मुजफ़्फ़रनगर के जौली रोड पर रामेश्वरी पेपर मिल की चिमनी से शनिवार शाम काला जहरीला धुआं निकला। NGT के दिल्ली-NCR दिशा-निर्देश और UPPCB के आदेशों की लगातार अनदेखी। पहले भी कई वीडियो वायरल, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं। मुजफ्फरनगर दुनिया के टॉप 20 सबसे प्रदूषित शहरों में (IQAir 2024) में रह चुका है शामिल। इलाके में हवा जहरीली, लोग सांस की बीमारियों से जूझ रहे।

मुजफ़्फ़रनगर। जौली रोड स्थित रामेश्वरी पेपर मिल की चिमनी से एक बार फिर काला धुआं निकलता कैमरे में कैद हुआ है।
शनिवार शाम करीब 6 बजे यह धुआं फैला, जो इलाके की हवा को और जहरीला बना रहा है। मिल से ऐसे धुएं की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण में कोई सुधार नहीं दिख रहा।

NGT नियमों की अनदेखी
मुजफ्फरनगर दिल्ली-NCR क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए NGT के सख्त दिशा-निर्देश यहां लागू होते हैं। UPPCB और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश भी बाध्यकारी हैं।
लेकिन मिल प्रबंधन इनकी अनदेखी कर रहा है। चिमनी से निकलने वाला काला धुआं अधजली कोयला या प्लास्टिक जलाने का संकेत देता है।

पहले के वीडियो वायरल
इससे पहले भी कई बार इस मिल से काले धुएं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। स्थानीय लोग शिकायत करते रहे हैं कि धुआं छतों पर कालिख जमा कर रहा है और सांस लेना मुश्किल हो रहा है।
लेकिन न स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोई सख्त कार्रवाई की, न ही मिल प्रबंधन ने प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए या सुधारे।
ज़िले की प्रदूषण स्थिति
IQAir की 2024 रिपोर्ट में मुजफ्फरनगर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की टॉप 20 में 20वें स्थान पर था (PM2.5 83.1 μg/m³) रह चुका है।

आगे क्या?
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने UPPCB और NGT से तत्काल जांच, मिल सील और पर्यावरण मुआवजे की मांग की है। यदि कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदूषण और बढ़ेगा।
ज़िले में पेपर मिल्स, TPO उद्योग और स्टील प्लांट में बरती जा रही लापरवाही से प्रदूषण बढ़ता है। लोग सांस की बीमारियां, कैंसर जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।



