पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। AQI 300 पार कर चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश पेपर मिल एसोसिएशन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘आरामको’ पेपर मिल मालिक प्रभात ने जो तमाशा किया, वह सिस्टम की सड़ांध को उजागर कर गया।
माथे पर टशन, आंखों में घूर और लहजे में धमकी… प्रभात ने मीडिया को ही टारगेट कर लिया। “इस बारे में कुछ सोचना-करना पड़ेगा!” कहकर उन्होंने साफ संदेश दे दिया कि ‘मामा प्रदूषण मंत्री हैं तो डर काहे का?’
मीडिया पर ‘हमला’, फिर किसानों पर ‘कीचड़’!
उत्तर प्रदेश पेपर मिल एसोसिएशन अध्यक्ष पंकज अग्रवाल के संबोधन के बाद प्रभात ने माइक थामा। पहले तो टैबलेट पर आंकड़े दिखाकर खुद को ‘पाक-साफ’ साबित करने की कोशिश की। लेकिन एक नेशनल अखबार की खबर का हवाला देकर झल्लाए कि “मामा केपी मलिक का नाम जोड़ा गया है, प्रमाण क्या हैं?” उन्होंने अचानक मीडिया को भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप ठोंक दिया।

उन्होंने कहा,
“जो दिन में धरना देते हैं, शाम में उन्हीं में से कुछ लोग डिमांड करते हैं।”
नाम पूछने पर सकपकाए और बात पलट दी कि “मेरा मतलब RDF ठेकेदारों से थाऔर कहा कि ऐसे किसी का कैसे नाम ले दें। कैसे उसे पू्रफ करेंगे?”
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#मुजफ्फरनगर: पेपर मिल मालिक प्रभात का प्रेस कॉन्फ्रेंस में तमाशा, मीडिया को ‘धमकाया’, किसानों पर कीचड़! ‘मामा प्रदूषण मंत्री केपी मलिक’ का कनेक्शन? AQI 300+ Severe, आरामको मिल से काला धुआं कई बार वायरल। @uppcbofficial @CMOfficeUP #MuzaffarnagarPollution #PaperMill #KPMalik pic.twitter.com/nbFB6dtILD
— Amit Kr Saini (@editoramitsaini) December 22, 2025
‘मामा मंत्री हैं’ का खुला राज!
प्रभात ‘आरामको’ पेपर मिल के मालिक हैं और एक पब्लिकेशन भी चलाते हैं। लेकिन सबसे बड़ा कनेक्शन… वह उत्तर प्रदेश के प्रदूषण मंत्री केपी मलिक के ‘भांजे’ लगते हैं। शायद यही वजह है कि 2019 में स्थापित मिल के मालिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे आगे बैठे थे। दिग्गजों को पीछे छोड़कर माइक थामा। यह ‘अकड़’ साफ बता रही है कि ‘मामा मंत्री हैं तो कोई क्या बिगाड़ लेगा?’
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देखें वायरल वीडियोः आरामको पेपर मिल की चिमनी ‘शुद्ध ऑक्सीजन’ छोड़ती हुई
कौन कहता है #मुज़फ़्फ़रनगर में प्रदूषण है? ये भी झूठ है कि ये ज़िला दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की टॉप 20 लिस्ट में शामिल रहा है! इस वीडियो को देखिए- जानसठ रोड के शेरनगर गांव के पास आरामको पेपर्स से कितनी शुद्ध हवा निकल रही है! #Muzaffarnagar @CPCB_OFFICIAL @uppcbofficial pic.twitter.com/PgeOBI30ql
— Amit Kr Saini (@editoramitsaini) September 13, 2025
मिल का काला धुआं, वायरल वीडियो
‘आरामको’ पेपर मिल से निकलता काला धुआं सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में चिमनी से ‘जहरीला धुआं’ उगलता साफ दिख रहा है। बच्चा भी बता दे कि यह सेहत के लिए कितना घातक है। लेकिन प्रभात खुद को पाक-साफ बता रहे हैं। प्रदूषण स्तर आसमान छू रहा है, लोग सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन मिल मालिक मीडिया को ही ‘धमका’ रहे हैं।

किसान संगठनों का पलटवार
भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने तीखा जवाब दिया।
“मामा प्रदूषण मंत्री हैं तो भांजा मुजफ्फरनगर में सभी पेपर मिलों का ठेकेदार बन गया? अगर प्रदूषण इतना बढ़ रहा है तो केपी मलिक को इस्तीफा दे देना चाहिए।” :धर्मेंद्र मलिक, राष्ट्रीय प्रवक्ता, BKU (अराजनीतिक)
किसान संगठन लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन मिल मालिक उन्हें ही ‘डिमांड करने वाला’ बता रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस का असली मकसद
दरअसल, उत्तर प्रदेश पेपर मिल एसोसिएशन के बैनर तले मेरठ रोड पर स्थित फेडरेशन क्लब में कचरा अथवा आरडीएफ जलाने को लेकर सवालों में आई पेपर मिलों को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने संचालन करते हुए सबसे पहले मीडिया को संबोधित किया और पेपर मिल मालिकों की तरफ से पक्ष रखा, लेकिन इसी बीच प्रभात के बर्ताव ने सारा गुड-गोबर कर दिया।
हालांकि एसोसिएशन के अन्य सदस्यों ने बीच-बचाव किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और पूरा वाक्या मीडिया के कैमरों में कैद हो चुका था।
प्रदूषण का खतरनाक स्तर
मुजफ्फरनगर में AQI लगातार खतरनाक स्तर पर है। पेपर मिलों से निकलता धुआं और स्लज मुख्य वजह है। लोग बीमार पड़ रहे हैं। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। लेकिन मिल मालिकों की अकड़ कम नहीं हो रही। ‘मंत्री का रिश्ता’ होने से लगता है कानून की पहुंच यहां कमजोर है।
सवाल जो अनुत्तरित हैं
प्रभात ने प्रमाण मांगे, लेकिन उनकी मिल के वीडियो प्रमाण हैं। धुआं उगलती चिमनी प्रमाण है। क्या मंत्री का रिश्ता मिल को लाइसेंस देता है? पर्यावरण को जहर घोलने का? क्या प्रदूषण विभाग सिर्फ नोटिस थमाकर खानापूर्ति करेगा?
लोगों की उम्मीद टूटी
मुजफ्फरनगर के लोग प्रदूषण से त्रस्त हैं। किसान धरने दे रहे हैं। लेकिन मिल मालिकों का यह रवैया सिस्टम की सड़ांध को उजागर कर रहा है। ‘मामा मंत्री हैं’ की अकड़ कब टूटेगी?




