लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने राज्य के मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज और हरदोई समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में हुई हिंसक और तनावपूर्ण घटनाओं को लेकर विपक्षी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों पर बेहद तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को राजधानी लखनऊ से जारी एक विस्तृत बयान में बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन अपने तुच्छ चुनावी स्वार्थ के लिए पीड़ित एवं वंचित वर्गों के लोगों को भड़काकर सड़कों पर उतार रहे हैं। उन्होंने जनता को आगाह करते हुए कहा कि पहले जानबूझकर हिंसा, बवाल और चक्काजाम जैसी स्थितियां पैदा की जाती हैं और बाद में उन्हीं के नेता घटनास्थल पर पहुंचकर राजनीतिक रोटियां सेकने का खेल खेलते हैं।
कानून हाथ में लेने से नहीं, अदालतों के जरिए मिलेगा असली न्याय
मायावती ने हालिया आंदोलनों के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस प्रकार के उग्र प्रदर्शनों और टकराव के रास्तों से कभी भी वास्तविक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, बल्कि उनकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ जाती हैं। उन्होंने देश के संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के संदेशों का स्मरण कराते हुए कहा कि बाबा साहब ने दलितों, पिछड़ों और उपेक्षित समाज को हमेशा संवैधानिक दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए लड़ने की सीख दी थी। बाबा साहब का स्पष्ट मत था कि यदि समाज के किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय या अत्याचार होता है, तो उसके खिलाफ संघर्ष पूरी तरह कानूनी होना चाहिए। यदि निचली अदालत से राहत न मिले तो उच्च अदालतों का दरवाजा खटखटाया जाना चाहिए, न कि सड़कों पर उतरकर हिंसा, चक्काजाम और पुलिस-प्रशासन से टकराव का रास्ता अपनाकर माहौल खराब करना चाहिए।
पहले बिगाड़ते हैं माहौल, फिर घटनास्थल पर आकर बहाते हैं मगरमच्छ के आंसू
बसपा सुप्रीमो ने बिना किसी दल का नाम लिए विरोधियों की रणनीति पर प्रहार करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हुई घटनाओं के बाद जिस तरह से लोगों को उकसाकर हिंसक आंदोलन कराए जा रहे हैं, उससे पीड़ितों का केस कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि परेशान और असहाय लोगों को गुमराह करके सड़कों पर हिंसक प्रदर्शनों के लिए झोंक दिया जाता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होती है। जब माहौल पूरी तरह अशांत हो जाता है, तो इन दलों के बड़े नेता कैमरे के सामने ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहाने के लिए वहां पहुंच जाते हैं और उस मानवीय त्रासदी का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बहुजन समाज को ऐसे छद्म शुभचिंतकों और भड़काने वाले तत्वों की चालों को समय रहते समझना होगा और उनसे पूरी तरह सावधान रहना होगा।
सत्ता की ‘मास्टर की’ से ही संभव है बहुजन समाज की समस्याओं का स्थायी समाधान
मायावती ने अपने समाज के लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा कि इन सभी अनगिनत सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का एकमात्र और स्थायी समाधान बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर द्वारा दिखाए गए शांतिपूर्ण और कानूनी मार्ग पर चलने में ही निहित है। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज की एकजुटता और वोट की ताकत के माध्यम से लोकतांत्रिक तरीके से राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना ही सभी समस्याओं को हल करने की असली ‘मास्टर की’ यानी मुख्य चाबी है। बहुजन समाज पार्टी शुरू से ही इसी संवैधानिक मार्ग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रही है और बिना किसी भटकाव के इसी उद्देश्य को लेकर आगे भी निरंतर काम करती रहेगी।
आगामी विधानसभा, लोकसभा और विभिन्न स्थानीय निकाय चुनावों का स्पष्ट उल्लेख करते हुए बसपा प्रमुख ने समाज के शोषित और वंचित वर्गों से राजनीतिक रूप से अत्यंत सतर्क और जागरूक रहने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही तमाम तरह के संगठन और बरसाती दल सक्रिय हो जाते हैं और जनता को भावनात्मक रूप से भड़काने का काम करते हैं। ऐसे तत्वों के बहकावे में आने के बजाय जनता को भारतीय संविधान, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और अपनी वोट की ताकत पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने समाज के सभी वर्गों से तथागत भगवान बुद्ध और बाबा साहब आंबेडकर के शांति, सद्भाव और करुणा के विचारों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।



