मुजफ्फरनगर। वाल्मीकि समाज की वरिष्ठ नेत्री और लंबे समय से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय कुल्लन देवी का बीमारी के चलते 17 सितंबर की देर रात निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही वाल्मीकि समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। समाज के लोगों, सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों और उनके परिचितों ने कुल्लन देवी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
सामाजिक क्षेत्र में लंबे समय तक निभाई सक्रिय भूमिका
कुल्लन देवी लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी हुई थीं। वाल्मीकि समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर वह लगातार अपनी आवाज उठाती रही थीं। देश और प्रदेश के अलग-अलग सामाजिक संगठनों के साथ जुड़कर उन्होंने समाजहित से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।
सामाजिक गतिविधियों में उनकी निरंतर सक्रियता के चलते समाज के बीच उनकी अलग पहचान बनी थी। विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर उनकी भागीदारी और लोगों के बीच उनकी मौजूदगी के कारण समाज के लोग उन्हें सम्मान की नजर से देखते थे।
बीमारी के चलते देर रात हुआ निधन
परिजनों के अनुसार कुल्लन देवी पिछले कुछ समय से बीमारी से पीड़ित थीं। इसी बीमारी के चलते 17 सितंबर की देर रात उनका निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही परिवार और रिश्तेदारों में शोक छा गया।
वहीं, निधन की खबर वाल्मीकि समाज और उनके सामाजिक संपर्कों तक पहुंचते ही बड़ी संख्या में लोगों ने शोक व्यक्त किया। लोगों ने उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
दोपहर दो बजे होगा अंतिम संस्कार
कुल्लन देवी का अंतिम संस्कार 18 सितंबर 2026 को दोपहर दो बजे मुजफ्फरनगर में गौशाला रोड स्थित शहर श्मशान घाट पर किया जाएगा। अंतिम संस्कार में परिवार और रिश्तेदारों के साथ वाल्मीकि समाज के लोगों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों और उनके परिचितों के शामिल होने की संभावना है।
उनके निधन के बाद से ही उनके आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का पहुंचना जारी है। समाज के लोग और उनके परिचित उनके साथ बिताए समय को याद कर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
समाज के लिए बताई जा रही अपूरणीय क्षति
कुल्लन देवी के निधन को वाल्मीकि समाज और सामाजिक क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति बताया जा रहा है। समाज के लोगों के अनुसार उन्होंने लंबे समय तक सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहकर समाजहित से जुड़े मुद्दों को उठाने का काम किया।
उनके निधन से सामाजिक क्षेत्र में एक ऐसी सक्रिय आवाज का अभाव महसूस होगा, जो लंबे समय से समाज के बीच अपनी भूमिका निभाती रही। उनके निधन पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज के लोगों ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

