नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में पावर की भागदौड़ के बीच भारत एक अलग मिजाज लेकर चल रहा है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के मौजूदा दशक में दुनिया ने महामारी, विभिन्न देशों के बीच युद्ध और व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों तथा ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं जैसी कई चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे हालात में भारत तकनीक, ऊर्जा परिवर्तन, आर्थिक सुधारों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ने की दिशा में काम कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया एक संकट से उबरने का रास्ता तलाशती है, तब तक एक नया संकट सामने आ जाता है। उनके मुताबिक, जिन चीजों ने पहले दुनिया को आपस में जोड़ा था, वे अब दबाव और दबदबे के माध्यम के रूप में इस्तेमाल हो रही हैं। सप्लाई चेन, ऊर्जा, खनिज, भुगतान व्यवस्था और तकनीक जैसे क्षेत्र भी इस बदलाव से प्रभावित हो रहे हैं।
तकनीक से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे खातों तक
प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी योजनाओं में तकनीक के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने लाभार्थियों के बैंक खातों तक सीधे सरकारी सहायता पहुंचाने की व्यवस्था बनाई है। उनके अनुसार, इससे भ्रष्टाचार कम करने, नागरिकों की सुविधाएं बढ़ाने और सरकार तथा लोगों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में चार गुना वृद्धि का दावा
प्रधानमंत्री ने भारत में ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 75 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर करीब 300 गीगावाट तक पहुंच गई है। उन्होंने इसे लगभग चार गुना वृद्धि बताते हुए कहा कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन नए अवसर भी पैदा कर रहा है।
मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, बिग कैट एलायंस, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने मिशन लाइफ यानी पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने की पहल का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, इन पहलों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और पर्यावरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक लाभ सुनिश्चित करना है।
700 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार का उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है। उन्होंने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बताते हुए कहा कि इसी मजबूती के परिणामस्वरूप भारत की सॉवरेन रेटिंग में भी सुधार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए कर व्यवस्था के जटिल ढांचे को एक राष्ट्रीय बाजार में बदलने की दिशा में काम किया गया है।
दिवालियापन कानून और श्रम सुधारों का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने कारोबार को आसान बनाने के लिए किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में दिवालियापन कानून बनाया गया है और 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समाहित किया गया है। उन्होंने कारोबार से जुड़ी छोटी-मोटी प्रक्रियागत समस्याओं को आसान बनाने के लिए उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया।
मोदी ने कहा कि भारत में सुधारों की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। उनके शब्दों में, “हमारे लिए सुधार कोई मजबूरी नहीं हैं, बल्कि सुधार हमारा संकल्प हैं।”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक नीतियों, तकनीकी पहलों, ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि देश स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ सुधारों को आगे बढ़ा रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम कर रहा है।

