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लखनऊ ट्रिपल मर्डर केस: यूट्यूबर बहन प्रज्ञा मिश्रा का पुलिस पर तीखा हमला, कहा- ‘ऐसी पुलिसिंग से बेहतर तो माफिया काल था’

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लखनऊ, 23 अगस्त। लखनऊ में आईसीआईसीआई बैंक की रिलेशनशिप मैनेजर दिव्या मिश्रा, उनकी ननद शीबा और एसबीआई के फील्ड ऑफिसर मानस बाजपेयी की मौत के मामले में अब मृतका दिव्या की बहन और यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रज्ञा ने रविवार देर रात सोशल मीडिया मंच एक्स पर 25 से ज्यादा सवाल उठाते हुए मामले की गहन जांच की मांग की है।

प्रज्ञा का कहना है कि मानस के पास दो पिस्टल और एक देसी तमंचा कैसे पहुंचा, इसका पता लगाना बेहद जरूरी है। उन्होंने सवाल किया कि अगर मानस स्वभाव से इतना डरपोक था कि रात में अकेले घर से निकलने से भी हिचकता था और परिवार के पास पहले से कोई असलहा नहीं था, तो उसके पास एक साथ तीन हथियार कहां से आए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मानस को इतनी गंभीर वारदात के लिए किसने तैयार किया और क्या उसके संपर्क में कोई ऐसा व्यक्ति था जो उसे लगातार उकसा रहा था। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इन आरोपों या आशंकाओं की पुष्टि नहीं की है।

तीन हथियारों का स्रोत बना सबसे बड़ा सवाल

प्रज्ञा मिश्रा ने कहा कि मानस के पास से दो नौ एमएम पिस्टल और एक देसी तमंचा बरामद हुआ है। तीनों हथियारों की मौजूदगी अपने आप में जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है।

उन्होंने सवाल किया कि मानस को ये हथियार किसने उपलब्ध कराए। क्या उसने इन्हें खुद हासिल किया या किसी दूसरे व्यक्ति ने उसे दिए। उन्होंने पुलिस से हथियारों के स्रोत, उनके सीरियल नंबर, कारतूस और फायरिंग से जुड़े सभी साक्ष्यों की विस्तृत जांच करने की मांग की।

प्रज्ञा ने यह भी पूछा कि क्या मानस के किसी संपर्क में रहने वाले व्यक्ति ने उसे हथियार उपलब्ध कराए थे और क्या वारदात से पहले उसने किसी से हथियारों को लेकर संपर्क किया था।

मानस का कोच कौन था, प्रज्ञा ने पूछा

प्रज्ञा ने सवाल उठाया कि आखिर मानस को जघन्य अपराध के लिए किसने तैयार किया। उन्होंने पूछा कि उसका कोच कौन था और क्या कोई व्यक्ति उसे लगातार भड़का रहा था।

उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आना जरूरी है। यदि जांच में हथियारों के स्रोत और मानस के संपर्क में रहे लोगों की भूमिका स्पष्ट नहीं होती है तो मामले की जांच किसी दूसरी एजेंसी से कराने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

हालांकि, पुलिस की जांच में अभी तक किसी कथित कोच की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

35 से 45 मिनट तक कहां था मानस

प्रज्ञा ने दिव्या की हत्या और मानस के घर पहुंचने के बीच के समय को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि बैंक और मानस के घर के बीच सामान्य तौर पर करीब 10 से 15 मिनट का रास्ता था।

उनके मुताबिक, दिव्या की हत्या के बाद मानस को घर पहुंचने में लगभग 35 से 45 मिनट लगे। ऐसे में उन्होंने पूछा कि इस दौरान मानस कहां था। क्या वह रास्ते में कहीं रुका था और अगर रुका था तो किससे मिला।

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प्रज्ञा ने यह भी सवाल किया कि क्या मानस इस दौरान किसी कथित कोच या अन्य व्यक्ति से मिलने गया था। उन्होंने पुलिस से सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल के आधार पर इस समय अंतराल की पड़ताल करने की मांग की है।

घर में तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी की जांच की मांग

प्रज्ञा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या घटना के समय मानस के घर में उसके अलावा कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद था। उन्होंने घर में आने और बाहर निकलने के संभावित रास्तों की भी जांच किए जाने की मांग की।

उनका कहना है कि पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि तीनों हथियारों में से किस हथियार से किस व्यक्ति पर गोली चलाई गई और क्या घटनास्थल से मिले सभी साक्ष्य एक ही घटनाक्रम की पुष्टि करते हैं।

