Home » विविध इंडिया » नागालैंड की बाढ़ में घायल हथिनी का वनतारा में चलेगा विशेष इलाज, असम में 3 नए पशु चिकित्सा केंद्र बनाने का प्रस्ताव

नागालैंड की बाढ़ में घायल हथिनी का वनतारा में चलेगा विशेष इलाज, असम में 3 नए पशु चिकित्सा केंद्र बनाने का प्रस्ताव

Facebook
Twitter
WhatsApp

जामनगर। जुलाई में आई भीषण बाढ़ के दौरान तेज बहाव में बहकर गंभीर रूप से घायल हुई 53 वर्षीय हथिनी जॉयमोती को विशेष उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर जामनगर स्थित वनतारा लाया गया है। नागालैंड में बाढ़ के तेज पानी में बहने के बाद स्थानीय लोगों और सरकारी एजेंसियों ने उसे सुरक्षित बचाया था। गंभीर हालत को देखते हुए अब उसे विशेष चिकित्सा सुविधाओं वाले अस्पताल में उपचार दिया जा रहा है।

जॉयमोती के शरीर पर कई गंभीर घाव हैं। उसकी दाहिनी आंख बुरी तरह क्षतिग्रस्त बताई गई है। इसके अलावा पुरानी चोट के कारण उसके पिछले पैर में भी लंगड़ापन है। बाढ़ की घटना के बाद स्थानीय स्तर पर उसका प्राथमिक उपचार किया गया, लेकिन उसकी उम्र और चोटों की गंभीरता को देखते हुए उसे विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल की जरूरत थी।

बाढ़ के तेज बहाव में बह गई थी हथिनी

जुलाई में नागालैंड में आई भीषण बाढ़ के दौरान जॉयमोती तेज पानी की चपेट में आ गई थी। बाढ़ के पानी में बहने के कारण उसके शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों और सरकारी एजेंसियों के प्रयास से उसे बचाया गया और प्राथमिक स्तर पर उपचार उपलब्ध कराया गया।

हालांकि चोटों के अलावा उसकी उम्र और चलने में परेशानी ने उपचार को चुनौतीपूर्ण बना दिया। विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता को देखते हुए उसे जामनगर स्थित वनतारा लाने का फैसला किया गया।

लंबी सड़क यात्रा से बचाने के लिए किया गया एयरलिफ्ट

जॉयमोती को सड़क मार्ग से जामनगर लाना लंबा और थकाऊ सफर होता। गंभीर रूप से घायल और उम्रदराज हथिनी के लिए इतनी लंबी यात्रा स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिमपूर्ण हो सकती थी। इसी वजह से उसे विमान के जरिए जामनगर पहुंचाया गया।

ALSO READ THIS :  विश्व हाथी दिवस पर वनतारा की बड़ी पहल: 260 से अधिक हाथियों की देखभाल से लेकर मानव-हाथी संघर्ष रोकने तक संरक्षण का दायरा देश-विदेश में बढ़ाया

यात्रा के दौरान उसकी सेहत, आराम और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। एयरलिफ्ट के जरिए उसे कम समय में विशेष चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाया गया, ताकि इलाज में देरी न हो और लंबी सड़क यात्रा का अतिरिक्त तनाव उस पर न पड़े।

भारत में अपनी तरह का पहला प्रयास बताया गया

गंभीर रूप से घायल हाथी को अस्पताल में इलाज के लिए विमान से पहुंचाना भारत में अपनी तरह का पहला प्रयास बताया गया है। वन्यजीवों के बचाव और उपचार के क्षेत्र में इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जॉयमोती के मामले में एयरलिफ्ट का उद्देश्य केवल स्थान बदलना नहीं, बल्कि उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जल्द से जल्द विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था।

वनतारा के विशेष अस्पताल में होगी विस्तृत जांच

जामनगर पहुंचने के बाद जॉयमोती की विस्तृत चिकित्सा जांच की जा रही है। उसके शरीर पर मौजूद गंभीर घावों के साथ उसकी दाहिनी आंख की स्थिति का विशेष रूप से परीक्षण और उपचार किया जा रहा है।

इसके अलावा उसके पिछले पैर की पुरानी चोट और चलने में आ रही परेशानी पर भी चिकित्सकीय निगरानी रखी जाएगी। उपचार के दौरान उसकी पोषण संबंधी जरूरतों और अन्य आवश्यक देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

जॉयमोती को स्थायी रूप से जामनगर नहीं लाया गया

वनतारा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जॉयमोती को जामनगर लाने का उद्देश्य उसका स्थायी स्थानांतरण नहीं है। उसे केवल विशेष और जरूरी चिकित्सा उपचार के लिए यहां लाया गया है।

इलाज के दौरान उसकी स्थिति की लगातार निगरानी की जाएगी और स्वास्थ्य में सुधार के आधार पर आगे की व्यवस्था तय की जाएगी।

ALSO READ THIS :  सावन के पहले सोमवार पर दिल्ली-एनसीआर में बारिश के आसार, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट

असम में वन्यजीव उपचार केंद्र बनाने का प्रस्ताव

वनतारा ने भविष्य में घायल वन्यजीवों को उनके मूल क्षेत्र के करीब ही बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की है। इसके तहत असम में हाथियों के लिए एक समर्पित केंद्र सहित तीन वन्यजीव पशु चिकित्सा केंद्र बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।

इस तरह के केंद्र बनने से बाढ़, मानव वन्यजीव संघर्ष या अन्य दुर्घटनाओं में घायल होने वाले हाथियों और दूसरे वन्यजीवों को लंबी दूरी तक स्थानांतरित करने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही उन्हें स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

जॉयमोती का सफर बना वन्यजीव चिकित्सा के लिए मिसाल

जॉयमोती की कहानी बाढ़ में वन्यजीवों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाती है। गंभीर रूप से घायल 53 वर्षीय हथिनी को पहले स्थानीय स्तर पर बचाया गया और प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद बेहतर चिकित्सा के लिए उसे एयरलिफ्ट कर जामनगर पहुंचाया गया।

अब वनतारा के विशेष अस्पताल में उसकी चोटों, आंख और पुराने पैर के उपचार के साथ पोषण और अन्य जरूरी देखभाल की जा रही है। जॉयमोती को एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाने का यह प्रयास देश में वन्यजीवों की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें