Home » विविध इंडिया » परमाणु युग में भारत-ऑस्ट्रेलिया की नई छलांग: यूरेनियम आयात के ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर, पीएम मोदी बोले- स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मिलेगी रफ्तार

परमाणु युग में भारत-ऑस्ट्रेलिया की नई छलांग: यूरेनियम आयात के ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर, पीएम मोदी बोले- स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मिलेगी रफ्तार

Facebook
Twitter
WhatsApp

मेलबर्न। वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती साख और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में गुरुवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में आयोजित ‘एनुअल लीडर्स समिट’ के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण ऊर्जा सुरक्षा समझौते पर अंतिम मुहर लगा दी है। इस युगांतरकारी समझौते के साथ ही अब ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम का शांतिपूर्ण और असैन्य उद्देश्यों के लिए भारत में आयात होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने दोनों देशों के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय और रणनीतिक रिश्तों की नई इबारत लिखी।

क्लीन एनर्जी के सपनों को लगेंगे पंख, न्यूक्लियर पावर सेक्टर में ऐतिहासिक साझेदारी

वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज की मौजूदगी में इस महा-समझौते का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद उत्साहित नजर आए। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आज न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में एक बेहद संवेदनशील और अहम समझौते को पूरा कर लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता भारत के स्वच्छ और हरित ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगा। ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की निर्बाध आपूर्ति होने से भारत के परमाणु बिजलीघरों को नया जीवन मिलेगा, जिससे देश में कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण अनुकूल बिजली उत्पादन को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

प्रशासनिक अड़चनें हुईं दूर, आईएईए के कड़े सुरक्षा नियमों के दायरे में होगा व्यापार

दोनों देशों द्वारा जारी किए गए साझा बयान के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया और भारत ने साल 2015 में हुए मूल ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु सहयोग समझौते’ के तहत यूरेनियम निर्यात के लिए आवश्यक सभी जटिल प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। इसके तहत अब दोनों देशों के बीच यूरेनियम की खरीद-फरोख्त बिना किसी कागजी कतरब्योंत के सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी। साझा बयान में इस बात को विशेष रूप से स्पष्ट किया गया है कि ऑस्ट्रेलिया से आयात होने वाले इस यूरेनियम का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ शांतिपूर्ण नागरिक कार्यों जैसे बिजली उत्पादन और चिकित्सा क्षेत्र में ही किया जाएगा। इसके साथ ही यह पूरा व्यापार इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा नियमों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के सख्त दायरे में संचालित होगा।

ALSO READ THIS :  कर्नाटक भगदड़ पर सांसद मलूक नागर ने सरकार को लिया आड़े हाथ, गैर-जिम्मेदाराना रवैये की कड़ी निंदा की

ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन पर चिंता, संकट के बीच एक-दूसरे का हाथ थामने का संकल्प

यूरेनियम के अलावा दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों पर भी गहन मंथन हुआ। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति और उसके कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन व कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहे प्रतिकूल असर को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। दोनों देशों ने वैश्विक बाजार को खुला रखने और नियमों पर आधारित व्यापार व्यवस्था के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।

भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की सुरक्षित आपूर्ति करने में ऑस्ट्रेलिया की बड़ी भूमिका और बदले में ऑस्ट्रेलिया को लिक्विड फ्यूल व डाउनस्ट्रीम पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई में भारत की दक्षता को दोनों देशों ने खुले दिल से सराहा। दोनों पक्षों ने यह संकल्प लिया कि वैश्विक स्तर पर चाहे जैसी भी भू-राजनीतिक चुनौतियां आएं, दोनों देश एक-दूसरे के लिए ऊर्जा की सप्लाई को बिना किसी रुकावट के जारी रखेंगे और आपस में ऊर्जा व्यापार व निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा, रिन्यूएबल एनर्जी और लो-कार्बन फ्यूल पर विशेष फोकस

इस ऐतिहासिक मुलाकात में केवल पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर ही बात नहीं हुई, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी एक व्यापक रोडमैप तैयार किया गया। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करते हुए रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा), सौर ऊर्जा और कम-कार्बन वाले ईंधन (लो-कार्बन फ्यूल) को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। दोनों देशों का लक्ष्य पूरी एनर्जी वैल्यू चेन में बड़े पैमाने पर निवेश को प्रोत्साहित करना है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के ऊर्जा संकट से निपटा जा सके।

ALSO READ THIS :  नेपाल में बाढ़-भूस्खलन की त्रासदी पर पीएम मोदी ने जताया दुख, भारत की ओर से हरसंभव मदद का वादा

अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया दो जीवंत लोकतंत्र हैं। हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र के दो सबसे महत्वपूर्ण साझेदार होने के नाते दोनों देश एक जैसी सोच, समान वैश्विक नजरिया और एक अत्यंत गहरा आपसी भरोसा साझा करते हैं, जो आने वाले समय में पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें