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नवमी के बाद दशमी का आगमन, गणेश उत्सव के सातवें दिन बप्पा की विशेष पूजा, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और दिशाशूल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश या धार्मिक अनुष्ठान से पहले तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू कालगणना की ऐसी पारंपरिक पद्धति है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन के विभिन्न समयों और धार्मिक महत्व का निर्धारण किया जाता है।

20 सितंबर 2026, रविवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि शाम 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि का आरंभ होगा। यह दिन धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि गणेश उत्सव के सातवें दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना और विसर्जन की प्रक्रिया की जाएगी। रविवार होने के कारण इस दिन सूर्य देव की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा।

नवमी के बाद शुरू होगी दशमी तिथि

पंचांग के अनुसार 20 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि शाम 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवमी और दशमी दोनों ही तिथियों का अपना अलग महत्व है। इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा कर सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर सकते हैं।

गणेश उत्सव के सातवें दिन बप्पा की विशेष आराधना

गणेश उत्सव के सातवें दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, फल और फूल अर्पित कर सकते हैं। पूजा के दौरान गणेश मंत्रों का जाप और आरती करने की परंपरा है। कई स्थानों पर इस दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन भी किया जाएगा।

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गणपति पूजन के दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश से विघ्न-बाधाओं को दूर करने और जीवन में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करेंगे।

रविवार को सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व

रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार की सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दे सकते हैं।

पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा।

चंद्रमा धनु राशि में रहेगा

इस दिन सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनु राशि में रहेगा। पंचांग के अनुसार सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेगा। ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति को ज्योतिषीय दृष्टि से दिन के विभिन्न कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

20 सितंबर को चंद्रोदय दोपहर 2 बजकर 21 मिनट पर होगा और चंद्रास्त रात 1 बजकर 5 मिनट पर होगा।

सौभाग्य योग के बाद बनेगा शोभन योग

रविवार को दोपहर 3 बजकर 23 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा। इसके बाद शोभन योग शुरू हो जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में सौभाग्य और शोभन योग को शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि किसी भी कार्य के लिए मुहूर्त तय करते समय तिथि, नक्षत्र और अन्य पंचांग तत्वों को भी ध्यान में रखा जाता है।

अभिजीत मुहूर्त में बनेंगे शुभ कार्यों के अवसर

20 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। पंचांग परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में माना जाता है। इस दौरान धार्मिक कार्य, पूजा-अर्चना और अन्य शुभ गतिविधियां की जा सकती हैं।

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इसके अलावा अमृतकाल रात 11 बजकर 11 मिनट से रात 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

राहुकाल में नए काम शुरू करने से बचने की मान्यता

रविवार को राहुकाल दोपहर 4 बजकर 51 मिनट से शाम 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। वहीं गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शाम 4 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।

यमगंड काल दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से 1 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि नियमित या पहले से चल रहे कार्यों को लेकर अलग-अलग परंपराओं में अलग मान्यताएं मिलती हैं।

पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल

20 सितंबर को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाले दिन संबंधित दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारण से पश्चिम दिशा की यात्रा करना आवश्यक हो, तो परंपरा के अनुसार कुछ उपाय करके यात्रा शुरू करने की मान्यता है।

20 सितंबर 2026 का प्रमुख पंचांग

तिथि — भाद्रपद शुक्ल नवमी शाम 5:51 बजे तक, इसके बाद दशमी

वार — रविवार

सूर्योदय — सुबह 6:18 बजे

सूर्यास्त — शाम 6:22 बजे

चंद्रोदय — दोपहर 2:21 बजे

चंद्रास्त — रात 1:05 बजे

सूर्य राशि — कन्या

चंद्र राशि — धनु

नक्षत्र — उत्तराफाल्गुनी

सौभाग्य योग — दोपहर 3:23 बजे तक

शोभन योग — दोपहर 3:23 बजे के बाद

अभिजीत मुहूर्त — सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक

अमृतकाल — रात 11:11 बजे से 12:59 बजे तक

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राहुकाल — शाम 4:51 बजे से 6:21 बजे तक

गुलिक काल — दोपहर 3:21 बजे से 4:51 बजे तक

यमगंड काल — दोपहर 12:20 बजे से 1:50 बजे तक

दिशाशूल — पश्चिम दिशा

धार्मिक मान्यताओं पर आधारित: पंचांग के शुभ-अशुभ समय और ज्योतिषीय उपाय पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था और परंपरा के संदर्भ में देखा जाता है।

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