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मुजफ्फरनगर में 26 साल पुराने हत्याकांड में 7 दोषियों को उम्रकैद: पूर्व प्रधान पति समेत सभी पर एक–एक लाख का जुर्माना, न देने पर भुगतनी होगी एक साल अतिरिक्त जेल, चुनावी रंजिश में हुई थी गोलीबारी में मौत

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मुज़फ़्फ़रनगर। करीब 26 साल पहले चुनावी रंजिश में हुई हत्या के मामले में अदालत ने शनिवार दोपहर करीब 2 बजे पूर्व प्रधान पति बसंत समेत सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 की पीठासीन अधिकारी ज्योत्सना सिवाच ने प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर सभी को एक-एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इससे पहले 24 सितंबर को अदालत ने सातों को दोषी करार दिया था, जबकि दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया था।

मामला भोपा थाना क्षेत्र के धीराहेड़ी गांव का है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पंचायत चुनाव को लेकर गांव में दो पक्षों के बीच रंजिश चल रही थी। 20 सितंबर 2000 को जयविंद्र अपने गांव के रूपक और गौतम के साथ जनता इंटर कॉलेज भोपा से छुट्टी के बाद घर लौट रहा था। तीनों गांव में धूम सिंह के मकान के सामने पहुंचे तो आरोपित पक्ष ने रूपक और गौतम को पकड़ लिया। दोनों के साथ मारपीट करने के बाद उन्हें खींचकर मकान के अंदर ले जाने का आरोप था।

जयविंद्र ने घटना की जानकारी अपने परिजनों को दी। इसके बाद धर्मवीर, सत्यपाल, संजीव, सुरेंद्र, लोटन सिंह, विनोद, रविंद्र और धर्मपाल समेत अन्य लोग दोनों युवकों को छुड़ाने के लिए मौके पर पहुंचे। अभियोजन के अनुसार, इसी दौरान आरोपितों ने बंदूक, पिस्टल और तमंचों से फायरिंग कर दी। गोलीबारी में सुरेंद्र, रविंद्र समेत कई लोग घायल हुए।

फायरिंग के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां रविंद्र और सत्यपाल की हालत गंभीर होने पर उन्हें मेरठ रेफर किया गया। मेरठ ले जाते समय रविंद्र की मौत हो गई। इसी घटना को लेकर भोपा थाने में हत्या और फायरिंग समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।

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पुलिस ने विवेचना के बाद 10 आरोपितों के खिलाफ अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने 24 सितंबर को पूर्व प्रधान पति बसंत, अनिल, रविंद्र, नवाब, संजीव, पंकज और प्रीतम को दोषी करार दिया था। वहीं गन्ना सोसायटी के पूर्व चेयरमैन धूम सिंह की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई, जिसके चलते उसकी पत्रावली बंद कर दी गई। उसके पुत्र गुलवीर और ओमवीर को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया था।

अब आज शनिवार को अदालत ने दोषी ठहराए गए सातों आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर प्रत्येक दोषी को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी राजीव शर्मा, एडीजीसी अरुण कुमार और अधिवक्ता अनोद बालियान ने पैरवी की।

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