Home » उत्तर प्रदेश » मुजफ्फरनगर पोस्ट » शाहपुर पैठ मैदान की जमीन पर 51 साल बाद आर्य परिवार जीता: अदालत ने 2017 का फैसला पलटा, टाउन एरिया कमेटी शाहपुर का 1975 में दायर मूल वाद खारिज

शाहपुर पैठ मैदान की जमीन पर 51 साल बाद आर्य परिवार जीता: अदालत ने 2017 का फैसला पलटा, टाउन एरिया कमेटी शाहपुर का 1975 में दायर मूल वाद खारिज

Facebook
Twitter
WhatsApp

मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर के शाहपुर स्थित ऐतिहासिक पैठ मैदान की जमीन को लेकर करीब 51 साल से चल रही कानूनी लड़ाई में सत्यबीर आर्य और अन्य को बड़ी राहत मिली है। अपर जिला जज एवं त्वरित न्यायालय, कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने आर्य पक्ष की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत का फैसला निरस्त कर दिया। अदालत ने टाउन एरिया कमेटी शाहपुर की ओर से 1975 में दायर मूल मुकदमे को भी खारिज कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, विवाद की शुरुआत वर्ष 1975 में हुई थी, जब टाउन एरिया कमेटी शाहपुर ने अदालत में मुकदमा दायर कर विवादित जमीन पर अपना अधिकार जताया था। कमेटी ने 19 अगस्त 1963 को मेहर इलाही खां और अता इलाही की ओर से इलमचंद आर्य आदि के पक्ष में किए गए बैनामे को निरस्त करने और जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की थी। इसके बाद भूमि के स्वामित्व और बैनामे की वैधता को लेकर मुकदमा लंबा खिंचता चला गया।

इस मामले में सिविल जज, सीनियर डिवीजन, त्वरित न्यायालय, मुज़फ़्फ़रनगर ने 30 नवंबर 2017 को निर्णय और डिक्री पारित की थी। इस फैसले से असंतुष्ट सत्यबीर आर्य आदि ने प्रथम सिविल अपील संख्या 100/2017 दाखिल की। अपीलीय अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और अभिलेखों पर विचार करने के बाद अपील स्वीकार कर ली। इसके साथ ही 2017 का फैसला और डिक्री निरस्त कर मूल वाद खारिज करने का आदेश दिया।

विवादित जमीन में खसरा संख्या 877, नया नंबर 421, रकबा चार बीघा 19 बिस्वा और खसरा संख्या 878, नया नंबर 420, रकबा दो बीघा 10 बिस्वा शामिल हैं। दोनों भूखंडों का कुल रकबा सात बीघा नौ बिस्वा बताया गया है। अभिलेखों में संपत्तियों के वर्तमान नंबर 175, 176 और 177 का भी उल्लेख है।

ALSO READ THIS :  पूरे इलाके में सड़कें बनीं, सैनिक बिहार की यह गली बदहाल: जलभराव-गंदगी से परेशान लोग, सभासद पर अनदेखी का आरोप

मामले में 19 अगस्त 1963 को किया गया बैनामा प्रमुख विवाद का विषय था। अदालत ने इसे वैध दस्तावेज माना। आदेश में बैनामे का विवरण रजिस्ट्री बही, जिल्द संख्या 463, पृष्ठ 126 से 128 और पंजीकरण संख्या 2193 के रूप में दर्ज है। इसका पंजीकरण 20 नवंबर 1963 को बताया गया है। अदालत ने निर्णय की प्रति संबंधित सब-रजिस्ट्रार को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने का निर्देश भी दिया।

सत्यबीर आर्य आदि की ओर से अधिवक्ता अवध बिहारी लाल गुप्ता और अमित गुप्ता ने पैरवी की। करीब पांच दशक तक चली न्यायिक प्रक्रिया में अब अपीलीय अदालत के फैसले से आर्य पक्ष को बड़ी राहत मिली है।

[wonderplugin_slider id=1]

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें