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तीन महीने से बरसात के पानी में डूबी पड़ी टंकी: मुज़फ़्फ़रनगर के बेहड़ा अस्सा गांव में जल निगम की योजना पर सवाल, सरकारी तालाब में निर्माण के बाद भी नहीं हुआ मिट्टी का भराव

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मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर के जानसठ ब्लॉक के बेहड़ा अस्सा गांव में सरकारी पानी की टंकी का निर्माण सवालों के घेरे में है। लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की जा रही इस टंकी के नीचे पिछले तीन महीने से अधिक समय से बारिश का पानी भरा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बावजूद मौके पर बांस-बल्ली का ढांचा अब तक लगा हुआ है। वहीं, टंकी के आसपास और पिलर की जड़ में जमा पानी की निकासी और जमीन के भराव को लेकर भी किसी भी तरह की गतिविधि नजर नहीं आ रही है।

ग्रामीणों की शिकायत पर मंगलवार सुबह 8 बजे हमारी टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की तो मामला बेहद गंभीर एवं घोर लापरवाही का सामने आया। आरोप है कि निर्माण स्थल पर लंबे समय से पानी भरा होने के बावजूद संबंधित विभाग और ठेकेदार की ओर से समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। परियोजना पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद निर्माण स्थल की स्थिति काम की रफ्तार और निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है।

इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि पानी की टंकी का निर्माण सरकारी जोहड़ यानी तालाब के भीतर किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह तालाब करीब 8 से 10 फीट गहरा है। योजना के तहत टंकी का निर्माण होने के बाद यहां मिट्टी का भराव किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अब तक भराव का काम पूरा नहीं हुआ है। इसके चलते टंकी की जड़ में बारिश का पानी जमा है और निर्माण स्थल की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

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टंकी का निर्माण लगभग पूरा होने के बावजूद आसपास का क्षेत्र व्यवस्थित नहीं किया गया है। मौके पर बांस-बल्ली का ढांचा भी लगा हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निर्माण स्थल पर लंबे समय से पानी जमा है, तो उसे हटाने और प्रस्तावित मिट्टी भराव का काम पूरा करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। ज़ाहिर है कि लंबे समय तक जड़ में पानी भरा होने की वजह से टंकी का बेस कमजोर पड़ सकता है, जिससे भविष्य में हादसा होने की भी संभावना है।

ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं का उद्देश्य लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराना है। लेकिन बेहड़ा अस्सा में निर्माण स्थल की मौजूदा स्थिति परियोजना की प्रगति और उसकी निगरानी को लेकर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि उत्तर प्रदेश जल निगम के संबंधित अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर पानी की निकासी, मिट्टी के भराव और निर्माण कार्य की स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं।

हमारी टीम ने जल निगम के अधिशाषी अभियंता ग्रामीण को कॉल कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उनका CUG नंबर ही स्विच ऑफ मिला।

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