‘चीट’ शब्द वाले स्टेटस पर भी सवाल

प्रज्ञा ने मानस के कथित अंतिम स्टेटस को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, पत्नी दिव्या की हत्या के बाद मानस के वॉट्सऐप पर ऐसा स्टेटस आया था जिसमें पत्नी की हत्या, बहन को मारने और खुदकुशी करने की बात लिखी गई थी।

प्रज्ञा ने सवाल किया कि क्या यह स्टेटस वास्तव में मानस ने ही लिखा था। उनका कहना है कि मानस आमतौर पर हिंग्लिश में लिखता था, जबकि कथित स्टेटस अंग्रेजी में था।

उन्होंने पुलिस से तकनीकी जांच कराने की मांग की है कि स्टेटस किस डिवाइस से और किस समय अपडेट हुआ था। साथ ही उन्होंने स्टेटस में इस्तेमाल किए गए ‘चीट’ शब्द को लेकर भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या इसका इस्तेमाल जांच को भटकाने के लिए किया गया हो सकता है।

लॉक आईफोन में छिपे हो सकते हैं अहम सुराग

पुलिस ने मानस का आईफोन बरामद किया है, लेकिन फोन लॉक होने के कारण उसका पूरा डेटा अभी खंगाला नहीं जा सका है। पुलिस उसके दोस्तों और रिश्तेदारों से फोन का पासवर्ड हासिल करने का प्रयास कर रही है।

डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा के मुताबिक, फोन का लॉक जबरन तोड़ने की कोशिश में डेटा डिलीट होने का खतरा है। इसलिए पुलिस सावधानी से आगे बढ़ रही है।

पुलिस के अनुसार कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन की जांच में कुछ अहम जानकारियां मिली हैं। घटना वाले दिन मानस कहां-कहां गया और किन लोगों के संपर्क में रहा, इसका मिलान किया जा रहा है।

सीतापुर के वकील से हथियार मिलने की चर्चा

जांच के दौरान मानस के एक दोस्त ने पुलिस को बताया कि सीतापुर के एक वकील ने मानस को असलहे उपलब्ध कराए थे। बताया गया कि बैंक से जुड़े काम के दौरान मानस और उस वकील की मुलाकात हुई थी।

हालांकि, पुलिस ने अभी तक वकील द्वारा हथियार उपलब्ध कराने की बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस बिंदु की जांच की जा रही है।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद हथियार कहां से आए और उनका मानस तक पहुंचने का रास्ता क्या था।

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डेढ़ करोड़ रुपये के स्त्रीधन और एलिमनी पर भी विवाद

प्रज्ञा मिश्रा ने दिव्या द्वारा डेढ़ करोड़ रुपये की एलिमनी मांगने के कथित दावे को भी गलत बताया है। उन्होंने कहा कि एलिमनी और स्त्रीधन दो अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं।

उनके मुताबिक, स्त्रीधन वह संपत्ति और आभूषण होते हैं जो महिला को शादी से पहले, शादी के समय या शादी के बाद उपहार के रूप में मिले हों और जिन पर महिला का अधिकार होता है।

प्रज्ञा ने दावा किया कि दिव्या ने अपने मामले में स्त्रीधन से जुड़े बिल और तस्वीरें प्रस्तुत की थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि कितनी राशि के स्त्रीधन की मांग की गई थी, लेकिन यदि राशि डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है तो इससे शादी में दिए गए सामान की मात्रा का अंदाजा लगाया जा सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि दिव्या के मामले में डेढ़ करोड़ रुपये की एलिमनी की बात को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है।

तलाक की प्रक्रिया को लेकर भी दी सफाई

प्रज्ञा ने कहा कि दिव्या का तलाक का मामला अभी शुरुआती चरण में था। उनके मुताबिक मामले में नोटिस और जवाब, मध्यस्थता, काउंसलिंग और सुलह जैसे चरण पूरे होने बाकी थे।

उन्होंने दावा किया कि दिव्या के मामले में केवल एक राउंड काउंसलिंग हुआ था और मामला अभी स्थायी एलिमनी के चरण तक नहीं पहुंचा था।

हालांकि, तलाक की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित वित्तीय दावों के वास्तविक विवरण की पुष्टि अदालत के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों से ही हो सकेगी।

परिवार ने मानस को बताया बेहद डरपोक

मानस के मामा अवधेश शुक्ला ने बताया कि मानस स्वभाव से काफी डरपोक था। उनके मुताबिक वह रात में अकेले घर से निकलने में भी हिचकता था।

अवधेश शुक्ला ने कहा कि परिवार के पास पहले से कोई असलहा नहीं था। ऐसे में मानस के पास तीन हथियार कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी परिवार को नहीं है।

