देहरादून। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों के साथ संवाद करते हुए केंद्र सरकार और मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में पेपर लीक अब एक सामान्य घटना बन गई है और यह केवल कुछ लोगों की गलती नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया है।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था सरकार-केंद्रित हो गई है, जबकि समय की मांग है कि इसे पूरी तरह छात्र-केंद्रित बनाया जाए। उनका कहना था कि शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य छात्रों को अवसर और सुरक्षा देना होना चाहिए, लेकिन आज मेहनत करने वाले युवाओं का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।
उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एक छात्र किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए करीब पांच वर्षों तक प्रतिदिन दस घंटे मेहनत करता है। इस दौरान उसके परिवार का औसतन नौ लाख रुपये तक खर्च हो जाता है। इसके बावजूद यदि परीक्षा का पेपर लीक हो जाए तो छात्र की वर्षों की मेहनत और परिवार का आर्थिक निवेश दोनों व्यर्थ हो जाते हैं।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल
राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे लगभग साढ़े सात करोड़ युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में अब सीटों और नौकरियों का एक तरह से “रेट कार्ड” बन गया है, जिससे ईमानदार और मेहनती छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है।
उन्होंने कहा कि छात्रों के सामने आज दो रास्ते हैं। पहला रास्ता ईमानदारी, मेहनत और संघर्ष का है, जिसमें वर्षों तक कठिन परिश्रम करना पड़ता है। इस दौरान आर्थिक बोझ, पारिवारिक अपेक्षाएं और उम्र सीमा जैसी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। दूसरा रास्ता भ्रष्टाचार और पेपर लीक का है, जहां पैसा और गलत तरीके अपनाकर कुछ लोग सफलता हासिल करने की कोशिश करते हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक का यह रास्ता उन लोगों के लिए है जो ईमानदारी में विश्वास नहीं रखते और व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। उन्होंने कहा कि देश के 99.9 प्रतिशत छात्र मेहनत और ईमानदारी का रास्ता चुनते हैं, लेकिन कुछ लोगों के कारण पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो जाते हैं और लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन मामलों में दोष सिद्ध होने की दर लगभग शून्य है। उनके अनुसार आज तक किसी भी बड़े मामले में किसी दोषी को प्रभावी सजा नहीं मिली है, जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि देश को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप ऐसी परीक्षा और भर्ती व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो पूरी तरह स्वतंत्र, पारदर्शी और जवाबदेह हो। उन्होंने कहा कि छात्रों को यह भरोसा मिलना चाहिए कि उनकी मेहनत का सम्मान होगा और उनकी सफलता केवल उनकी योग्यता के आधार पर तय होगी, न कि भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसी घटनाओं से प्रभावित होगी।



