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चतुर्दशी के बाद लगेगी अमावस्या, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य, यात्रा, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या अन्य महत्वपूर्ण कार्य की योजना बनाने से पहले पंचांग देखा जाता है। पंचांग हिंदू कालगणना की ऐसी पद्धति है, जिसमें तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार के साथ सूर्य, चंद्रमा तथा अन्य ग्रहों की स्थिति का भी ध्यान रखा जाता है।

10 सितंबर 2026, गुरुवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी। पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि सुबह 10:34 बजे तक रहेगी और इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन सिद्ध योग और मघा नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है।

शिव आराधना के लिए विशेष माना जाता है दिन

कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित कर भगवान शिव का ध्यान और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।

घर में सुख-शांति, मानसिक स्थिरता और सकारात्मकता की कामना से शिव आराधना की जा सकती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव को जल अर्पित करने के साथ पूजा-पाठ और मंत्र जाप कर सकते हैं।

मघा नक्षत्र में पितरों का स्मरण

10 सितंबर को मघा नक्षत्र दोपहर 2:06 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में मघा नक्षत्र का संबंध पितरों और पूर्वजों से माना जाता है। ऐसे में इस दिन पितरों का स्मरण, जरूरतमंदों को दान और सेवा कार्य करना पुण्यकारी माना जाता है।

पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनके आशीर्वाद की कामना के लिए लोग अपनी परंपरा के अनुसार धार्मिक कार्य कर सकते हैं।

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जानिए सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

10 सितंबर को सूर्योदय सुबह 5:43 बजे और सूर्यास्त शाम 6:09 बजे होगा। वहीं चंद्रोदय सुबह 4:39 बजे और चंद्रास्त शाम 5:37 बजे होने का अनुमान है।

इस दिन मघा नक्षत्र दोपहर 2:06 बजे तक रहेगा, जबकि सिद्ध योग शाम 7:17 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है।

अभिजित मुहूर्त में बन सकता है शुभ कार्य का समय

10 सितंबर को अभिजित मुहूर्त सुबह 11:32 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अभिजित मुहूर्त को कई शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

हालांकि किसी विशेष धार्मिक संस्कार या महत्वपूर्ण कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और संबंधित परंपराओं के अनुसार मुहूर्त का विचार करना बेहतर माना जाता है।

राहुकाल और अन्य अशुभ समय

गुरुवार को 10 सितंबर के दिन राहुकाल दोपहर 1:29 बजे से 3:02 बजे तक रहेगा। वहीं गुलिक काल सुबह 8:49 बजे से 10:22 बजे तक और यमघण्ट काल सुबह 5:43 बजे से 7:16 बजे तक रहेगा।

शुभ कार्य की योजना बनाते समय परंपरा के अनुसार इन समयों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

सिंह राशि में रहेंगे सूर्य और चंद्रमा

पंचांग के अनुसार 10 सितंबर को सूर्य और चंद्रमा दोनों सिंह राशि में रहेंगे। ग्रहों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस दिन धार्मिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है।

गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल

गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

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यदि किसी कारणवश यात्रा करना आवश्यक हो तो लोग अपनी धार्मिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार उपाय करके यात्रा शुरू करते हैं। कुल मिलाकर 10 सितंबर का दिन चतुर्दशी और अमावस्या के संधिकाल, मघा नक्षत्र तथा सिद्ध योग के कारण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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