नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की भाजपा सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने देश में दलितों के साथ कथित भेदभाव और अत्याचार के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि भारत में आज भी दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष चल रहा है। राहुल गांधी के मुताबिक एक तरफ भारतीय संविधान है और दूसरी तरफ भाजपा तथा आरएसएस की विचारधारा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है। राहुल गांधी ने मौजूदा राजनीतिक संघर्ष को इसी वैचारिक टकराव के रूप में प्रस्तुत किया।
संविधान ने छुआछूत को खत्म किया, लेकिन समाज में अब भी मौजूदगी का दावा
राहुल गांधी ने कहा कि संविधान ने छुआछूत और भेदभाव को गैरकानूनी घोषित किया है, लेकिन देश के कई हिस्सों में आज भी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सामाजिक स्तर पर छुआछूत के अवशेष अब भी मौजूद हैं और इसका सबसे ज्यादा असर दलित समुदाय पर पड़ता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि समानता और सम्मान के अधिकार की गारंटी देता है। उनके मुताबिक जब किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर भेदभाव होता है तो यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
स्कूलों में दलित बच्चों से सफाई कराने का आरोप
राहुल गांधी ने कुछ स्कूलों में दलित बच्चों के साथ कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर दलित बच्चों से टॉयलेट साफ करवाए जाते हैं और उनसे झाड़ू-पोछा कराया जाता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार उनके मानसिक विकास पर गंभीर प्रभाव डालता है। राहुल गांधी के मुताबिक बचपन में मिलने वाला ऐसा अनुभव आने वाली पीढ़ियों की सोच को भी प्रभावित कर सकता है।
पानी के स्रोत और चाय की दुकानों पर भेदभाव का दावा
राहुल गांधी ने गांवों में सार्वजनिक जलस्रोतों के इस्तेमाल को लेकर भी कथित भेदभाव का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर दलितों को सार्वजनिक कुओं से पानी लेने की अनुमति नहीं दी जाती और उन्हें पानी के लिए अलग व्यवस्था करने को मजबूर किया जाता है।
उन्होंने चाय की दुकानों पर कथित तौर पर अलग-अलग कप रखे जाने का भी मुद्दा उठाया। राहुल गांधी के अनुसार कुछ स्थानों पर दलितों के लिए ऐसे कप इस्तेमाल किए जाते हैं जिन्हें उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है, जबकि अन्य लोगों को कांच के कप में चाय दी जाती है।
दलित दूल्हों को घोड़ी चढ़ने से रोकने का भी मुद्दा उठाया
कांग्रेस नेता ने शादी और बारात के दौरान दलित दूल्हों के घोड़े पर बैठने को लेकर होने वाली कथित हिंसा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर आज भी दलित दूल्हों को घोड़े पर बैठने से रोका जाता है और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट तक की जाती है।
राहुल गांधी ने कहा कि यह समस्या किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक उत्तर भारत के कई शहरों और गांवों में इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं।
भाजपा पर लगाया दलितों को आगे बढ़ने से रोकने का आरोप
राहुल गांधी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह दलितों को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहती। उन्होंने दावा किया कि दलित व्यक्ति जितना अधिक सफल होता है, उसके खिलाफ उतना ही बड़ा हमला किया जाता है।
हालांकि, राहुल गांधी के इन राजनीतिक आरोपों पर भाजपा की प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
राजस्थान और उत्तराखंड के कथित ‘शुद्धिकरण’ मामलों का जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने राजस्थान और उत्तराखंड से जुड़े कथित ‘शुद्धिकरण’ के मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में कांग्रेस विधायक दल के नेता के मंदिर जाने के बाद भाजपा नेताओं की ओर से कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ की रस्म की गई।
राहुल गांधी ने इसे छुआछूत का एक रूप बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां संविधान की भावना के खिलाफ हैं।
खड़गे से जुड़े हल्द्वानी मामले को लेकर भी सवाल
राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हल्द्वानी के रामलीला मैदान के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि खड़गे के वहां भाषण देने के बाद कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ की रस्म की गई।
उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपना पूरा जीवन देश और संविधान के लिए समर्पित किया है। ऐसे में उनके साथ इस तरह का व्यवहार गंभीर मामला है।
राहुल गांधी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के मंदिर जाने के बाद परिसर का ‘शुद्धिकरण’ किया जाता है तो इसका मतलब यही है कि उस व्यक्ति को अशुद्ध माना जा रहा है। उन्होंने इसे छुआछूत बताते हुए कहा कि भारतीय संविधान में छुआछूत को अपराध घोषित किया गया है।
एफआईआर दर्ज करने और एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
राहुल गांधी ने दावा किया कि खड़गे 8 अगस्त को मंदिर गए थे, 10 अगस्त को कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किया गया और 13 अगस्त को खड़गे ने इसे अपराध बताया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के एक भाजपा नेता ने कथित तौर पर इस ‘शुद्धिकरण’ को सही ठहराया था। राहुल गांधी ने मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि घटना को करीब 20 दिन बीत चुके हैं और कथित रूप से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
जीतन राम मांझी के मामले का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के मंदिर जाने के दौरान कथित भेदभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि दलितों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा केवल अतीत की समस्या नहीं है। संविधान ने कानूनी तौर पर छुआछूत और भेदभाव को समाप्त किया है, लेकिन सामाजिक स्तर पर इसके अवशेष अब भी दिखाई देते हैं।
‘संविधान और विचारधारा के बीच संघर्ष जारी’
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि देश की राजनीति में संविधान और भाजपा तथा आरएसएस की विचारधारा के बीच संघर्ष जारी है। उन्होंने कहा कि संविधान समानता, सम्मान और अधिकारों की बात करता है, जबकि देश के कई हिस्सों में जातिगत भेदभाव की घटनाएं अब भी सामने आ रही हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि दलितों को समान अधिकार और सम्मान मिलना जरूरी है तथा ऐसी घटनाओं के खिलाफ कानूनी और सामाजिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।



