नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने संसद परिसर में राम मंदिर दान से जुड़े कथित मामले को लेकर हुए विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। पूनावाला ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने राजनीतिक विरोध के नाम पर हिंदू भावनाओं को आहत करने का प्रयास किया और राहुल गांधी भारत तथा हिंदुओं के प्रति नफरत दिखा रहे हैं।
शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में प्रदर्शन कर रहे थे और राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं ने उन्हें सांकेतिक रूप से चंदा दिया।
विरोध प्रदर्शन को बताया ‘शर्मनाक’
पूनावाला ने कहा कि किसी मुद्दे को उठाना और पूरे हिंदू समाज को निशाना बनाना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। उनके अनुसार संसद परिसर में जिस प्रकार का प्रदर्शन किया गया, वह अनुचित और शर्मनाक था। उन्होंने कहा कि यदि राम मंदिर दान से जुड़े कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाना था तो ऐसा बिना धार्मिक प्रतीकों का उपयोग किए भी किया जा सकता था।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों पर कथित वित्तीय गड़बड़ी के आरोप हैं, वे न तो संत हैं और न ही साधु। ऐसे में विरोध प्रदर्शन के दौरान साधु का वेश धारण करना उचित नहीं था।
राहुल गांधी से पूछे कई सवाल
बीजेपी नेता ने राहुल गांधी से सवाल करते हुए कहा कि यदि अन्य धार्मिक संस्थाओं से जुड़े कथित वित्तीय मामलों पर आरोप लगते हैं, तो क्या कांग्रेस उसी प्रकार का सांकेतिक प्रदर्शन करने का साहस दिखाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर रहा है।
पूनावाला ने यह भी कहा कि कांग्रेस की राजनीति केवल वोट बैंक पर आधारित है और चुनावी फायदे के लिए बार-बार हिंदू भावनाओं को आहत करने का प्रयास किया जाता है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, 31 जुलाई को संसद परिसर में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विपक्ष के कई नेताओं ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया था।
इस प्रदर्शन के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान बता रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि उनका विरोध कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे को उठाने के लिए था, न कि किसी धर्म या आस्था के खिलाफ।



