मुजफ्फरनगर की अपर गंगा कैनाल (ऊपरी गंगा नहर) के निरगाजनी झाल में लेफ्ट साइड विंग वॉल में बड़ा छेद होने से हड़कंप मच गया। तेज बहाव से पानी पटरी को काटने लगा। सिंचाई विभाग की टीम ने तुरंत पत्थर भरकर हादसा रोका, वरना हरिद्वार-मुरादनगर कांवड़ मार्ग टूट सकता था।
मुजफ्फरनगर। अपर गंगा कैनाल (ऊपरी गंगा नहर) के निरगाजनी झाल में बुधवार सुबह अचानक लेफ्ट साइड विंग वॉल में बड़ा छेद (hole) हो गया। तेज बहाव से आता पानी इस छेद में घुसकर पटरी को काटने लगा।
आसपास के लोग हड़कंप में आ गए – अगर ये पटरी टूट जाती तो हरिद्वार-मुरादनगर जाने वाला महत्वपूर्ण कांवड़ मार्ग बंद हो सकता था।

सिंचाई विभाग की त्वरित कार्रवाई
जैसे ही सूचना अधिशासी अभियंता सुभाष चंद्रा को मिली, वे तुरंत टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अफरा-तफरी मच गई। बड़े-बड़े पत्थर मंगवाए गए और बाहरी साइड से छेद को भर दिया गया।
पत्थरों को इस तरह रखा गया कि पानी का बहाव रुक जाए और पटरी का कटान थम जाए। गनीमत रही कि वक्त रहते कंट्रोल कर लिया गया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

पनचक्की पुल पहले ही टूटा हुआ
गौरतलब है कि निरगाजनी झाल की पनचक्की का पुल पहले ही टूटा हुआ है। इस वजह से आसपास के कई गांवों का संपर्क टूटा हुआ है। लोग परेशान हैं और आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। अब विंग वॉल में छेद होने से स्थिति और गंभीर हो गई थी।
क्यों हुआ ये हादसा?
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नहर पुरानी है और मरम्मत की जरूरत है। तेज बहाव और लगातार पानी के दबाव से विंग वॉल में दरार आ गई।
विभाग ने कहा कि अब जल्द ही पूरी जांच कर मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा ताकि आगे ऐसी घटना न हो।

कांवड़ मार्ग पर खतरा टला
हरिद्वार-मुरादनगर जाने वाला यह मार्ग कांवड़ियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर पटरी टूट जाती तो हजारों श्रद्धालुओं को परेशानी होती। स्थानीय लोगों ने विभाग की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।



