मुज़फ्फ़रनगर। सिविल लाइन थाने में 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम के हत्थे चढ़े एसएसआई प्रवीण शर्मा के मामले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि देर शाम सिविल लाइन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के तबादले की खबर ने पुलिस महकमे में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। रिश्वतखोरी कांड के कुछ घंटों बाद ही तबादले का आदेश सामने आने से लोग दोनों घटनाओं को जोड़कर देखने लगे, हालांकि पुलिस विभाग के अनुसार यह महज संयोग है।
दरअसल, डीजीपी मुख्यालय से जारी तबादला सूची का आदेश 30 जून को ही जारी हो चुका था, जबकि उसकी प्रति एक जुलाई की शाम मुज़फ्फ़रनगर पहुंची। इसलिए विभागीय स्तर पर इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा है। बावजूद इसके, जिस समय यह आदेश सामने आया, उस समय सिविल लाइन थाना पूरे प्रदेश में एसएसआई रिश्वतखोरी कांड को लेकर सुर्खियों में था, इसलिए यह ट्रांसफर चर्चा का विषय बन गया।
डीजीपी मुख्यालय के आदेश के अनुसार इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह का गैर जनपद तबादला आगरा जोन कर दिया गया है। उनके साथ रणधीर सिंह और तूफान सिंह का भी आगरा जोन में स्थानांतरण किया गया है। प्रदेशभर में जारी इस सूची में कुल 194 इंस्पेक्टरों के गैर जनपद तबादले किए गए हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि इंद्रजीत सिंह को महज चार दिन पहले, 28 जून को ही सिविल लाइन थाने की कमान सौंपी गई थी। उनसे पहले थाना प्रभारी रहे महावीर सिंह चौहान को हटाकर बुढ़ाना सर्किल में सीओ कार्यालय से संबद्ध किया गया था। ऐसे में चार दिन बाद ही थाना में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला सामने आना और उसके तुरंत बाद थाना प्रभारी के तबादले का आदेश सामने आना शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विभाग का कहना है कि यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया स्थानांतरण है और इसका रिश्वतकांड से कोई संबंध नहीं है।
गौरतलब है कि बुधवार दोपहर एंटी करप्शन टीम ने सिविल लाइन थाने के एसएसआई प्रवीण शर्मा को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक मुकदमे में राहत देने के नाम पर लगातार एक लाख रुपये की मांग की जा रही थी, जिसके बाद एंटी करप्शन संगठन ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। इस कार्रवाई के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा और अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे।
हालांकि इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह का तबादला इस कार्रवाई से जुड़ा नहीं है, क्योंकि स्थानांतरण आदेश पहले ही जारी किया जा चुका था। इसके बावजूद दोनों घटनाओं के एक साथ सामने आने से पूरे पुलिस महकमे और शहर में यही चर्चा हो रही है।



