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स्वतंत्रता दिवस: पीएम मोदी ने लाल किले से लगातार 13वीं बार देश को किया संबोधित, बनाया रिकॉर्ड

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के ऐतिहासिक लालकिले पर भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया। तिरंगा फहराने के बाद प्रधानमंत्री ने लालकिले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार देश को संबोधित किया। इसके साथ ही उन्होंने गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों के बीच लगातार स्वतंत्रता दिवस संबोधन का नया रिकॉर्ड बनाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 में सत्ता संभालने के बाद से लगातार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित करते आ रहे हैं। इस वर्ष उनका लगातार 13वां संबोधन रहा, जिसने उनके नाम एक और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज कर दिया।

13वीं बार लालकिले से संबोधन, लगातार बढ़ता गया रिकॉर्ड

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने पहले लालकिले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद उन्होंने देश को संबोधित किया। लगातार 13वीं बार लालकिले से स्वतंत्रता दिवस भाषण देने के साथ प्रधानमंत्री मोदी गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों में इस मामले में सबसे आगे निकल गए हैं।

प्रधानमंत्री का यह संबोधन देश की अब तक की विकास यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की प्राथमिकताओं पर केंद्रित रहा। भाषण में भारत के आगामी लक्ष्यों और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के विजन को भी प्रमुखता दी गई।

‘वंदे मातरम’ की 150 साल पुरानी विरासत को सलामी

इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस समारोह की सबसे खास बातों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150 साल पुरानी विरासत का उत्सव भी शामिल रहा।

लालकिले पर आयोजित समारोह में पहली बार बड़ी संख्या में लोगों ने एक साथ ‘वंदे मातरम’ का गायन किया। राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति में एनसीसी कैडेट और ‘माई भारत’ के स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।

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‘वंदे मातरम’ की सामूहिक प्रस्तुति ने समारोह में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूत किया।

तिरंगा फहराने के साथ 21 तोपों की सलामी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लालकिले पहुंचने के बाद स्वतंत्रता दिवस समारोह की औपचारिक शुरुआत हुई। राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के साथ ही 21 तोपों की सलामी दी गई।

समारोह के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की गई। लालकिले की प्राचीर, तिरंगा और आसमान से बरसते फूलों ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को भव्य और यादगार बना दिया।

‘युवा शक्ति’ पर रहा खास जोर

इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश की युवा शक्ति को विशेष महत्व दिया गया। भारत की युवा आबादी को देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया गया।

समारोह में युवाओं की ऊर्जा, उम्मीदों और योगदान को भारत के भविष्य से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। संदेश साफ रहा कि आने वाले वर्षों में देश की प्रगति में युवा शक्ति की भूमिका निर्णायक होगी।

‘विकसित भारत 2047’ के विजन से जुड़ा समारोह

80वें स्वतंत्रता दिवस का समारोह केवल आजादी के गौरव को याद करने तक सीमित नहीं रहा। इसे भारत के भविष्य के दीर्घकालिक विजन से भी जोड़ा गया।

‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक विरासत, युवा शक्ति और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना ने समारोह को अतीत और भविष्य के बीच जोड़ने का काम किया।

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में देश की उपलब्धियों के साथ आने वाले वर्षों की चुनौतियों और लक्ष्यों पर भी जोर रहा।

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लालकिले से इतिहास और भविष्य का संदेश

80वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से लगातार 13वीं बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन अपने आप में एक रिकॉर्ड बन गया। इसके साथ ही ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ और युवा शक्ति पर विशेष जोर ने इस समारोह को और खास बना दिया।

लालकिले की प्राचीर से गूंजा संदेश देश की आजादी के संघर्ष की विरासत को याद करते हुए भारत के भविष्य की दिशा की ओर भी संकेत करता रहा। 13वें लगातार संबोधन के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के इतिहास में अपने नाम एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज कराई।

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