जौनपुर। आजाद समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस बार उत्तर प्रदेश में मजबूती के साथ अकेले चुनाव लड़ेगी। संगठन को चुनावी स्तर पर सक्रिय करने के लिए पार्टी ने 45 प्रभारियों की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में सैकड़ों नए प्रभारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने इंडिया गठबंधन और विपक्षी दलों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को भारतीय जनता पार्टी से उतना डर नहीं है, जितना दलित और पिछड़े वर्ग से निकलने वाली नई और मजबूत राजनीतिक नेतृत्व से है। उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा को हराने की बात करते हैं, उनकी मंशा पर भी सवाल खड़े होते हैं।
2022 के बाद अब पूरे प्रदेश में संगठन को मजबूत करने की तैयारी
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी पूरे उत्तर प्रदेश में उस मजबूती के साथ चुनाव नहीं लड़ पाई थी, जिस तरह लड़ना चाहती थी। इस बार पार्टी और प्रदेश नेतृत्व ने चुनाव की तैयारियों को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने कहा कि पार्टी को आगे बढ़ाने और संविधान विरोधी ताकतों से मुकाबला करने के लिए संगठन को मजबूत किया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत 45 प्रभारियों की घोषणा की गई है। इन प्रभारियों को संगठन विस्तार और अपनी राजनीतिक सक्रियता साबित करने से जुड़े काम दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से दिए गए कार्यों की रिपोर्ट 20 सितंबर तक जमा होगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे और जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी आने वाले समय में सैकड़ों नए प्रभारियों की घोषणा कर सकती है।
भाजपा को हराने के लिए बड़े गठबंधन की जरूरत, लेकिन विपक्ष की नीयत पर सवाल
आजाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा को चुनौती देने के लिए बड़े गठबंधन की जरूरत है। उन्होंने पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग चुनावों में गठबंधन बनने के बावजूद भाजपा को अपेक्षित तरीके से हराया नहीं जा सका।
उनका कहना था कि 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद उसके खिलाफ गठबंधन मैदान में उतरा, लेकिन भाजपा को सत्ता से बाहर नहीं किया जा सका। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भी विपक्ष को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन बना, लेकिन वह भाजपा को सत्ता से हटाने में सफल नहीं रहा।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि इन चुनावी नतीजों से स्पष्ट है कि भाजपा को हराने के लिए अब इससे बड़ा राजनीतिक गठबंधन जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि विपक्ष के सभी प्रमुख दलों को साथ लेकर एक व्यापक गठबंधन बने, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि ऐसी किसी पहल को लेकर गंभीर मंशा दिखाई दे रही है।
‘विपक्ष को भाजपा से नहीं, नई लीडरशिप से डर’
आजाद ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि कई नेताओं को भाजपा से ज्यादा डर इस बात का है कि दलित और पिछड़े वर्ग से कोई नई राजनीतिक ताकत उभरकर सामने न आ जाए।
उन्होंने कहा कि कमजोर और वंचित वर्गों से आने वाली मजबूत लीडरशिप अगर आगे बढ़ती है तो इससे कई स्थापित राजनीतिक दलों की राजनीति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने विपक्षी दलों की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा को हराने का दावा करने वाले दलों की गतिविधियों को देखकर उनकी वास्तविक प्राथमिकताओं पर संदेह पैदा होता है।
चंद्रशेखर आजाद ने नगीना लोकसभा क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा को हराने की बात करने वाले कुछ लोग उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों के बजाय नगीना में जाकर दो-दो बार बड़ी सभाएं करते रहे। उनके मुताबिक, इसी से उन्हें अंदाजा हो गया था कि विपक्ष की प्राथमिकता क्या है।
जंतर-मंतर आंदोलन का जिक्र कर विपक्ष को घेरा
चंद्रशेखर आजाद ने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब बच्चे सड़कों पर बैठे थे, तब वह लगातार बारिश के बीच कई रात उनके साथ बैठे रहे। उन्होंने विपक्षी नेताओं से सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी इसी तरह आंदोलनों के बीच मजबूती से खड़े होकर संघर्ष किया है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में प्रधानमंत्री आवास का घेराव जैसी स्थिति देखने को नहीं मिली। उनके मुताबिक, जब आंदोलन लगातार चल रहा था और कुछ लोग मजबूती से उसके साथ खड़े थे, तब परिस्थितियों ने सरकार और राजनीतिक दलों पर दबाव बढ़ाया।
2027 के लिए संगठन विस्तार पर रहेगा जोर
आजाद समाज पार्टी की ओर से 45 प्रभारियों की घोषणा को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पार्टी अब बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, नए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और प्रदेश में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
चंद्रशेखर आजाद के बयान से साफ है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। हालांकि चुनाव तक उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियां और गठबंधन की तस्वीर किस तरह बदलती है, यह आने वाला समय तय करेगा।



