नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी सुधारों का अगला चरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इन सुधारों का मुख्य जोर करदाताओं के लिए नियमों का पालन आसान बनाने, कारोबार में निश्चितता बढ़ाने और अनुपालन की लागत एवं समय को कम करने पर होगा।
वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘लिंक्डइन’ पर साझा किए गए एक लेख में कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों का उद्देश्य एक ओर करदाताओं को राहत देना है, वहीं दूसरी ओर अर्थव्यवस्था की रफ्तार को और तेज करना है। उन्होंने बताया कि जीएसटी दरों में किए गए बदलाव इन सुधारों का पहला चरण थे, जबकि अब प्रक्रिया से जुड़े सुधारों को अगले चरण में आगे बढ़ाया जाएगा।
7 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल के सामने आएगा प्रस्ताव
सीतारमण ने कहा कि प्रक्रिया में सुधार से जुड़ा अगला चरण जल्द ही जीएसटी काउंसिल के सामने रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल जिन प्रस्तावों पर विचार करेगी, उन्हें राज्यों के साथ चर्चा और विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इन प्रस्तावों का प्रमुख उद्देश्य जीएसटी अनुपालन को सरल बनाना तथा कारोबारियों और करदाताओं पर पड़ने वाले समय और लागत के बोझ को कम करना है।
उन्होंने कहा कि एक ऐसा जीएसटी सिस्टम, जो सरल होने के साथ अधिक अनुमान-योग्य भी हो, कारोबारियों के लिए काफी मददगार साबित होगा। खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में काम कर रहे छोटे कारोबारों को इससे अपने व्यवसाय का विस्तार करने और देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान देने का बेहतर अवसर मिलेगा।
सितंबर 2025 में शुरू हुआ था दरों में बदलाव का पहला चरण
वित्त मंत्री के मुताबिक 22 सितंबर 2025 से लागू किए गए जीएसटी दरों में बदलाव अगली पीढ़ी के सुधारों का पहला हिस्सा थे। इसके बाद अब प्रक्रिया से संबंधित सुधारों को दूसरे चरण के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का जोर ऐसे कर तंत्र पर है जिसमें कारोबारियों के लिए नियमों को समझना और उनका पालन करना आसान हो तथा परिवारों को भी कर सुधारों का लाभ मिल सके।
सीतारमण ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य परिवारों को राहत देने के साथ कारोबारों को अधिक निश्चितता उपलब्ध कराना और करदाताओं के लिए अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना आसान बनाना है।
टैक्स-योग्य सप्लाई में 25.8 प्रतिशत की वृद्धि
वित्त मंत्री ने जीएसटी सुधारों के बाद सामने आए आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच रिपोर्ट की गई टैक्स-योग्य सप्लाई की वैल्यू में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 25.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान कुल जीएसटी कलेक्शन 11.6 प्रतिशत बढ़कर 12.46 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। जून से सितंबर के बीच लगातार चार महीनों में जीएसटी कलेक्शन में सालाना आधार पर दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई और इस अवधि में कुल कलेक्शन में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
नेट जीएसटी कलेक्शन में भी बढ़ोतरी
सीतारमण के अनुसार, वित्त वर्ष की पहली छमाही में रिफंड के बाद नेट जीएसटी कलेक्शन में 10.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं सुधारों के बाद की अवधि में उपभोक्ता बिक्री यानी बी2सी सप्लाई में 26.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने बताया कि अगस्त के अंत तक जीएसटी रजिस्ट्रेशन की संख्या करीब 1.71 करोड़ पहुंच गई थी, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। इससे कारोबार और कर आधार के विस्तार का संकेत मिलता है।
अप्रैल-सितंबर में 1.80 लाख करोड़ रुपये का रिफंड
वित्त मंत्री ने कहा कि अप्रैल से सितंबर के बीच करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कारोबारियों के लिए रिफंड की प्रक्रिया में अधिक अनुमान-योग्यता होना जरूरी है, ताकि कंपनियां अपनी वित्तीय योजना और नकदी प्रवाह को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि अप्रैल से सितंबर के दौरान राज्यों की कुल एसजीएसटी प्राप्तियों में करीब 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसमें आईजीएसटी सेटलमेंट में राज्यों को मिलने वाला हिस्सा भी शामिल है।
सरल व्यवस्था से छोटे कारोबारों को मिलेगा फायदा
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास ऐसा जीएसटी ढांचा तैयार करना है जो करदाताओं के लिए कम जटिल हो और जिसमें अनुपालन से जुड़ी अनिश्चितताएं कम हों। उन्होंने कहा कि जब नियमों का पालन करने में कम समय और लागत लगेगी, तो कारोबारियों को अपने व्यवसाय पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित प्रक्रिया सुधारों के लागू होने से कंपनियों के लिए विस्तार करना आसान होगा। इसका लाभ विशेष रूप से छोटे और मध्यम कारोबारों के साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों में उभर रहे व्यवसायों को मिल सकता है। सरकार के मुताबिक, सरल और अनुमान-योग्य जीएसटी व्यवस्था भारत की आर्थिक वृद्धि को और गति देने तथा ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक होगी।
