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एफसीआरए संशोधन बिल पर संसद में घमासान: विपक्ष ने सरकार को घेरा, ‘राम मंदिर चढ़ावा किसने लूटा’ पोस्टर लेकर किया प्रदर्शन

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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को एफसीआरए यानी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम संशोधन बिल को लेकर विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में ‘राम मंदिर चढ़ावा किसने लूटा’ लिखा पोस्टर लेकर सरकार से जवाब मांगा। इस दौरान एफसीआरए संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के पास भेजने की मांग भी जोर पकड़ती दिखाई दी।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने एफसीआरए संशोधन बिल को जेपीसी में भेजे जाने की मांग का समर्थन किया। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव और अवधेश प्रसाद समेत विपक्ष के कई नेताओं ने बिल की मंशा और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

एफसीआरए बिल पर अखिलेश यादव ने सरकार से पूछा सवाल

सपा सांसद अखिलेश यादव ने एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर सरकार से सवाल किया कि आखिर वह यह बिल क्यों लाना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों को दबाने और राजनीतिक फायदे के लिए व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।

अखिलेश यादव ने कहा कि देश में लोकतंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए और आम लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बुनियादी ढांचे की स्थिति का भी मुद्दा उठाया।

एयरपोर्ट में पानी और एक्सप्रेसवे के गड्ढों पर तंज

अखिलेश यादव ने सरकार के विकास कार्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं, लेकिन बारिश होने पर उनमें पानी भर जाता है। उन्होंने एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि कई जगह सड़कों पर गड्ढे नजर आ रहे हैं।

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उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें हवाई जहाज उड़ाने वालों और राज्य चलाने वालों के बीच समानताएं नजर आ रही हैं। उनके बयान को सरकार की विकास परियोजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है।

खड़गे ने जेपीसी में भेजने की मांग का किया समर्थन

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जब एफसीआरए संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति में भेजे जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने विपक्ष की मांग का समर्थन किया।

खड़गे ने कहा कि विपक्ष अपनी रणनीति के तहत आगे भी अपने मुद्दे उठाता रहेगा। विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की राय जरूरी है।

अवधेश प्रसाद बोले—नीयत ठीक नहीं तो बिल का क्या मतलब

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत ठीक नहीं है तो ऐसे बिल को पारित करने का कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने कहा कि संसद में पहले भी कई कानून पारित किए गए हैं, लेकिन बाद में वे प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो सके या व्यवहारिक साबित नहीं हुए। इसलिए किसी भी नए कानून को लाने से पहले उसके उद्देश्य और प्रभाव पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

छात्रों पर कार्रवाई को लेकर भी विपक्ष ने घेरा

अवधेश प्रसाद ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस और गोलीबारी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार मांग करता रहा है कि गृह मंत्री सदन में आकर बताएं कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कौन जिम्मेदार था।

उन्होंने सवाल किया कि छात्रों पर गोली चलाने और अन्य कार्रवाई के आदेश किसने दिए। विपक्ष की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आकर इस मामले पर जवाब देने की मांग लगातार की जा रही है।

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राम मंदिर चढ़ावे को लेकर भी विपक्ष का प्रदर्शन

एफसीआरए संशोधन बिल के विरोध के साथ विपक्षी सांसदों ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। संसद परिसर में ‘राम मंदिर चढ़ावा किसने लूटा’ लिखा पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया गया।

विपक्ष का आरोप है कि इस मामले में भी सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर अपना विरोध दर्ज कराया।

तिरंगे को लेकर अवधेश प्रसाद ने कही बड़ी बात

अवधेश प्रसाद ने तिरंगे को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि तिरंगा किसी बाजार से खरीदा हुआ साधारण झंडा नहीं है, बल्कि इसे देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान असंख्य लोगों के संघर्ष और बलिदान के बाद राष्ट्रीय ध्वज का दर्जा मिला।

उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले स्वतंत्रता आंदोलन और शहीदों के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी संघर्ष के बाद देश को आजादी मिली और तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज बना।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तिरंगा फहराने की बात का उल्लेख करते हुए अवधेश प्रसाद ने उम्मीद जताई कि आरएसएस से जुड़े लोग भी अपने कार्यक्रमों में तिरंगा फहराएंगे।

कीर्ति आजाद ने छात्रों के मुद्दे पर मांगा जवाब

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने भी छात्रों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान गोलियां और पैलेट गन चलाई गईं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज किया गया।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि छात्रों से किए गए वादों में से कितने वादे पूरे किए गए हैं। कीर्ति आजाद ने गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आकर जवाब देने की विपक्ष की मांग को लेकर भी सवाल उठाया।

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उन्होंने कहा कि संसद का मौजूदा मानसून सत्र 20 जुलाई से चल रहा है और 13 अगस्त को इसका आखिरी दिन है। ऐसे में अब तक विपक्ष की मांग पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब क्यों नहीं आया।

संजय यादव बोले—अब बयान देने का समय निकल रहा

आरजेडी सांसद संजय यादव ने भी गृह मंत्री के बयान में देरी को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र समाप्त होने वाला है और अब सरकार विपक्ष की मांग पर गृह मंत्री का बयान दिलाने की बात कर रही है।

संजय यादव ने सरकार की देरी पर तंज कसते हुए इसकी तुलना ऐसे इलाज से की जो किसी व्यक्ति की मौत के बाद उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि मामला अब केवल बयान देने तक सीमित नहीं रह गया है और विपक्ष लगातार जवाबदेही की मांग कर रहा है।

संसद के आखिरी दिन से पहले बढ़ा सियासी पारा

मानसून सत्र के अंतिम चरण में एफसीआरए संशोधन बिल, छात्रों के प्रदर्शन, गृह मंत्री के बयान और राम मंदिर चढ़ावे जैसे मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

विपक्ष जहां एफसीआरए संशोधन बिल को जेपीसी में भेजने और छात्रों से जुड़े मामलों में गृह मंत्री से जवाब मांग रहा है, वहीं सरकार की ओर से इन मुद्दों पर अपने पक्ष को सदन में रखने की तैयारी है। संसद सत्र का आखिरी दिन नजदीक होने के साथ ही इन मुद्दों पर सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।

 

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