नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश या अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले तिथि, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति का विचार किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों की स्थिति के आधार पर हिंदू कालगणना की जानकारी प्रदान करता है।
30 सितंबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 2 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ होगा। बुधवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 11 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 8 बजकर 44 मिनट पर और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 10 बजकर 53 मिनट पर होगा।
हस्त नक्षत्र में रहेंगे सूर्य
पंचांग के अनुसार 30 सितंबर को सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में हस्त नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में 13वां स्थान प्राप्त है। इसका संबंध हाथ से माना जाता है। हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जबकि इसकी राशि कन्या है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार हस्त नक्षत्र में सूर्य की स्थिति का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ सकता है। हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा का सूर्य के साथ मित्रवत संबंध माना जाता है। ऐसे में इस अवधि को कार्यकुशलता, व्यवहारिकता और योजनाबद्ध तरीके से काम करने से जोड़कर देखा जाता है।
हर्षण योग में बन रहा शुभ संयोग
30 सितंबर को हर्षण योग का भी संयोग रहेगा। पंचांग के अनुसार हर्षण योग सुबह 6 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर अगले दिन तड़के 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। वैदिक ज्योतिष में हर्षण को 27 नित्य योगों में 14वां योग माना जाता है।
हर्षण शब्द का अर्थ खुशी, प्रसन्नता और आनंद से जुड़ा हुआ है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस योग को सकारात्मक और शुभ माना जाता है। विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, उत्सव तथा नए व्यापार की शुरुआत जैसे कार्यों के लिए इसे अनुकूल माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त में बनेंगे शुभ कार्य
इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। हिंदू पंचांग में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में शामिल किया जाता है।
मान्यता है कि इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों के लिए सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। अभिजीत मुहूर्त सामान्य तौर पर करीब 48 मिनट का होता है और इसकी गणना दिनमान के आधार पर की जाती है।
तड़के रहेगा अमृत काल
बुधवार को अमृत काल तड़के 3 बजकर 46 मिनट से सुबह 5 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृत काल को शुभ और मंगलकारी समय माना जाता है। इस अवधि को पूजा-पाठ, महत्वपूर्ण कार्यों, निवेश, व्यापार से जुड़े निर्णय और यात्रा जैसे कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
दोपहर में रहेगा राहुकाल
30 सितंबर को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 16 मिनट से 1 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। हालांकि इस दौरान पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखने पर कोई रोक नहीं मानी जाती है।
राहुकाल की अवधि स्थान के अनुसार बदल सकती है, क्योंकि इसकी गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर की जाती है।
गुलिक काल में नए काम से बचने की मान्यता
बुधवार को गुलिक काल सुबह 10 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में गुलिक काल को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। हालांकि पहले से चल रहे कार्यों को इस दौरान जारी रखा जा सकता है।
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में बार-बार किए जाने वाले कार्यों, दान तथा कुछ वित्तीय गतिविधियों के लिए इस समय को अलग तरीके से देखा जाता है।
सुबह यमगंड काल का रहेगा प्रभाव
यमगंड काल सुबह 7 बजकर 50 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। पंचांग परंपरा में इस अवधि को नए कार्यों की शुरुआत और यात्रा के लिए अशुभ माना जाता है। इसलिए शुभ कार्य शुरू करने वाले लोग इस समय को छोड़कर अन्य मुहूर्त का चयन करते हैं।
कन्या राशि में रहेंगे सूर्य
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिष में कन्या राशि को व्यवहारिकता, विश्लेषण और योजनाबद्ध कार्यप्रणाली से जोड़ा जाता है। सूर्य की इस स्थिति को लेकर मान्यता है कि व्यक्ति को कामकाज में व्यवस्थित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा मिल सकती है।
मेष राशि में रहेंगे चंद्रमा
30 सितंबर को चंद्रमा मेष राशि में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में मेष राशि का स्वामी मंगल माना जाता है, जबकि चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मेष राशि में चंद्रमा की स्थिति ऊर्जा, साहस और उत्साह से जुड़ी हो सकती है। हालांकि मन की चंचलता के कारण भावनाओं में उतार-चढ़ाव की स्थिति भी बन सकती है।
उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल
बुधवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपरा में दिशाशूल का संबंध किसी विशेष दिन यात्रा के लिए प्रतिकूल मानी जाने वाली दिशा से है। बुधवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल माना जाता है, इसलिए मान्यता के अनुसार इस दिशा में यात्रा करने से बचने या आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
30 सितंबर का पंचांग एक नजर में
तिथि आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी दोपहर 2 बजकर 55 मिनट तक, इसके बाद पंचमी
सूर्योदय सुबह 6 बजकर 21 मिनट
सूर्यास्त शाम 6 बजकर 11 मिनट
चंद्रोदय रात 8 बजकर 44 मिनट
चंद्रास्त अगले दिन सुबह 10 बजकर 53 मिनट
नक्षत्र हस्त
योग हर्षण
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट
अमृत काल तड़के 3 बजकर 46 मिनट से सुबह 5 बजकर 16 मिनट
राहुकाल दोपहर 12 बजकर 16 मिनट से 1 बजकर 45 मिनट
गुलिक काल सुबह 10 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 16 मिनट
यमगंड काल सुबह 7 बजकर 50 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट
दिशाशूल उत्तर दिशा
सूर्य राशि कन्या
चंद्र राशि मेष

