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‘वंदे मातरम पर राजनीति बंद करें दल’, मायावती की दो टूक- ‘बेरोजगारी और बाढ़ जैसे मुद्दों पर ध्यान दे सरकार’

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लखनऊ। वंदे मातरम के गायन को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने राजनीतिक दलों को दो टूक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के गायन को लेकर राजनीति करना उचित नहीं है। मायावती ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे राजनीतिक विवादों में उलझने के बजाय बेरोजगारी, छात्र छात्राओं की समस्याओं और बाढ़ से हो रही जान माल की क्षति जैसे गंभीर जनहित के मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करें।

वंदे मातरम पर राजनीति को मायावती ने बताया अनुचित

मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए वंदे मातरम को लेकर चल रही बहस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में इस बात को लेकर राजनीति हो रही है कि वंदे मातरम का पूरा गीत गाया जाए, इसके शुरुआती दो छंद गाए जाएं या इसका गायन न किया जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति मौजूदा समय में उचित नहीं है।

बसपा प्रमुख ने कहा कि वंदे मातरम के गायन को लेकर हाल ही में संसद में जो कानून पास किया गया है, यह कोई पहली बार होने वाली घटना नहीं है। उनके मुताबिक सत्ता परिवर्तन के दौरान केंद्र और राज्यों में राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितों के अनुसार पहले की सरकारों द्वारा बनाए गए कानूनों में बदलाव करते रहे हैं।

राजनीतिक स्वार्थ से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप

मायावती ने कहा कि सत्ता में आने वाली पार्टियां कई बार अपने राजनीतिक स्वार्थ या अपनी कमियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दों को सामने लाती हैं। उन्होंने कहा कि अलग अलग सरकारों के समय राजनीतिक दल एक दूसरे के बनाए कानूनों को बदलने की प्रक्रिया में लगे रहते हैं, लेकिन इससे जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।

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उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि देश में इस समय जिन समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए। मायावती ने कहा कि बेरोजगार युवाओं, छात्र छात्राओं और नई पीढ़ी से जुड़े मुद्दे गंभीर हैं और इन पर सरकारों तथा राजनीतिक दलों को ठोस तरीके से काम करना चाहिए।

बेरोजगार युवाओं और नई पीढ़ी के मुद्दे उठाए

बसपा प्रमुख ने अपने बयान में बेरोजगार युवाओं के साथ साथ जेन जी और स्कूली बच्चों की जेन अल्फा से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े सवालों पर राजनीतिक बहस और आरोप प्रत्यारोप के बजाय गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

मायावती ने कहा कि देश के सामने कई ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। ऐसे में राजनीतिक दलों को जनता का ध्यान भावनात्मक और विवादित मुद्दों से हटाकर रोजगार, शिक्षा और नागरिकों की सुरक्षा जैसे विषयों पर केंद्रित करना चाहिए।

बाढ़ से तबाही पर भी सरकारों से गंभीर ध्यान देने की अपील

मायावती ने देश के कुछ हिस्सों में आई भीषण बाढ़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में जान माल का नुकसान हो रहा है और लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में सरकारों की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को राहत और सहायता पहुंचाना होनी चाहिए।

उन्होंने केंद्र और सभी राज्य सरकारों के साथ राजनीतिक दलों से भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर समुचित ध्यान देने की अपील की। मायावती के मुताबिक मौजूदा समय में देश और जनहित से जुड़े इन मुद्दों पर काम करना सबसे जरूरी है।

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वंदे मातरम को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने सामने

वंदे मातरम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद 15 अगस्त के बाद तेज हुआ। भाजपा की ओर से कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि पूरा वंदे मातरम गाए जाने के दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने इसे रोकने की कोशिश की और राहुल गांधी भी इस दौरान असहज नजर आए।

कांग्रेस ने भाजपा के इन आरोपों को खारिज कर दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में पूरा वंदे मातरम गाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी का इशारा गीत रोकने के लिए नहीं था, बल्कि लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था कराने को लेकर था।

जनहित के मुद्दों पर लौटने का संदेश

वंदे मातरम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही बयानबाजी के बीच मायावती का बयान राजनीतिक बहस को दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बसपा प्रमुख ने साफ तौर पर कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसे मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय जनता की रोजमर्रा की समस्याओं और देश के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए।

मायावती ने बेरोजगारी, शिक्षा, युवाओं के भविष्य और बाढ़ से प्रभावित लोगों की स्थिति को प्राथमिकता देने की बात कहते हुए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ सभी राजनीतिक दलों को जनहित में अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की है।

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