मुज़फ़्फ़रनगर। खनन विभाग के सरकारी पोर्टल में सेंध लगाकर फर्जी लाइसेंस आईडी बनाने का मामला सामने आया है। इस आईडी से 76 वाहनों के लिए ई-फॉर्म-सी जारी किए गए। इन फॉर्म में करीब 1900 घनमीटर गिट्टी दर्ज की गई थी। खास बात यह है कि विभाग के रिकॉर्ड में इस लाइसेंस की कोई मंजूरी ही नहीं थी।
मामला 21 सितंबर की शाम सामने आया। खनन विभाग के वीटीएस-डीजीएम एप पर मुज़फ़्फ़रनगर से ई-फॉर्म-सी जारी होते दिखाई दिए। अधिकारियों ने जांच की तो पता चला कि जिले में ऐसा कोई भंडारण लाइसेंस स्वीकृत नहीं है। इसके बाद मामले की जानकारी लखनऊ स्थित भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय को दी गई।
जांच में पता चला कि लाइसेंस आईडी 31142603990001 से लगातार ई-फॉर्म-सी जारी किए गए थे। पोर्टल पर लाइसेंसधारी का नाम शाना अहमद पुत्र अनवर और पता अहमदगढ़, मुज़फ़्फ़रनगर दर्ज था। भंडारण स्थल के रूप में खतौली तहसील के अहमदगढ़ गांव की जमीन दिखाई गई थी। खनन विभाग ने अपने रिकॉर्ड देखे तो इस लाइसेंस की कोई स्वीकृति नहीं मिली।
इसके बाद अधिकारियों ने लाइसेंस आईडी को ब्लॉक कर दिया। जांच में सामने आया कि इस आईडी से 76 वाहनों के ई-फॉर्म-सी जारी किए गए थे। इनमें करीब 1900 घनमीटर सैंड स्टोन/क्वार्टजाइट बैलास्ट यानी गिट्टी दर्ज थी।
सोमवार अपराह्न करीब 4 बजे खनन अधिकारी आशुतोष कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि “मुज़फ़्फ़रनगर में गिट्टी का कोई काम है ही नहीं। उन्होंने बताया कि ई-फॉर्म-सी करीब 40 घंटे के लिए वैध होते हैं, लेकिन फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही इन फॉर्म को करीब 20 घंटे के भीतर कैंसिल कर दिया गया।”
खनन अधिकारी की शिकायत के मुताबिक, पहले पोर्टल पर लॉगिन करने के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड के बाद मोबाइल पर ओटीपी आता था। ओटीपी डालने के बाद ही पोर्टल खुलता था। लेकिन कुछ समय से तकनीकी समस्या के कारण ओटीपी नहीं आ रहा था। केवल यूजर आईडी और पासवर्ड डालने पर ही पोर्टल खुल जा रहा था।
विभाग को शक है कि इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर किसी ने खनन अधिकारी की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल किया और फर्जी लाइसेंस आईडी बनाकर ई-फॉर्म-सी जारी कर दिए।
विभाग ने लाइसेंस में दर्ज मोबाइल नंबर पर फोन किया। फोन एक महिला ने उठाया। उसने बताया कि नंबर उसके पति जुनैद के नाम पर है और लाइसेंस के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है।
खनन अधिकारी की तहरीर पर सिविल लाइन थाने में बीएनएस की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66C व 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

