मुज़फ़्फ़रनगर। 13 वर्षीय नाबालिग किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के आरोप, पीड़ित परिवार पर कथित तौर पर केस वापस लेने का दबाव और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालों के बीच बुधवार को मामला सीधे SSP कार्यालय पहुंच गया। दोपहर करीब एक बजे पीड़ित परिवार की बात सुनने के बाद SSP ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया और सिखेड़ा थाना प्रभारी को फोन पर कड़ी फटकार लगाई।

SSP संजय कुमार वर्मा ने SHO विजय कुमार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मामला सही पाया गया और पुलिस की ओर से किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आई तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई निश्चित तौर पर की जाएगी।
SSP के सख्त रुख के बाद पीड़ित परिवार को पुलिस एस्कॉर्ट गाड़ी में बैठाकर सीधे सिखेड़ा थाने भेजा गया। साथ ही मामले में तत्काल निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
पीड़ित पिता की शिकायत के अनुसार, घटना 16 जुलाई 2026 की अल–सुबह करीब चार बजे सिखेड़ा थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई। आरोप है कि 13 वर्षीय किशोरी पानी भरने के लिए घर से बाहर गई थी। इसी दौरान पड़ोस के दो युवक उसे जबरन उपलों के बिटौड़ा के पास सुनसान स्थान की ओर ले गए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के दौरान किशोरी का मुंह दबाया गया और उसे किसी को घटना बताने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई।
परिवार का कहना है कि किशोरी की तलाश करते हुए उसकी मां और चाची मौके पर पहुंचीं, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग निकले। घटना के बाद जब वे शिकायत लेकर सिखेड़ा थाने पहुंचे तो मामले को उस गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसकी एक नाबालिग पीड़िता के मामले में अपेक्षा थी।
परिवार का कहना है कि कार्रवाई और पीड़िता के बयान दर्ज कराने को लेकर उन्हें परेशान किया गया और लगातार टालमटोल की गई। उनका कहना है कि 31 अगस्त को केस वापस लेने का दबाव बनाने के लिए आरोपी पक्ष से जुड़ी महिलाएं डंडे लेकर उनके घर पहुंचीं और कथित तौर पर मारपीट की।
परिवार का आरोप है कि उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं और केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
SSP कार्यालय पहुंची किशोरी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पीड़िता ने कहा कि उसे पूरा इंसाफ चाहिए। वहीं पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि परिवार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय पुलिस पर भी मदद न करने के गंभीर आरोप लगाए।
SSP ने मामले में देरी न करने और निष्पक्ष तरीके से तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके बाद पीड़ित परिवार को SSP कार्यालय से पुलिस एस्कॉर्ट गाड़ी में बैठाकर सिखेड़ा थाने भेजा गया।
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक 13 वर्षीय पीड़िता और उसके परिवार को कार्रवाई के लिए आखिर SSP कार्यालय तक क्यों पहुंचना पड़ा?
SSP की सीधी चेतावनी के बाद अब सिखेड़ा पुलिस की कार्रवाई पर नजर है। यदि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों में स्थानीय पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।



