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एफसीआरए बिल पर सपा सांसदों का जोरदार रुख: डिंपल बोलीं-जेपीसी में भेजना अच्छी बात, राम मंदिर चढ़ावे पर भी सरकार दे स्पष्ट जवाब

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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के पास भेजने की मांग को लेकर विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ाया। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने एफसीआरए विधेयक को जेपीसी के पास भेजे जाने का समर्थन करते हुए कहा कि इस कानून से जुड़े प्रावधानों और संस्थाओं पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर व्यापक चर्चा जरूरी है।

सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि यदि एफसीआरए विधेयक को जेपीसी के पास भेजा जा रहा है तो यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले ही आशंका जता चुका है कि संस्थाओं और उनके जमीनी स्तर पर काम करने के तरीके को लेकर किस तरह हेरफेर की स्थिति पैदा हो सकती है।

डिंपल यादव ने एनजीओ पर दबाव का लगाया आरोप

डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के लिए काम करने वाले एनजीओ और अन्य संस्थाओं पर भी सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं करने की स्थिति में दबाव बनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को लोकतांत्रिक संस्थाओं और सिविल सोसाइटी के साथ पारदर्शी तथा निष्पक्ष रवैया अपनाना चाहिए। उनके मुताबिक एफसीआरए जैसे महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही आगे बढ़ना उचित होगा।

राम मंदिर चढ़ावे को लेकर भी सरकार से जवाब की मांग

डिंपल यादव ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ा मामला भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि कथित तौर पर चोरी की गई रकम को बोरियों में भरकर ट्रेनों के जरिए ले जाया गया।

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उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को सार्वजनिक नहीं करना चाहती थी, ताकि आम लोगों को दान-पात्रों से कथित चोरी की जानकारी न मिल सके। डिंपल यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को उठाया है और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी इस पर आवाज उठाई है।

हालांकि, डिंपल यादव द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इन बयानों से नहीं होती है।

‘सरकार बताए वास्तव में क्या हुआ’

सपा सांसद ने सरकार से मांग की कि राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े पूरे मामले पर स्पष्ट जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि वास्तव में क्या हुआ और दान की रकम को लेकर लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है।

उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े ऐसे मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और सरकार को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

रामगोपाल यादव का सरकार पर तीखा हमला

चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सपा सांसद रामगोपाल यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे, लेकिन उनके मुताबिक अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

रामगोपाल यादव ने तंज कसते हुए कहा कि देश का सब कुछ लूट लिया गया है और ऐसा न हो कि चढ़ावा भी बाहर चला जाए।

अवधेश प्रसाद बोले—करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर चढ़ावे के मामले को देश के लिए बेहद अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि इससे करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

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उन्होंने कथित चढ़ावा चोरी को बेहद गंभीर बताते हुए इसे डकैती के बराबर करार दिया। अवधेश प्रसाद ने कहा कि मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।

आनंद भदौरिया ने तिरंगे का किया जिक्र

सपा सांसद आनंद भदौरिया ने इस दौरान तिरंगे को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों ने तिरंगा उठाया और देश की आजादी की महान लड़ाई में हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा कि आज भी हर भारतीय गर्व के साथ तिरंगे को अपने दिल के करीब रखता है। उनके बयान को स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जोड़कर देखा गया।

बिहार में शराबबंदी और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठा

संसद में बिहार की शराबबंदी और कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने आरोप लगाया कि बिहार में शराबबंदी पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि केवल शराबबंदी ही नहीं, बल्कि बिहार सरकार भी विफल रही है।

उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए दावा किया कि हालात पूरी तरह चरमरा गए हैं। मनोज कुमार ने कहा कि उन्होंने हाल ही में गृह मंत्री से मुलाकात कर बिहार की बिगड़ती कानून-व्यवस्था का संज्ञान लेने का आग्रह किया है।

गृह मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

मनोज कुमार ने मांग की कि गृह मंत्री संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत करें और बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।

इस तरह संसद में बुधवार को एफसीआरए विधेयक को जेपीसी में भेजने की मांग के साथ राम मंदिर चढ़ावे, लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और बिहार की कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे भी विपक्ष की ओर से प्रमुखता से उठाए गए। एफसीआरए बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव आगे भी जारी रहने के आसार हैं।

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