मुज़फ़्फ़रनगर। कांवड़ यात्रा के दौरान जहां तरह-तरह की आकर्षक और अनोखी कांवड़ लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं, वहीं शनिवार सुबह 7 बजे मुज़फ़्फ़रनगर के छपार में एक ऐसी ‘श्रवण कांवड़’ पहुंची जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।
ज़िले के शाहपुर थाना क्षेत्र के दुल्हेरा गांव निवासी शिवभक्त यशवीर अपनी मां और चाची को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौटे हैं। उनकी सेवा भावना और अपने बुजुर्गों के प्रति समर्पण को देखकर राहगीरों ने उनकी खूब सराहना की।
यशवीर की कांवड़ की सबसे खास बात यह है कि एक पलड़े में उनकी मां और दूसरे पलड़े में उनकी चाची बैठी हुई थीं, जबकि गंगाजल की कैन कांवड़ के दोनों सिरों पर संतुलित तरीके से बांधी गई थी। करीब 60 वर्ष से अधिक आयु की दोनों महिलाओं के लिए इतनी लंबी पदयात्रा करना संभव नहीं था। ऐसे में बेटे ने खुद उनके सपने को अपना संकल्प बना लिया।
यशवीर ने बताया कि उनकी कोई विशेष मनोकामना नहीं थी। उनकी मां और चाची की वर्षों से इच्छा थी कि वे हरिद्वार जाकर गंगा स्नान करें और कांवड़ यात्रा का हिस्सा बनें। दोनों की उम्र अधिक होने के कारण उन्होंने तय किया कि वे उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर यह यात्रा पूरी कराएंगे।
उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं है। करीब आठ वर्ष पहले भी उन्होंने इसी तरह मां और चाची को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार की यात्रा कराई थी। इस बार भी पूरे परिवार ने उनका साथ दिया। यात्रा में उनके परिवार के पांच अन्य सदस्य भी लगातार सहयोग करते रहे, जिससे यह सेवा और पारिवारिक एकता का सुंदर उदाहरण बन गई।
मुज़फ़्फ़रनगर पहुंचने पर इस अनोखी श्रवण कांवड़ को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। श्रद्धालुओं ने यशवीर के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उनकी सेवा भावना की प्रशंसा की। कई लोगों ने इसे आधुनिक दौर में श्रवण कुमार की परंपरा को जीवंत रखने वाली मिसाल बताया।
यशवीर ने सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करना हर संतान का सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि जीवन में यदि अवसर मिले तो अपने बुजुर्गों की इच्छाओं को पूरा करने का प्रयास जरूर करना चाहिए, क्योंकि उनकी सेवा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है।



