लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दावा किया है कि प्रदेश में एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि जनता के समर्थन से एनडीए भारी बहुमत हासिल करेगा।
अखिलेश यादव के INDIA ब्लॉक की 30 सितंबर को दिल्ली में हुई बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर ब्रजेश पाठक ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि INDIA गठबंधन के घटक दलों के बीच आपसी खींचतान है और गठबंधन की राजनीतिक प्रासंगिकता कम हो गई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अखिलेश यादव की अनुपस्थिति के लिए सपा ने राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया और अन्य निर्धारित कार्यक्रमों को वजह बताया था, जबकि बैठक में सपा की ओर से सांसद हरेंद्र मलिक और मोहिबुल्लाह नदवी शामिल हुए।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए फिर सरकार बनाएगा। उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि जब भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव होते हैं, गठबंधन के कई घटक दल अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं।
चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री नरेंद्र कश्यप ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन, सीबीआई और ईडी को लेकर विरोध तथा संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने को लेकर कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी चुनावी हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराकर जनता को गुमराह कर रही है। ये आरोप नरेंद्र कश्यप के राजनीतिक बयान हैं।
INDIA ब्लॉक की बैठक को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाए गए। दूसरी ओर, 30 सितंबर की बैठक के बाद विपक्षी दलों ने एसआईआर के मुद्दे पर संयुक्त कार्यक्रमों की घोषणा की। बैठक में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए तथा गठबंधन ने अक्टूबर में देशभर में संयुक्त विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की योजना घोषित की।
अखिलेश यादव के पीडीए नारे पर निशाना साधते हुए नरेंद्र कश्यप ने राज्यसभा सीटों के बंटवारे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व ने परिवार और आर्थिक रूप से प्रभावशाली लोगों को राज्यसभा भेजकर पीडीए के हितों की अनदेखी की है। उन्होंने दावा किया कि सपा के राजनीतिक नारे और उसके फैसलों में अंतर दिखाई देता है।
वहीं, 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज हो रहा है। भाजपा जहां एनडीए की दोबारा सरकार बनने का दावा कर रही है, वहीं विपक्षी दल सरकार के कामकाज, रोजगार, महंगाई, आरक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इन दावों और आरोपों का अंतिम आकलन आगामी चुनाव और उसके परिणामों से ही होगा।
