बांदा में सिंचाई विभाग के जेई रामभवन और पत्नी दुर्गावती ने 3 से 18 साल के 33 नाबालिग बच्चों का क्रूर यौन शोषण किया, हर घटना का वीडियो बनाकर डार्क वेब पर विदेशी पोर्न साइट्स को बेच डाला। विशेष पोक्सो अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई और मौत आने तक फांसी पर लटकाए रखने का सनसनीखेज आदेश दिया। सीबीआई जांच में 2 लाख से ज्यादा वीडियो बरामद हुए थे।
- शहज़ाद अहमद, बांदा से ‘द एक्स इंडिया’ के लिए
बांदा। विशेष पोक्सो अदालत ने बच्चों के खिलाफ सबसे जघन्य अपराध में सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे ‘rarest of rare’ मामला करार देते हुए दोनों को जब तक मौत न हो जाए, तब तक फांसी पर लटकाए रखने का निर्देश दिया है।
इंटरपोल की चेतावनी से खुला पूरा काला खेल
अक्टूबर 2020 में इंटरपोल ने सीबीआई को अलर्ट किया कि इंटरनेट पर छोटे-छोटे बच्चों के पोर्न वीडियो तेजी से फैल रहे हैं। सूचना के साथ एक पेन ड्राइव भी सौंपी गई, जिसमें 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटो थे। इस सूचना ने दिल्ली में केस दर्ज कराया और जांच आगे बढ़ी।

सीबीआई जांच ने खोला भयावह सच
जांच में पता चला कि आरोपी रामभवन बांदा-चित्रकूट क्षेत्र में सिंचाई विभाग में तैनात था। सीबीआई ने दिल्ली में मुकदमा दर्ज किया। 31 अक्टूबर 2020 को केस शुरू हुआ। रामभवन को 18 नवंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया।
पत्नी दुर्गावती को गवाहों पर दबाव डालने के आरोप में बाद में पकड़ा गया। दोनों के लैपटॉप से 2 लाख से अधिक वीडियो और हजारों फोटो बरामद हुए।
33 मासूम बच्चों को बनाया शिकार
2010 से 2020 तक रामभवन और दुर्गावती ने 33 नाबालिग बच्चों (उम्र 3 से 18 साल) को लालच, बहला-फुसलाकर या पैसे के प्रलोभन में फंसाया। पत्नी दुर्गावती बच्चों के साथ संबंध बनाती थी, जबकि रामभवन अप्राकृतिक कृत्य करता था। हर घटना का वीडियो और फोटो बनाकर रखा गया।

विदेशी साइट्स को बेचा जाता था वीडियो-फोटो
बने अश्लील वीडियो और फोटो डार्क वेब के जरिए विदेशी पोर्नोग्राफी वेबसाइट्स को बेचे जाते थे। जांच में सामने आया कि यह सामग्री 47 देशों में पहुंच चुकी थी। पति-पत्नी ने इस क्रूर व्यापार से लाखों रुपये कमाए।
74 गवाहों के बयान, फांसी का फैसला
सीबीआई ने कोर्ट में 74 गवाह पेश किए। शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने मामले को मजबूती से पेश किया। 18 फरवरी को दोनों को दोषी ठहराया गया। 20 फरवरी को जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये मुआवजे का भी आदेश दिया।
फैसले के दौरान सीबीआई टीम मौजूद
फैसले के दिन सीबीआई की पूरी टीम कोर्ट में मौजूद रही। अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने इसे बच्चों के खिलाफ अपराधों पर कड़ी चेतावनी बताया। यह सजा समाज में बाल सुरक्षा को मजबूत करने वाली ऐतिहासिक मिसाल बनेगी।




