मुंबई। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर शेयर बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती दिखाई दे रही है। आईपीओ खुलने से पहले ही बड़े घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से करीब ₹2.5 लाख करोड़ की शुरुआती मांग सामने आने का दावा किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह रकम लगभग ₹30,200 करोड़ के प्रस्तावित इश्यू आकार से आठ गुना से भी अधिक है। हालांकि, इसे आईपीओ का आधिकारिक सब्सक्रिप्शन नहीं माना जा सकता, क्योंकि वास्तविक बोली प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर संस्थागत निवेशकों की शुरुआती दिलचस्पी के बीच खुदरा निवेशकों के लिए भी कई ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स पर प्री-बुकिंग यानी प्री-अप्लाई की सुविधा शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इससे निवेशक आईपीओ खुलने से पहले ही अपना आवेदन दर्ज करने की तैयारी कर सकते हैं। हालांकि, प्री-अप्लाई और वास्तविक आईपीओ आवेदन की प्रक्रिया अलग-अलग होती हैं। आईपीओ खुलने के बाद ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन और बोली को आगे बढ़ाया जाता है।
संस्थागत निवेशकों से ₹2.5 लाख करोड़ की शुरुआती मांग का दावा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में विदेशी लॉन्ग-ओनली फंड्स, सॉवरेन वेल्थ फंड्स, बड़े म्यूचुअल फंड्स और बीमा कंपनियों ने शुरुआती दिलचस्पी दिखाई है। इन निवेशकों की ओर से करीब ₹2.5 लाख करोड़ की मांग का संकेत मिलने की बात कही गई है। प्रस्तावित आईपीओ का आकार लगभग ₹30,200 करोड़ बताया गया है। इस लिहाज से शुरुआती मांग इश्यू के आकार से आठ गुना से अधिक बैठती है।
हालांकि, निवेशकों की शुरुआती दिलचस्पी को अंतिम मांग या सुनिश्चित आवंटन के रूप में देखना उचित नहीं होगा। एंकर निवेशकों की बोली, आईपीओ की वास्तविक सब्सक्रिप्शन स्थिति और आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शुरुआती संकेत कितनी वास्तविक मांग में तब्दील होते हैं।
संस्थागत निवेशकों की भागीदारी किसी बड़े आईपीओ के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इनके निवेश संबंधी निर्णय में कंपनी के कारोबार, भविष्य की संभावनाओं, वित्तीय स्थिति और मूल्यांकन जैसे पहलुओं की भूमिका होती है। इसके बावजूद, बड़े निवेशकों की दिलचस्पी से खुदरा निवेशकों को निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती।
जीआईसी, ब्लैकरॉक और एलआईसी जैसे बड़े नामों की चर्चा
रिपोर्टों में जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में दिलचस्पी दिखाने वाले संभावित बड़े निवेशकों में सिंगापुर के जीआईसी, नॉर्जेस बैंक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे सॉवरेन वेल्थ फंड्स के नाम सामने आए हैं।
इसके अलावा ब्लैकरॉक, फिडेलिटी और कैपिटल ग्रुप जैसे वैश्विक निवेश संस्थानों का भी उल्लेख किया गया है। घरेलू संस्थागत निवेशकों में भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी, एसबीआई म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी म्यूचुअल फंड जैसे बड़े नाम बताए गए हैं।
इन निवेशकों की कथित शुरुआती दिलचस्पी से आईपीओ को लेकर बाजार में चर्चा तेज हुई है। हालांकि, इन सभी संस्थानों के अंतिम निवेश, वास्तविक बोली और आवंटन की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर ही की जा सकेगी।
21 अक्टूबर को खुलेगा आईपीओ, 23 अक्टूबर तक मौका
जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आईपीओ का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर निर्धारित बताया गया है। आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। इससे पहले 19 अक्टूबर को एंकर निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया आयोजित की जाएगी।
एंकर निवेशक आमतौर पर बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं, जिन्हें आईपीओ खुलने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत शेयरों का आवंटन किया जा सकता है। उनकी बोली और आवंटन से बाजार को संस्थागत निवेशकों की भागीदारी का शुरुआती संकेत मिल सकता है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के मामले में भी एंकर निवेशकों की प्रक्रिया पर बाजार की नजर रहेगी। इसके बाद आईपीओ खुलने पर खुदरा निवेशकों, गैर-संस्थागत निवेशकों और अन्य पात्र श्रेणियों में मांग की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
खुदरा निवेशकों के लिए एक लॉट की कीमत ₹13,428
प्रस्तावित आईपीओ में न्यूनतम लॉट 12 शेयरों का बताया गया है। ऊपरी प्राइस बैंड ₹1,119 प्रति शेयर के हिसाब से एक लॉट के लिए ₹13,428 का निवेश करना होगा। वास्तविक आवेदन करते समय निवेशकों को लागू नियमों और अपने ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
खुदरा निवेशकों के लिए कुछ ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स पर प्री-अप्लाई की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। इस प्रक्रिया के तहत निवेशक आईपीओ खुलने से पहले अपनी रुचि या आवेदन संबंधी विवरण दर्ज कर सकते हैं। हालांकि, इसे अंतिम आवेदन या शेयर आवंटन नहीं समझना चाहिए।
आईपीओ खुलने के बाद आवेदन की पुष्टि, भुगतान संबंधी प्रक्रिया और अन्य जरूरी औपचारिकताएं निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी करनी होती हैं। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि प्री-अप्लाई करने से शेयर मिलना सुनिश्चित नहीं होता।
शुरुआती मांग के दावे और वास्तविक सब्सक्रिप्शन में अंतर
आईपीओ से पहले सामने आई करीब ₹2.5 लाख करोड़ की शुरुआती मांग की खबर ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। फिर भी इस आंकड़े को औपचारिक सब्सक्रिप्शन से अलग समझना जरूरी है। शुरुआती संस्थागत मांग, एंकर निवेशकों की वास्तविक बोली और आम निवेशकों की ओर से किए गए आवेदन तीन अलग-अलग चरण हैं।
19 अक्टूबर को एंकर निवेशकों की बोली के बाद संस्थागत भागीदारी की तस्वीर कुछ हद तक स्पष्ट हो सकती है। इसके बाद 21 से 23 अक्टूबर के दौरान आईपीओ के लिए प्राप्त वास्तविक आवेदनों और विभिन्न निवेशक श्रेणियों में सब्सक्रिप्शन के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।
जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ आकार और बड़े निवेशकों की कथित दिलचस्पी इसे बाजार के लिए महत्वपूर्ण पेशकश बनाते हैं। हालांकि, निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले निवेशकों को कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों, वित्तीय विवरणों, जोखिम कारकों, मूल्यांकन और आईपीओ की अंतिम शर्तों का अध्ययन करना चाहिए। केवल शुरुआती मांग के दावों के आधार पर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं होगा।

