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संतान सप्तमी पर शिव-पार्वती की पूजा रहेगी विशेष, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, धार्मिक अनुष्ठान, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ से पहले तिथि, नक्षत्र, योग और मुहूर्त का विचार करने की परंपरा रही है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की धार्मिक एवं ज्योतिषीय गणना प्रस्तुत करता है।

18 सितंबर 2026, शुक्रवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर तक रहेगी और इसके बाद अष्टमी तिथि का आरंभ होगा। इस दिन संतान सप्तमी का व्रत रखा जाएगा। संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की धार्मिक मान्यता है। शुक्रवार होने के कारण मां संतोषी की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा।

संतान सप्तमी पर शिव-पार्वती की आराधना, संतान के लिए मंगलकामना का दिन

संतान सप्तमी को संतान के कल्याण और परिवार की सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से संतान के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना पूरी होती है। श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन कर सकते हैं।

शुक्रवार का दिन मां संतोषी की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार मां संतोषी की पूजा और व्रत भी कर सकते हैं।

दोपहर बाद बदलेगी तिथि, सप्तमी के बाद शुरू होगी अष्टमी

पंचांग के अनुसार 18 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। धार्मिक कार्यों में तिथि का विशेष महत्व होने के कारण व्रत और पूजा से जुड़े लोग पंचांग के अनुसार समय का ध्यान रख सकते हैं।

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इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 24 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय दोपहर 12 बजकर 42 मिनट पर और चंद्रास्त रात 11 बजकर 18 मिनट पर होगा।

प्रीति योग के बाद आयुष्मान योग का प्रभाव

पंचांग के अनुसार शुक्रवार को प्रीति योग दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग शुरू होगा। धार्मिक मान्यताओं में इन योगों का अलग-अलग महत्व बताया गया है और शुभ कार्यों के लिए पंचांग में बताए गए अनुकूल समय का विचार किया जाता है।

सूर्य इस दिन हस्त नक्षत्र में स्थित रहेगा। ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर पंचांग में दिन के अलग-अलग मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं।

अभिजीत मुहूर्त में शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय

18 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। धार्मिक परंपराओं में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में शामिल किया जाता है। इस दौरान अपनी आवश्यकता और स्थानीय पंचांग की गणना के अनुसार शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

वहीं अमृत काल दोपहर 12 बजकर 53 मिनट से 2 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का चयन करते समय तिथि, नक्षत्र और अन्य पंचांग तत्वों को भी ध्यान में रखने की परंपरा है।

राहुकाल और अन्य अशुभ माने जाने वाले समय

शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 7 बजकर 48 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा।

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यमगंड काल दोपहर 3 बजकर 22 मिनट से शाम 4 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि नियमित पूजा-पाठ और पहले से निर्धारित धार्मिक कार्यों को लेकर अलग-अलग परंपराओं में अलग मान्यताएं हो सकती हैं।

कन्या राशि में सूर्य और धनु राशि में चंद्रमा

पंचांग के अनुसार 18 सितंबर को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनु राशि में रहेगा। ग्रहों की यह स्थिति दैनिक पंचांग और ज्योतिषीय गणना का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

दिन में पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार दिशाशूल वाले दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारण से यात्रा करना आवश्यक हो, तो मान्यता के अनुसार संबंधित ज्योतिषीय उपाय अपनाकर यात्रा शुरू की जा सकती है।

दिनभर के प्रमुख पंचांग समय एक नजर में

18 सितंबर को सप्तमी तिथि दोपहर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगी और इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 24 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 12 बजकर 42 मिनट पर तथा चंद्रास्त रात 11 बजकर 18 मिनट पर होगा।

अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। अमृत काल दोपहर 12 बजकर 53 मिनट से 2 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। राहुकाल सुबह 10 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 21 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 7 बजकर 48 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक और यमगंड काल दोपहर 3 बजकर 22 मिनट से शाम 4 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

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धार्मिक कार्यों के लिए समय निर्धारित करते समय स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार समय में होने वाले अंतर को भी ध्यान में रखना उचित माना जाता है।

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