी उत्सुकता
बैठक का सबसे अहम मुद्दा ट्रस्ट के पहले CEO की नियुक्ति माना जा रहा है। CEO के जरिए मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक और प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि अयोध्या में मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बैठक में CEO के नाम की घोषणा हो सकती है। उन्होंने कहा कि संत समाज और अयोध्यावासी इस फैसले को लेकर उत्साहित हैं।
संत बोले, योग्य और धर्मग्रंथों का जानकार होना चाहिए CEO
साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने कहा कि ट्रस्ट की बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैठक में लिया गया उचित फैसला संत समाज स्वीकार करेगा, लेकिन यदि कोई प्रतिकूल निर्णय होता है तो संत समाज उसे स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने CEO के पद पर योग्य व्यक्ति की नियुक्ति की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रधान सेवक के रूप में ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, जिसने धर्मग्रंथों का गहन अध्ययन किया हो और उनमें विशेषज्ञता रखता हो।
अनिरुद्ध दास ने उठाए ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था पर सवाल
संत अनिरुद्ध दास ने कहा कि CEO की नियुक्ति को लेकर अक्सर बैठक की बातें सामने आती रहती हैं। उन्होंने इसे ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था बताते हुए कहा कि ट्रस्ट ने किस तरह की प्रशासनिक संरचना तैयार की है और धार्मिक परिषद का गठन किस प्रकार किया गया है, यह उसका अपना सिस्टम है।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट बिना किसी की सलाह लिए अपनी व्यवस्था के अनुसार काम करता है और अब CEO का पद किस प्रकार बनाया जाएगा, यह भी ट्रस्ट के स्तर पर तय किया जाएगा।
देवेश आचार्य बोले, हर महीने होती है समीक्षा बैठक
हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य ने बैठक को नियमित समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की समीक्षा बैठक हर महीने होती है और ऐसी बैठकें होनी भी चाहिए।
उनके मुताबिक, समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर में किसी तरह की असुविधा न हो, दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े और अयोध्या के नागरिकों के लिए भी व्यवस्थाएं सुचारू बनी रहें।
देवेश आचार्य ने कहा कि बैठक को लेकर जिस तरह बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है, वह अनावश्यक है। उनके अनुसार यह एक नियमित समीक्षा बैठक के तौर पर देखी जानी चाहिए।
महंत कमल नयन दास बोले, बैठक के बाद सामने आएगा नतीजा
मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने कहा कि बैठक सम्मानित अध्यक्ष की अध्यक्षता में मणिराम दास छावनी में होगी। उन्होंने कहा कि उन्हें बैठक में होने वाली चर्चाओं के बारे में विशेष जानकारी नहीं है और बैठक के बाद ही इसके नतीजे सामने आएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल मंदिर से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल रही हैं।
इकबाल अंसारी ने श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर दिया जोर
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या एक पवित्र धार्मिक शहर है और यहां भगवान राम का मंदिर होने के कारण देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में उचित इंतजाम और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि नए CEO की नियुक्ति के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में और सुधार होगा तथा अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
ट्रस्ट के फैसले पर टिकी सभी की निगाहें
बुधवार की बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं। CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्टी स्तर के अन्य पदों और व्यवस्थाओं पर चर्चा होने की संभावना है।
फिलहाल अयोध्या के संत समाज से लेकर स्थानीय लोगों तक सभी की निगाहें बैठक के नतीजे पर टिकी हैं। ट्रस्ट की ओर से अंतिम निर्णय सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि CEO के पद पर किसे जिम्मेदारी दी जाती है और मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में आगे क्या बदलाव किए जाते हैं।



