प्रयागराज। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रयागराज में छात्रों के बीच पहुंचे। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं से रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, शिक्षा, डेटा और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संवाद किया। राहुल गांधी ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में युवाओं की बड़ी आबादी होने के बावजूद उनके सामने रोजगार का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है।
राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित करते हुए दावा किया कि भारत में हर एक हजार युवाओं में से केवल 12 युवाओं को ही पक्की नौकरी मिल पाती है। उन्होंने कहा कि परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। युवा डिग्री हासिल करते हैं, लेकिन डिग्री मिलने के बाद भी रोजगार की कोई गारंटी नहीं होती। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती दूरी युवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
प्रयागराज से परिवार का रिश्ता, शहर को बताया ज्ञान का केंद्र
कार्यक्रम की शुरुआत में राहुल गांधी ने प्रयागराज से अपने पारिवारिक जुड़ाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार प्रयागराज में रहा है और यहां आकर उन्हें हमेशा खुशी होती है। उन्होंने प्रयागराज को ज्ञान और शिक्षा का केंद्र बताते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पुरानी प्रतिष्ठा का भी उल्लेख किया।
राहुल गांधी ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय कभी देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में गिना जाता था। उनके मुताबिक प्रयागराज की पहचान केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, शिक्षा और बौद्धिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में रही है। उन्होंने कहा कि इस पुरानी पहचान को फिर से मजबूत करने की जरूरत है।
‘भारत के पास युवा भी हैं और डेटा भी’
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में युवाओं और डेटा को 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 40 करोड़ युवा हैं और यही देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया चीन, अमेरिका और रूस की ताकत की चर्चा करती है, लेकिन भारत के युवाओं की क्षमता को भी उसी गंभीरता से देखे जाने की जरूरत है।
राहुल गांधी ने कहा कि आने वाले समय में किसी भी देश की तरक्की उसकी युवा आबादी की क्षमता और डेटा के इस्तेमाल पर निर्भर करेगी। उन्होंने दावा किया कि भारत में बड़ी संख्या में लोग इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं और भारतीय नागरिकों से तैयार होने वाला डेटा आने वाली अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि युवाओं की क्षमता और डेटा मिलकर 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था को आकार दे सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि इस डेटा और युवाओं की क्षमता का फायदा किसे मिल रहा है।
‘डेटा आपका, दर्द आपका और दौलत इनकी’
राहुल गांधी ने छात्रों के सामने डेटा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों का डेटा बड़ी कंपनियों तक पहुंच रहा है और इसका आर्थिक फायदा कंपनियों को हो रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास उनकी मेहनत और उनकी प्रतिभा है, लेकिन उस प्रतिभा से पैदा होने वाली आर्थिक ताकत का लाभ उन्हें पर्याप्त रूप से नहीं मिल रहा।
राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को लगातार सोशल मीडिया पर रील और कंटेंट बनाने की तरफ धकेला जा रहा है। उन्होंने रील देखने और बनाने की आदत को 21वीं सदी का एक तरह का नशा बताया। उनके मुताबिक सोशल मीडिया पर समय बिताने से युवाओं का ध्यान रोजगार और वास्तविक आर्थिक अवसरों से भटक सकता है।
रोजगार के सवाल पर सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने रोजगार के मुद्दे को अपने संबोधन का प्रमुख विषय बनाया। उन्होंने कहा कि देश का युवा पढ़ाई करता है, परिवार उसकी शिक्षा पर पैसा खर्च करता है और इसके बाद उसे डिग्री मिलती है। लेकिन डिग्री मिलने के बाद रोजगार का रास्ता आसान नहीं होता।
उन्होंने दावा किया कि एक हजार युवाओं में केवल 12 युवाओं को ही स्थायी नौकरी मिलती है। राहुल गांधी ने कहा कि रोजगार के अवसरों की कमी केवल युवाओं की व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
उन्होंने भारत में विनिर्माण क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में पर्याप्त संख्या में रोजगार पैदा करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत नहीं किया गया। उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी के फैसलों का भी जिक्र करते हुए दावा किया कि इनका असर छोटे कारोबारियों और रोजगार के अवसरों पर पड़ा।
‘मेड इन इंडिया’ पर भी उठाया सवाल
राहुल गांधी ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र की तुलना चीन और वियतनाम से करते हुए कहा कि दुनिया के बाजारों में मेड इन चाइना और मेड इन वियतनाम के उत्पाद बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं, लेकिन मेड इन इंडिया को अभी वह मजबूती हासिल नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि भारत की विशाल युवा आबादी को रोजगार देने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन और विनिर्माण को बढ़ावा देना जरूरी है। उनके मुताबिक यदि युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप रोजगार नहीं मिलता है तो देश की युवा शक्ति का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।
छात्रों ने सुनाई भर्ती परीक्षाओं की पीड़ा
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने भी राहुल गांधी के सामने अपनी समस्याएं रखीं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम, सामान्यीकरण और कथित पेपर लीक जैसे मुद्दे उठाए।
एक छात्र ने उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में हुई विभिन्न भर्ती परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि लगातार परीक्षाओं को लेकर विवाद और सवाल सामने आते रहे हैं। छात्र ने 2017 की दरोगा भर्ती परीक्षा, 2018 की यूपी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा, 2020 और 2021 की यूपी एसआई भर्ती परीक्षा, 2022 की लेखपाल भर्ती परीक्षा और 2023 की यूपी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का उल्लेख किया।
छात्रों का कहना था कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की वजह से युवाओं को बार बार परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है। इसके बाद परीक्षा, परिणाम और आंदोलन का सिलसिला चलता रहता है।
शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे छात्र ने बताया अपना संघर्ष
कार्यक्रम में अविनाश नाम के एक छात्र ने राहुल गांधी को अपनी परेशानी बताई। उसने कहा कि वह वर्ष 2018 से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहा है, लेकिन अभी तक उसे नियुक्ति नहीं मिली है। छात्र के मुताबिक पद खाली होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
एक अन्य छात्र ने रोजगार न मिलने की पीड़ा बताते हुए बेहद भावुक बात कही। उसने कहा कि उसके सामने चाय की दुकान खोलने या आत्महत्या करने जैसे विकल्प दिखाई दे रहे हैं। राहुल गांधी ने तुरंत उसे आत्महत्या से दूर रहने की बात कही और कहा कि आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है।
छात्र ने बताया कि उसने बीएड की पढ़ाई के लिए अपनी जमीन तक बेच दी है और अब नौकरी की तलाश कर रहा है। इस दौरान कार्यक्रम में छात्रों की व्यक्तिगत परेशानियों और परिवारों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव की तस्वीर भी सामने आई।
बिहार से आई छात्रा ने प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया
कार्यक्रम में बिहार से आई एक छात्रा ने प्रतियोगी छात्रों के आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। एक अन्य छात्र ने पटना में प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का जिक्र किया।
छात्रों ने कहा कि नौकरी, परीक्षा और परिणाम से जुड़े सवालों को लेकर युवा लगातार आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं। उनका कहना था कि परीक्षा की तैयारी में वर्षों लगाने के बाद भी भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होने से छात्रों के सामने आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
राहुल गांधी ने छात्रों से कहा कि वे खुलकर अपनी बात रखें। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से बोलना शुरू किया था, तब वह भी नर्वस होते थे। लेकिन प्रयागराज में छात्रों ने जिस तरह अपने घर की तरह खुलकर अपनी बात रखी, वह महत्वपूर्ण है।
‘आप भारत की शक्ति हो, आप भारत की शान हो’
राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के युवा भारत की शक्ति और शान हैं। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनकी क्षमता का इस्तेमाल देश के निर्माण में किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अच्छी शिक्षा, रोजगार और अवसर मिलने चाहिए। यदि युवा अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे तो देश की आर्थिक क्षमता भी प्रभावित होगी।
निजीकरण और सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर सरकार पर आरोप
राहुल गांधी ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और हवाई अड्डों के निजीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की कई महत्वपूर्ण संपत्तियां निजी हाथों में दी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं केवल आर्थिक संपत्ति नहीं हैं, बल्कि देश के विकास और रोजगार के महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। राहुल गांधी ने निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर सरकार से सवाल पूछे और कहा कि इसका असर रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है।
संस्थानों में आरएसएस के प्रभाव का लगाया आरोप
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में संस्थागत व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों से लेकर नौकरशाही और दूसरे संस्थानों तक एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों को महत्वपूर्ण स्थानों पर बैठाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश की राजनीतिक और संस्थागत व्यवस्था पर एक विशेष प्रकार का नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
राजनीतिक चंदे और सत्ता के प्रभाव पर भी सवाल
राहुल गांधी ने राजनीतिक चंदे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक राजनीतिक पार्टी का बैंक बैलेंस पहले करीब 150 करोड़ रुपये था और अब वह हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने राजनीतिक व्यवस्था में धन के बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक और आर्थिक ताकत के जरिए लोगों की सोच और उनके विकल्पों को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य में लोगों की पसंद और उनके सामने आने वाले अवसरों को प्रभावित करने में डेटा की बड़ी भूमिका हो सकती है।
युवाओं के रोजगार का सवाल बना कार्यक्रम का केंद्र
प्रयागराज में राहुल गांधी का यह कार्यक्रम मुख्य रूप से युवाओं और रोजगार के सवालों पर केंद्रित रहा। राहुल गांधी ने जहां बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक को लेकर सरकार पर हमला बोला, वहीं छात्रों ने अपने संघर्ष और व्यक्तिगत परेशानियों को उनके सामने रखा।
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने बार बार इस बात पर जोर दिया कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है। उनके मुताबिक यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो यही युवा भारत की आर्थिक और सामाजिक शक्ति को नई दिशा दे सकते हैं।
प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी ने रोजगार और भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की। वहीं छात्रों की ओर से सामने आई समस्याओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार की तलाश में वर्षों से संघर्ष कर रहे युवाओं की चुनौतियों को भी उजागर किया।



