ल्हासा। तिब्बत में गुरुवार रात आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा में करीब 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 अन्य घायल हो गए। भूकंप के तेज झटकों के कारण 300 से अधिक मकान ढह गए। कई इमारतों की दीवारों में दरारें पड़ गईं और प्रभावित इलाकों में बिजली तथा दूरसंचार सेवाएं बाधित हो गईं। घटना के बाद प्रशासन ने आपातकालीन प्रतिक्रिया सक्रिय करते हुए राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है।
रात 10:33 बजे आया भूकंप, कई घायल गंभीर
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भूकंप गुरुवार रात करीब 10:33 बजे आया। शुक्रवार सुबह 2:25 बजे तक उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 32 घायलों में से 11 की हालत गंभीर थी, जबकि 21 लोगों को मामूली चोटें आई थीं। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने के साथ घायलों को सहायता पहुंचाने तथा मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
भूकंप के कारण कई मकानों को नुकसान पहुंचा है। प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों के सामने सुरक्षित स्थान पर पहुंचने और जरूरी सुविधाएं हासिल करने की चुनौती खड़ी हो गई है। प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त इमारतों का निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि संभावित खतरे का आकलन कर आगे की कार्रवाई की जा सके।
नागकू और ल्हासा के बीच पहाड़ी क्षेत्र में था केंद्र
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, भूकंप का केंद्र तिब्बत के नागकू शहर से लगभग 190 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व और क्षेत्रीय राजधानी ल्हासा से करीब 390 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित पहाड़ी इलाके में था। भूकंप लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर आया।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि भूकंप का केंद्र बाकेन काउंटी के मारू टाउनशिप में था। टाउनशिप के उप-प्रमुख ल्हावांग डैगपो के मुताबिक, झटके इतने तेज थे कि टाउनशिप कार्यालय की दीवारों में दरारें पड़ गईं। भूकंप के प्रभाव से काउंटी मुख्यालय में बिजली और दूरसंचार सेवाएं भी बाधित हुईं, जिससे स्थानीय स्तर पर संचार और राहत कार्यों के संचालन में चुनौतियां पैदा हुईं।
आपातकालीन प्रतिक्रिया सक्रिय, सैकड़ों कर्मी तैनात
भूकंप के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में ‘लेवल-II’ आपातकालीन प्रतिक्रिया सक्रिय कर दी है। राहत और बचाव कार्यों के लिए भूकंप के केंद्र के आसपास 300 से अधिक पुलिस अधिकारियों को भेजा गया है। इसके अलावा क्षेत्रीय दमकल एवं बचाव दल के 347 कर्मियों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है।
बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश, घायलों को प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने और क्षतिग्रस्त इमारतों का निरीक्षण करने में जुटे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाना, जान-माल के नुकसान का आकलन करना और बुनियादी सेवाओं को बहाल करना है। अधिकारियों की ओर से हालात पर नजर रखी जा रही है।
तिब्बत में पहले भी विनाशकारी भूकंप मचा चुके हैं तबाही
तिब्बत और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में भूकंप आना असामान्य नहीं है। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और सक्रिय भूगर्भीय प्रक्रियाओं के कारण यहां समय-समय पर शक्तिशाली भूकंप आते रहे हैं। जनवरी 2025 में तिब्बत के तिंगरी काउंटी में 6.8 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। उस आपदा में 120 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
इससे पहले वर्ष 2010 में पड़ोसी किंघई प्रांत के युशु क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। उस घटना में कम से कम 2,698 लोगों की मौत हुई थी, जबकि लगभग 300 लोग लापता हो गए थे। इन घटनाओं ने क्षेत्र में भूकंप से होने वाले नुकसान और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर किया है।
ताजा भूकंप के बाद एक बार फिर इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना, क्षतिग्रस्त सड़कों और संचार व्यवस्था के बीच बचाव अभियान चलाना तथा प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
हाल की बाढ़ और भूस्खलन से उबरने की चुनौती भी बरकरार
तिब्बत में यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब क्षेत्र हाल की बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों से उबरने की कोशिश कर रहा है। उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद अचानक बाढ़ आई थी। इस आपदा में कई घर, सड़कें और पुल बह गए थे तथा कुछ जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा था।
बाढ़ के बाद प्रभावित समुदायों के सामने पुनर्वास, आवागमन और बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में ताजा भूकंप ने स्थानीय आबादी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। हालांकि, भूकंप से हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी और प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ ही स्पष्ट हो सकेगा।
जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, किंगहाई-तिब्बत पठार में बढ़ता तापमान, ग्लेशियरों का पीछे हटना और मौसम की चरम घटनाएं प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े जोखिमों को और जटिल बना सकती हैं। भूकंप की घटनाएं मुख्य रूप से भूगर्भीय प्रक्रियाओं से जुड़ी होती हैं, जबकि ग्लेशियरों का पिघलना और चरम मौसमी घटनाएं बाढ़ तथा भूस्खलन जैसे अलग-अलग खतरों को बढ़ा सकती हैं।
ताजा भूकंप ने एक बार फिर क्षेत्र की प्राकृतिक संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। यहां के कई समुदाय पहले से ही कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और हाल की आपदाओं के प्रभावों से जूझ रहे हैं। फिलहाल राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं और प्रशासन नुकसान का आकलन कर लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटा है।

