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UNGA-81 में ‘इंडिया डे’ का मंच: AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और समावेशी विकास पर मंथन

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न्यूयॉर्क/मुंबई। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान रिलायंस फाउंडेशन, भारत में संयुक्त राष्ट्र और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की ओर से पांचवें ‘इंडिया डे’ का आयोजन किया गया। 24 सितंबर को आयोजित इस कार्यक्रम में भारत के विकास और तकनीकी मॉडल पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे समाधानों और नवाचारों पर विचार करना रहा, जिन्हें ग्लोबल साउथ समेत दुनिया के अन्य हिस्सों में भी बड़े स्तर पर अपनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, महिला नेतृत्व और समावेशी विकास जैसे विषयों पर विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने विचार रखे। ‘रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स’ नामक उच्चस्तरीय सत्र में एआई, जलवायु कार्रवाई और वैश्विक विकास के लिए नए सहयोग मॉडल पर चर्चा हुई। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अलावा जमैका, सूरीनाम और घाना के मंत्रियों ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों में विकासशील देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर विचार साझा किए।

एस. जयशंकर ने वैश्विक सहयोग की जरूरत पर दिया जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। चर्चा में इस बात पर भी विचार किया गया कि विकासशील देश तकनीक, नवाचार और संस्थागत सहयोग के माध्यम से साझा चुनौतियों का सामना किस तरह कर सकते हैं।

ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने कहा कि भारत की एक प्रमुख ताकत बड़े स्तर पर तैयार किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर और लोगों तक तकनीक की पहुंच है। उन्होंने एआई के विकास में स्थानीय भाषाओं और लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि एआई को इंसानों की भाषा समझने में सक्षम होना चाहिए।

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स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल पर चर्चा

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्या सलीला श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में तकनीक और स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को साथ लेकर चलने की जरूरत बताई। उन्होंने तकनीकी समाधानों को स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने ऊर्जा क्षेत्र में एआई की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऊर्जा क्षेत्र को अधिक मजबूत और कुशल बनाने में मदद कर सकता है।

रिलायंस फाउंडेशन के एग्जीक्यूटिव लीड बी. श्रीनिवासन ने कहा कि एआई और विकास अब केवल व्यक्तियों, संस्थानों या देशों तक सीमित विषय नहीं रह गए हैं। उन्होंने बड़े स्तर पर सहयोग और साझेदारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मानवीय संवेदनशीलता और सहयोग के माध्यम से विकास के नए मॉडल तैयार किए जा सकते हैं।

सफल भारतीय समाधानों को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर

भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीस्नर ने कहा कि वर्ष 2030 में सतत विकास लक्ष्यों की समयसीमा नजदीक आ रही है। ऐसे में भारत में सफल रहे समाधानों और प्रयोगों को दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने की जरूरत है।

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष समीर सरन ने कहा कि ‘इंडिया डे’ का उद्देश्य तकनीक, नवाचार, साझेदारी और संस्थागत क्षमता के माध्यम से लोगों की सेवा के नए तरीके तलाशना है। कार्यक्रम में भारत के अनुभवों और विकास मॉडल को वैश्विक स्तर पर साझा करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

चार विषयगत सत्रों में एआई और समावेशी विकास पर मंथन

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कार्यक्रम के दौरान चार विषयगत सत्र आयोजित किए गए। इनमें एआई, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, महिलाओं के नेतृत्व में विकास, स्वास्थ्य और समावेशी विकास जैसे विषय शामिल रहे। एआई के व्यावहारिक इस्तेमाल के साथ उसके नियमन, डेटा गवर्नेंस और सार्वजनिक सेवाओं में इसके जिम्मेदार उपयोग पर भी चर्चा की गई।

वक्ताओं ने इस बात पर विचार किया कि तकनीक का इस्तेमाल केवल नवाचार तक सीमित न रहकर आम लोगों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और विकास को अधिक समावेशी बनाने में किस तरह किया जा सकता है।

भारत के एआई इकोसिस्टम पर विशेष प्रकाशन जारी

कार्यक्रम के दौरान ‘व्हेन सिलिकॉन मीट्स द सॉयल: इंडियाज एआई रिवॉल्यूशन’ नाम से विशेष प्रकाशन भी जारी किया गया। इसमें भारत के एआई इकोसिस्टम से जुड़े 12 विकसित मामलों और छह उभरते प्रयोगों को शामिल किया गया है।

प्रकाशन में किसानों, स्वास्थ्यकर्मियों और विभिन्न समुदायों तक एआई आधारित समाधानों की पहुंच और उनके इस्तेमाल से जुड़े उदाहरणों को प्रस्तुत किया गया है। इसके माध्यम से भारत में विकसित हो रहे एआई मॉडल और जमीनी स्तर पर तकनीक के उपयोग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने रखा गया।

‘इंडिया डे’ के दौरान हुई चर्चाओं में तकनीकी नवाचार के साथ मानव-केंद्रित विकास, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर रहा। आयोजन में भारत के अनुभवों को वैश्विक विकास के लिए संभावित समाधानों के रूप में साझा करने पर चर्चा की गई।

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