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दशमी तिथि के साथ शोभन योग का संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश या नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की ऐसी पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है। आइए जानते हैं 21 सितंबर 2026, सोमवार का पंचांग और दिनभर के महत्वपूर्ण मुहूर्त।

दशमी तिथि के बाद शुरू होगी एकादशी

21 सितंबर को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रात 8 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी।

सोमवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 20 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 3 बजकर 4 मिनट पर और चंद्रास्त रात 2 बजकर 1 मिनट पर होगा।

उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेंगे सूर्य

पंचांग के अनुसार 21 सितंबर को सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेंगे। उत्तराफाल्गुनी आकाश मंडल का 12वां नक्षत्र माना जाता है। यह सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री तक फैला हुआ है।

इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव माने जाते हैं, जबकि इसके देवता अर्यमा हैं, जिन्हें देवताओं और पितरों के प्रमुख के रूप में माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों में तेजस्विता, महत्वाकांक्षा, परोपकार और नेतृत्व क्षमता जैसे गुण पाए जाते हैं।

शोभन योग में शुभ कार्यों के लिए खास दिन

सोमवार को दोपहर 4 बजकर 4 मिनट तक शोभन योग रहेगा। ज्योतिष में इसे शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक योग माना जाता है। इसे सौ योगों में पांचवां योग बताया गया है।

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ज्योतिषीय गणना के अनुसार जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों की योग दूरी 53 अंश 20 कला से 66 अंश 40 कला के बीच होती है, तब शोभन योग बनता है। इसके कारक ग्रह देवगुरु बृहस्पति माने जाते हैं, जिन्हें ज्ञान, वृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि शोभन योग में शुभ कार्य, मांगलिक अनुष्ठान और नई यात्रा की शुरुआत करना फलदायी होता है।

अभिजीत मुहूर्त में बन रहा शुभ संयोग

21 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। पंचांग में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समय में शामिल किया जाता है।

आमतौर पर अभिजीत मुहूर्त करीब 48 मिनट का होता है और इसकी गणना दिनमान के आधार पर की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय किए गए शुभ कार्यों में सफलता की कामना की जाती है।

अमृतकाल में शुभ कार्य करना माना जाता है फलदायी

सोमवार को अमृतकाल रात 12 बजकर 1 मिनट से रात 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृतकाल को शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है।

इस अवधि में नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा जैसे कार्य करना शुभ माना जाता है।

राहुकाल में नए काम की शुरुआत से बचें

21 सितंबर को राहुकाल सुबह 7 बजकर 49 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

राहुकाल का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है। इस अवधि में नए काम की शुरुआत से बचने की मान्यता है, जबकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।

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गुलिक काल का समय

सोमवार को गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में गुलिक काल को सामान्य तौर पर नए कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

हालांकि, पहले से चल रहे कार्यों को इस दौरान जारी रखा जा सकता है। कुछ मान्यताओं में बार-बार किए जाने वाले कार्य, दान और कुछ वित्तीय गतिविधियों के लिए इस समय को उपयोगी माना गया है।

यमगंड काल में यात्रा से बचने की मान्यता

21 सितंबर को यमगंड काल सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में यमगंड को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ समय माना जाता है।

इस अवधि में नया व्यापार शुरू करने, महत्वपूर्ण यात्रा करने और नए कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

कन्या राशि में रहेंगे सूर्य

सोमवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में रहने के दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है। इस अवधि को कामकाज और बौद्धिक गतिविधियों से भी जोड़ा जाता है।

मकर राशि में रहेगा चंद्रमा

इस दिन चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मकर राशि के स्वामी शनि हैं और चंद्रमा के इस राशि में रहने पर व्यक्ति के व्यवहार में व्यावहारिकता और अनुशासन का प्रभाव देखने को मिल सकता है।

पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल

सोमवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में दिशाशूल उस दिशा को कहा जाता है, जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना अनुकूल नहीं माना जाता। सोमवार को पूर्व दिशा में यात्रा को लेकर दिशाशूल की मान्यता है।

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21 सितंबर 2026 के प्रमुख समय

सूर्योदय: सुबह 6:19 बजे

सूर्यास्त: शाम 6:20 बजे

चंद्रोदय: दोपहर 3:04 बजे

चंद्रास्त: रात 2:01 बजे

दशमी तिथि: रात 8:01 बजे तक

शोभन योग: दोपहर 4:04 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक

अमृतकाल: रात 12:01 बजे से 1:47 बजे तक

राहुकाल: सुबह 7:49 बजे से 9:19 बजे तक

यमगंड काल: सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक

गुलिक काल: दोपहर 1:50 बजे से 3:20 बजे तक

दिशाशूल: पूर्व दिशा

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