यही वजह है कि अब हथियारों का स्रोत मामले की जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

दिव्या की हत्या के बाद घर पहुंचा था मानस

पुलिस के मुताबिक 20 अगस्त को मानस बाजपेयी कार से आईसीआईसीआई बैंक पहुंचा था। उसने फोन करके अपनी पत्नी दिव्या मिश्रा को बैंक के बाहर बुलाया। दोनों के बीच कुछ बातचीत हुई और इसके बाद मानस ने कथित तौर पर दिव्या को गोली मार दी।

इसके बाद वह वहां से अपने घर की ओर चला गया। करीब 12 बजकर 30 मिनट के आसपास वह हुसड़िया स्थित अपने घर पहुंचा।

घर के अंदर उसने अपनी बहन शीबा को गोली मारी और इसके बाद खुद को भी गोली मार ली। गोलियों की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुए। वहां भाई और बहन दोनों गंभीर हालत में मिले।

घटना गोमतीनगर थाना क्षेत्र की बताई गई है। सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची थी।

पोस्टमॉर्टम में सिर में गोली लगने की पुष्टि

तीनों शवों का डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक दिव्या और शीबा के सिर में गोली फंसी मिली, जबकि मानस के सिर से गोली आरपार हो गई थी।

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रिपोर्ट में दिव्या के चेहरे और सिर पर चोट के छह निशान भी बताए गए हैं। इससे पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि गोली चलने से पहले दोनों के बीच संघर्ष हुआ था या नहीं।

मानस की मानसिक स्थिति भी जांच का हिस्सा

परिवार के मुताबिक मानस की बहन शीबा मानसिक रूप से परेशान रहती थी और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी मानस पर थी। वहीं दूसरी तरफ मानस की अपनी शादीशुदा जिंदगी में भी पत्नी दिव्या के साथ विवाद चल रहा था।

पुलिस अब इन सभी परिस्थितियों को जोड़कर यह समझने की कोशिश कर रही है कि वारदात से पहले मानस की मानसिक स्थिति कैसी थी और किन परिस्थितियों ने घटनाक्रम को इस भयावह मोड़ तक पहुंचाया।

माता-पिता की मौत के बाद बढ़ी थी जिम्मेदारियां

मानस के पिता आरके बाजपेयी की हार्ट अटैक से मौत हुई थी। इसके कुछ समय बाद उसकी मां अंजू का भी कैंसर के कारण निधन हो गया था।

माता-पिता की मृत्यु के बाद बहन शीबा की जिम्मेदारी मानस पर आ गई थी। परिवार के मुताबिक, वह उसकी देखभाल करता था। इसी बीच उसकी वैवाहिक जिंदगी में विवाद बढ़ता गया और पत्नी के साथ तलाक की प्रक्रिया भी चल रही थी।

मकान फिलहाल पुलिस ने किया सील

मानस के मामा अवधेश शुक्ला के मुताबिक, परिवार के पास खेती की जमीन नहीं है और हुसड़िया चौराहे स्थित मानस का मकान फिलहाल पुलिस ने सील कर रखा है।

उन्होंने बताया कि मानस की ताई और चचेरी बहन नेहा कानपुर जाकर भाई और बहन की अस्थियां गंगा में विसर्जित कर चुकी हैं।

परिवार की ओर से कहा गया है कि यदि अदालत के आदेश के अनुसार कोई करीबी रिश्तेदार संपत्ति का हकदार बनता है तो उन्हें आपत्ति नहीं होगी। यदि कोई संपत्ति लेने नहीं आता और उसकी जिम्मेदारी परिवार को मिलती है तो उसे मंदिर या ट्रस्ट को दान करने की बात कही गई है।

पुलिस के सामने अब कई अहम सवाल

इस मामले में पुलिस की जांच फिलहाल कई बिंदुओं पर आगे बढ़ रही है। इनमें मानस के पास मिले तीन हथियारों का स्रोत, वारदात वाले दिन उसकी गतिविधियां, उसके संपर्क में रहे लोग, मोबाइल फोन का डेटा, कथित वॉट्सऐप स्टेटस और बैंक से घर तक पहुंचने में लगे समय की जांच प्रमुख है।

प्रज्ञा मिश्रा ने इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि हथियारों का स्रोत और मानस के संपर्क में रहे लोगों की भूमिका सामने आए बिना मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं हो सकती।

फिलहाल पुलिस की ओर से किसी तीसरे व्यक्ति के शामिल होने या किसी कथित वकील द्वारा हथियार उपलब्ध कराने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही इन सवालों के वास्तविक जवाब सामने आ सकेंगे।

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