नई दिल्ली। रविवार, 1 नवंबर 2026 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा और नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ-अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग के माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति की जानकारी मिलती है। इसके साथ ही राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल और दिशाशूल का भी विचार किया जाता है।
रविवार को साध्य योग दोपहर 2 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके बाद शुभ योग की शुरुआत होगी। वहीं, इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त में किए गए शुभ कार्यों में सफलता मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, रविवार को पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ऐसे में इन दिशाओं की ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
सप्तमी तिथि के बाद शुरू होगी अष्टमी
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि शनिवार शाम 4 बजकर 57 मिनट से शुरू हो चुकी है और रविवार दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी, जो सोमवार 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगी।
रविवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 44 मिनट पर होगा। चंद्रोदय का समय दोपहर 11 बजकर 52 मिनट रहेगा। वहीं, चंद्रास्त सोमवार दोपहर 12 बजकर 41 मिनट पर होगा।
स्वाति नक्षत्र में रहेंगे सूर्य देव
रविवार को सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में स्थित रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में स्वाति नक्षत्र का संबंध स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और परिवर्तन से माना जाता है। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव हैं, जबकि इसके स्वामी राहु माने जाते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, स्वाति नक्षत्र में सूर्य की स्थिति व्यक्ति के भीतर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और पुरानी परिस्थितियों से बाहर निकलने की इच्छा को मजबूत कर सकती है। इस दौरान लोगों में अपने कार्यों को नए तरीके से करने और जीवन में आगे बढ़ने की भावना प्रबल होने की मान्यता है।
दोपहर 2:39 बजे तक रहेगा साध्य योग
रविवार को दोपहर 2 बजकर 39 मिनट तक साध्य योग रहेगा। इसके बाद शुभ योग प्रारंभ होगा। ज्योतिष शास्त्र में साध्य योग को 27 नित्य योगों में 22वां योग माना गया है। साध्य शब्द का अर्थ होता है ऐसा कार्य जिसे प्रयास और मेहनत से पूरा किया जा सके।
इस योग की अधिष्ठात्री देवी माता सावित्री मानी जाती हैं और इसके प्रमुख ग्रह बुध हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, साध्य योग में योजनाबद्ध तरीके से किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना रहती है। इस दौरान कठिन कार्यों को पूरा करने, नई योजनाएं बनाने और महत्वपूर्ण कामों को आगे बढ़ाने के लिए समय अनुकूल माना जाता है।
सुबह 11:48 से दोपहर 12:32 बजे तक अभिजीत मुहूर्त
रविवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यह लगभग 44 मिनट की अवधि होगी। हिंदू पंचांग में अभिजीत मुहूर्त को दिन के सबसे शुभ समयों में गिना जाता है।
मान्यता है कि इस समय शुरू किए गए कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, नए काम की शुरुआत और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए इसे अच्छा समय माना जाता है। हालांकि, किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या मांगलिक कार्य के लिए अन्य पंचांग स्थितियों का विचार भी किया जाता है।
रात 10:23 से 11:55 बजे तक अमृतकाल
रविवार को रात 10 बजकर 23 मिनट से 11 बजकर 55 मिनट तक अमृतकाल रहेगा। पंचांग में अमृतकाल को अत्यंत शुभ और फलदायी समय माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में किए गए कार्यों से अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
इस समय पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, नई योजनाओं पर विचार और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा व्यापार और निवेश से जुड़े निर्णयों के लिए भी अमृतकाल को अनुकूल समय माना जाता है।
शाम 4:21 से 5:44 बजे तक रहेगा राहुकाल
रविवार को राहुकाल शाम 4 बजकर 21 मिनट से शाम 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को किसी नए और शुभ कार्य की शुरुआत के लिए प्रतिकूल माना जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत और महत्वपूर्ण शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
