लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की भगवान राम के दर्शन को लेकर की गई टिप्पणी पर पलटवार किया है। राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि भगवान राम उन्हें इस जन्म में नहीं बुलाएंगे और वह अगले जन्म में अयोध्या जाएंगे। राजभर ने 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों, शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
भगवान राम के दर्शन से जुड़े अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “भगवान राम अखिलेश को इस जन्म में तो नहीं बुलाएंगे। अखिलेश अगले जन्म में अयोध्या जाएंगे।”
शिवपाल और धर्मेंद्र यादव को लेकर भी निशाना
ओपी प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी कार्यालय में प्रवेश के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी अनुमति की जरूरत पड़ती है।
राजभर ने अपने पोस्ट में शिवपाल यादव के समाजवादी पार्टी के गठन और संगठन को मजबूत करने में उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन पार्टी खड़ी करने में शिवपाल की भूमिका रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर शिवपाल को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
धर्मेंद्र यादव को लेकर भी राजभर ने इसी तरह की टिप्पणी की और कहा कि यदि परिवार के नेताओं की ऐसी स्थिति है तो अन्य नेताओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
68,500 शिक्षक भर्ती पर क्या बोले राजभर
68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के मुद्दे पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उन्होंने अभ्यर्थियों से बातचीत की है और भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों की वजह से कुछ गड़बड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों ने उनसे चार बार मुलाकात की और हर बार कार्रवाई की गई।
राजभर के मुताबिक, अंतिम निर्णय को लेकर माध्यमिक शिक्षा मंत्री, बेसिक शिक्षा मंत्री और दोनों विभागों के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इसके बाद यह बात सामने आई कि भर्ती प्रक्रिया को सात वर्ष बीत चुके हैं और अब इस मामले में मुख्यमंत्री स्तर से निर्णय लिया जाना है।
राजभर ने कहा कि अभ्यर्थियों से संबंधित पेपर उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके बाद मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे मामले को उनके सामने रखा जाएगा।
गौरतलब है कि 28 सितंबर को 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने लखनऊ में राजभर के आवास के बाहर प्रदर्शन किया था। अभ्यर्थी अपनी लंबित मांगों के समाधान की मांग कर रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजा था।
भगवान राम और शिव को लेकर रेवंत रेड्डी के बयान पर प्रतिक्रिया
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ओर से भगवान राम और भगवान शिव को लेकर दिए गए बयान पर भी राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग समय पर विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा होती है।
राजभर ने कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी और रामनवमी का उदाहरण देते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा में भगवान शिव को जल चढ़ाया जाता है, जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा होती है और रामनवमी पर भगवान राम की पूजा की जाती है। उन्होंने रेवंत रेड्डी के कथन को गलत बताया।
सपा को गिरगिट कहे जाने पर बोले राजभर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से समाजवादी पार्टी को गिरगिट कहे जाने पर भी ओपी प्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सपा के लोग समय-समय पर अपना रंग बदलते हैं और इसीलिए गिरगिट की उपमा दी गई है।
राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उन्हें पता है कि वे जीत नहीं रहे हैं। यह राजभर का राजनीतिक दावा है, जिसे उन्होंने अपने बयान के दौरान रखा।
मायावती के चंद्रशेखर वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के उस बयान पर भी राजभर ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने चंद्रशेखर आजाद पर नगीना लोकसभा चुनाव धांधली के जरिए जीतने का आरोप लगाया था।
राजभर ने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने चंद्रशेखर आजाद का समर्थन किया था और उनके अनुसार यही जीत का कारण बना। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर अब कोई भी अपनी राय रख सकता है।
SIR और CEC के इस्तीफे पर राजभर का बयान
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़े सवाल पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि CEC को इस्तीफा क्यों देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है और 1952 से समय-समय पर इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है।
राजभर ने कहा कि SIR के जरिए मृत मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि मृतकों के नाम हटने से फर्जी मतदान की संभावना खत्म होगी।
उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए 16 हजार मृतकों और 23 हजार स्थानांतरित मतदाताओं के नाम मिलने का दावा किया। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उनके बयान से अलग उपलब्ध स्रोत में नहीं मिली है।
SIR को लेकर फिलहाल राजनीतिक विवाद जारी है। निर्वाचन आयोग ने हाल में कहा है कि SIR से जुड़े फैसले आयोग के सदस्यों की सहमति से लिए गए थे, जबकि विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
राजभर ने इससे पहले भी SIR को लेकर कहा था कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए और यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग को दी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाने वालों से प्रमाण देने की बात भी कही थी।

