नई दिल्ली। हॉकी इंडिया के भीतर प्रशासनिक स्तर पर विवाद सामने आया है। संगठन के अध्यक्ष और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान दिलीप टिर्की ने हॉकी इंडिया के महानिदेशक कमांडर आरके श्रीवास्तव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से महानिदेशक के पद से जुड़े सभी दायित्वों और अधिकारों का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया गया है।
हॉकी इंडिया की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में श्रीवास्तव पर कर्तव्य के निर्वहन में कथित लापरवाही, निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना और संगठन के महत्वपूर्ण मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नोटिस में विश्व कप से पहले राष्ट्रीय टीम की जर्सी के रंगों में बिना पूर्व अनुमति बदलाव किए जाने के फैसले को भी प्रमुख मुद्दे के तौर पर शामिल किया गया है।
विश्व कप से पहले जर्सी के रंग बदलने पर सवाल
कारण बताओ नोटिस के अनुसार, राष्ट्रीय टीम की जर्सी के रंगों में बदलाव से जुड़ा फैसला अध्यक्ष की पूर्व अनुमति के बिना लिया गया। हॉकी इंडिया ने इसे संगठनात्मक प्रक्रिया और निर्देशों की अनदेखी के तौर पर देखा है।
नोटिस में इस फैसले को लेकर श्रीवास्तव की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। राष्ट्रीय टीम की आधिकारिक जर्सी जैसे महत्वपूर्ण विषय में निर्णय लेने से पहले संबंधित अधिकारियों की अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए जाने की अपेक्षा होती है।
विश्व कप यात्रा को लेकर भी जताई गई आपत्ति
नोटिस में श्रीवास्तव के विश्व कप के लिए यात्रा करने को लेकर भी अध्यक्ष के निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है। हॉकी इंडिया के अनुसार, अध्यक्ष कार्यालय ने पूर्व खिलाड़ियों सुबद्रा प्रधान, रानी रामपाल और सरदार सिंह को चयनकर्ता एवं जूनियर कोच के तौर पर यात्रा की मंजूरी दी थी।
नोटिस में कहा गया है कि श्रीवास्तव को इस निर्णय की जानकारी नहीं दी गई थी। इसके बावजूद उनके विश्व कप यात्रा से जुड़े मामले को लेकर आपत्ति जताई गई है। हॉकी इंडिया ने इस पूरे घटनाक्रम को संगठनात्मक निर्देशों के अनुपालन से जोड़ते हुए श्रीवास्तव से जवाब मांगा है।
हॉकी इंडिया लीग के कामकाज पर भी सवाल
श्रीवास्तव पर हॉकी इंडिया लीग से जुड़े फ्रेंचाइजी समन्वय और प्राथमिकता वाले कार्यों में कथित तौर पर मनमाने निर्णय लेने का आरोप भी लगाया गया है।
नोटिस में कहा गया है कि इन मामलों में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार समन्वय और निर्णय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हॉकी इंडिया ने लीग से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों में इस कथित रवैये को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा है।
पीआर एजेंसी और खिलाड़ियों से जुड़े मामलों का भी जिक्र
कारण बताओ नोटिस में अनुबंधित जनसंपर्क एजेंसी के खिलाफ निर्देशित अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने का भी उल्लेख है। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका दौरे के दौरान खिलाड़ियों और भारतीय टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन से जुड़े कथित दुर्व्यवहार की शिकायतों पर कार्रवाई का प्रमाण उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया गया है।
हॉकी इंडिया ने इन मामलों में भी श्रीवास्तव की भूमिका और उनके स्तर से की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। नोटिस के मुताबिक संबंधित शिकायतों के निपटारे और उनके आधार पर उठाए गए कदमों का पर्याप्त रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है।
आंतरिक समिति की कार्यवाही और संचार रोके जाने का आरोप
नोटिस में विक्रम पाल से जुड़े आरोपों की जांच के लिए आंतरिक अथवा पीओएसएच समिति की कार्यवाही और रिपोर्ट के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होने का भी उल्लेख किया गया है।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ एफआईएच, एशियाई हॉकी महासंघ एएचएफ और विभिन्न राष्ट्रीय महासंघों से प्राप्त कुछ आधिकारिक संचार को रोके जाने का आरोप भी नोटिस में लगाया गया है। हॉकी इंडिया ने इन मामलों को भी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन से जोड़ते हुए जवाब मांगा है।
अधिकार और रिकॉर्ड सौंपने का निर्देश
हॉकी इंडिया ने श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से महानिदेशक के पद से जुड़े सभी दायित्वों और अधिकारों का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें संगठन से जुड़े सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, दस्तावेज, फाइलें, एक्सेस क्रेडेंशियल और संपत्तियां सौंपने को कहा गया है।
इसके अलावा उनके पास लंबित मामलों का परिचालन प्रभार भी अध्यक्ष कार्यालय की ओर से नामित अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि संगठन ने मामले को केवल कारण बताओ नोटिस तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि महानिदेशक के प्रशासनिक अधिकारों को भी तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।
उपनियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई
हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया है कि श्रीवास्तव के जवाब और मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई संस्था के उपनियमों के अनुसार की जाएगी। फिलहाल कारण बताओ नोटिस के जरिए महानिदेशक से लगाए गए आरोपों पर उनका स्पष्टीकरण मांगा गया है।
श्रीवास्तव की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब दिया जाता है और हॉकी इंडिया उस जवाब के आधार पर क्या निर्णय लेता है, यह आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल संगठन के भीतर महानिदेशक के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक प्रक्रिया से हॉकी प्रशासन में हलचल बढ़ गई है।