राहुकाल की गणना सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिनमान को आठ बराबर हिस्सों में बांटकर की जाती है। इसका समय प्रत्येक दिन अलग-अलग होता है और स्थान के अनुसार इसमें बदलाव भी हो सकता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, राहुकाल में पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है, लेकिन कोई नया महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
दोपहर 12:10 से 1:34 बजे तक यमगंड काल
रविवार को यमगंड काल दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में यमगंड को अशुभ समय माना गया है। इसका संबंध मृत्यु के देवता यमराज से माना जाता है।
मान्यता के अनुसार, इस अवधि में नए कार्यों की शुरुआत, महत्वपूर्ण यात्राओं और मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए। विशेष रूप से व्यापार की नई शुरुआत और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए इस समय को अनुकूल नहीं माना जाता है। हालांकि, पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है।
दोपहर 2:57 से 4:21 बजे तक गुलिक काल
रविवार को गुलिक काल दोपहर 2 बजकर 57 मिनट से शाम 4 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में गुलिक काल को अशुभ समय की श्रेणी में रखा जाता है। इसे गुलिक नामक उपग्रह से संबंधित माना जाता है।
मान्यता के अनुसार, इस समय नए कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए। हालांकि, कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में गुलिक काल को अलग दृष्टिकोण से भी देखा जाता है। बार-बार किए जाने वाले कार्यों के लिए इसे अनुकूल माना जाता है। इसके अलावा बैंक में धन जमा करना, दान-पुण्य और कुछ विशेष प्रकार के निवेश को भी इस दौरान उचित माना जाता है।
तुला राशि में रहेंगे सूर्य देव
रविवार को सूर्य देव तुला राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना गया है। सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रतिष्ठा, ऊर्जा और अधिकार का प्रतीक माना जाता है, जबकि तुला राशि का स्वामी शुक्र है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य के तुला राशि में होने पर व्यक्ति के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है। इस स्थिति में किसी भी महत्वपूर्ण फैसले पर पहुंचने से पहले विचार-विमर्श करने की आवश्यकता महसूस हो सकती है। सूर्य की यह स्थिति संतुलन, साझेदारी और आपसी सामंजस्य को महत्व देने का भी संकेत मानी जाती है।
कर्क राशि में रहेंगे चंद्र देव
इस दिन चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। कर्क राशि चंद्रमा की अपनी राशि मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा का अपनी राशि में होना प्रभावशाली स्थिति मानी जाती है।
कर्क राशि जल तत्व की राशि है। चंद्रमा को मन, भावनाओं, कल्पनाशक्ति और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है। इस राशि में चंद्रमा की उपस्थिति से संवेदनशीलता, रचनात्मकता और पारिवारिक मामलों के प्रति लगाव बढ़ने की मान्यता है। कला, साहित्य और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए यह स्थिति अनुकूल मानी जाती है।
पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल
रविवार को पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। हिंदू ज्योतिष और वास्तु संबंधी मान्यताओं में दिशाशूल का विशेष महत्व बताया गया है। दिशाशूल का अर्थ ऐसी दिशा से है, जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा शुरू करना अशुभ माना जाता है।
रविवार को पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी आवश्यक काम से इन दिशाओं में जाना पड़े तो ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार यात्रा से पहले संबंधित उपाय किए जाते हैं।
1 नवंबर 2026 का पंचांग एक नजर में
तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष सप्तमी, दोपहर 2:51 बजे तक, इसके बाद अष्टमी
वार: रविवार
सूर्योदय: सुबह 6:36 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:44 बजे
चंद्रोदय: सुबह 11:52 बजे
चंद्रास्त: अगले दिन दोपहर 12:41 बजे
नक्षत्र: स्वाति
साध्य योग: दोपहर 2:39 बजे तक
इसके बाद: शुभ योग
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 से दोपहर 12:32 बजे तक
अमृतकाल: रात 10:23 से 11:55 बजे तक
राहुकाल: शाम 4:21 से 5:44 बजे तक
यमगंड काल: दोपहर 12:10 से 1:34 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 2:57 से शाम 4:21 बजे तक
सूर्य राशि: तुला
चंद्र राशि: कर्क
दिशाशूल: पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम

